July 24, 2026 6 बार देखा गया
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के शंकरगढ़ ब्लॉक के बेनीपुरी गांव में बिजली विभाग की लापरवाही सामने आई है और ये लोगों के लिए लंबे समय से खतरा बनी हुई है। गांव में करीब 40 साल से दो ट्रांसफॉर्मर जमीन पर रखे हुए हैं। ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो इन्हें ऊंचाई पर रखा गया और न ही चारों तरफ जाली लगवाई गई।
रिपोर्ट – सुनीता, लेखन – रचना

फोटो साभार: सुनीता
इससे बरसात के मौसम में करंट फैलने का डर बना रहता है। ग्रामीणों के अनुसार अब तक कई जानवरों की मौत भी हो चुकी है और ग्रामीण किसी बड़े हादसे की आशंका भी जता रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग में व्यवस्था के लिए बजट आता तो है लेकिन गांव में खर्च नहीं होता। जिस तरह बिजली व्यवस्था के लिए सरकार बजट खर्च करती है उसके बावजूद कई गांवों में आज भी सही व्यवस्था नहीं है। गांव में कहीं बिजली नहीं है तो कहीं ट्रांसफॉर्मर खुले में जमीन पर रखे हुए हैं।
बेनीपुरी गांव की शकुन्तला बताती हैं की 40 साल से ट्रांसफॉर्मर जमीन पर रखा है इस कारण से करंट ज़मीन पर भी आ जाती है और कई जानवरों की मौत हो चुकी है। बचाव के लिए न इसे ऊंचाई पर रखा गया और न ही जाली लगवाई गई। जहां ट्रांसफॉर्मर रखा है वहीं मोहल्ले की गली है और उसके बगल से कई गांवों की सड़क भी जाती है। एक दिन में हजारों लोग यहां से निकलते हैं जिससे इस ट्रांसफॉर्मर से करंट लगने का बहुत ज्यादा डर है।
“हम लोग मजदूरी करने चले जाते हैं और घर में छोटे-छोटे बच्चे रहते हैं। बरसात के समय करंट का सबसे ज्यादा डर बना रहता है और बारिश का मौसम भी शुरू हो गया है। बच्चे खेलते रहते हैं। अगर ट्रांसफॉर्मर के पास बच्चे चले जाए तो करंट लग सकता है। हर बरसात में कोई न कोई घटना होती ही है। भले ही इंसान की मौत न हुई हो लेकिन जानवर हर साल करंट की चपेट में आते हैं।”
वहीं जीतेन्द्र बताते हैं कि उनके घर के बिल्कुल बगल में दो ट्रांसफॉर्मर रखे हैं। एक 400 केवी का है और दूसरा 65 केवी का। अब तक किसी आदमी की मौत तो नहीं हुई लेकिन कई लोगों को झटका लग चुका है। लगभग दस गायों की मौत हो चुकी है। ट्रांसफॉर्मर नीचे रखा है इसलिए जानवर घास चरने जाते हैं और करंट की चपेट में आ जाते हैं। जीतेन्द्र के अनुसार यहां करीब तीन हजार की आबादी है। जिस रास्ते पर ट्रांसफॉर्मर रखा है वहीं आदिवासी मोहल्ला है। अगर कोई घटना हो गई तो जिम्मेदार कौन होगा? लोगों द्वारा कई बार बिजली विभाग को सूचना दी गई है कि ट्रांसफॉर्मर को ऊपर रखवा दिया जाए और उसके चारों तरफ जाली लगवा दी जाए या फिर यहां से हटाकर दूसरी जगह रख दिया जाए।

फोटो साभार: सुनीता
उसी मोहल्ले के रहने वाली गायत्री कहती हैं “जब बारिश होती है तो ट्रांसफॉर्मर का करंट काफी दूर तक मारता है। हम लोग उस समय गली बदलकर दूसरे रास्ते से निकलते हैं। कई शिकायतों के बाद भी अभी तक बिजली विभाग ने कोई व्यवस्था नहीं करवाई है। जिस दिन कोई बड़ी घटना हो जाएगी उसी दिन सब व्यवस्था करेंगे।”
बता दें जिस जमीन पर ट्रांसफॉर्मर रखा गया है उसके मालिक कुन्जन लाल के अनुसार दो बार लिखित आवेदन दिया जा चुका है कि ट्रांसफॉर्मर को यहां से कहीं सरकारी जमीन पर या दूसरी जगह रख दिया जाए। अगर हटाना संभव नहीं है तो ऊंचा चबूतरा बनाकर रखा जाए या चारों तरफ जाली लगा दी जाए। वे कहते हैं “इस मोहल्ले में आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं इसलिए कोई सुनवाई नहीं हो रही। अगर किसी छोटे बच्चे के साथ हादसा हो गया तो जिम्मेदार कौन होगा?”

फोटो साभार: सुनीता
इस मामले में बिजली विभाग के जेई आलोक से भी जानकारी ली गई तो उनका पक्ष रहा कि उनके संज्ञान में अब तक लिखित शिकायत नहीं आई थी। बेनीपुर में दो ट्रांसफॉर्मर रखे हैं एक 400 केवी का और दूसरा 65 केवी का। वहां व्यवस्था करवा दिया जाएगा। अगर संभव हुआ तो चबूतरा बनवाया जाएगा नहीं तो चारों तरफ जाली लगवा दी जाएगी ताकि बच्चे और जानवर वहां न जा सकें। शहरों में भी कई जगह ट्रांसफॉर्मर हैं लेकिन वहां उन्हें ऊंचाई पर रखा गया है और सुरक्षा की व्यवस्था है। फिलहाल यही एक जगह है जहां ऐसी स्थिति है। इसकी व्यवस्था बहुत जल्द करवा दी जाएगी।
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