
गोंधल मूवी पर क्या बोले अनुराग कश्यप?
Gondhal Film Director Anurag Kashyap Reaction : पिछले कुछ सालों से दुनियाभर में भारतीय फिल्मों का डंका बज रहा है और कई सारी भारतीय फिल्मों को ऑस्कर्स में सम्मान मिला है. साल 2026 में भी साधारण बजट में बनी फिल्म गोंधल ने बड़ा कमाल कर के दिखा दिया है. इस फिल्म को भारत की ओर से 99वें ऑस्कर्स के लिए ऑफिशियल सबमिशन मिला है. लेकिन शायद इस बात से अनुराग कश्यप इत्तेफाक रखते नजर नहीं आ रहे हैं. उन्होंने भारत में ऑस्कर्स के लिए आधिकारिक तौर पर भेजे जाने वाली फिल्मों को लेकर रिएक्ट किया है.
उनका ऐसा मानना है कि कई फिल्में भूतकाल में ऐसी रही हैं जिन्हें ऑस्कर्स में भारत की ओर से सबमिशन मिलना चाहिए था लेकिन ऐसा हुआ नहीं. इस वजह से भारत ऑस्कर्स जैसी बड़ी प्रतियोगिता में चूक जाता है. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि अभी उन्होंने गोंधल फिल्म नहीं देखी है. उनकी बात पर अब गोंधल के डायरेक्टर संतोष डावखर का रिएक्शन भी आ गया है.
अनुराग कश्यप ने क्या कहा?
अनुराग कश्यप ने ऑस्कर्स पर बात करते हुए एक इंटरव्यू के दौरान कहा- भारतीय फिल्में ऑस्कर्स में प्रभाव छोड़ने में इसलिए पीछे रह जाती हैं क्योंकि हम गलत फिल्मों का चयन कर लेते हैं. हमारे पास अगर द लंचबॉक्स और ऑल वी इमेजिन एज लाइट जैसी फिल्मों को सलेक्ट करने का मौका होता भी है तो हम उसमें गड़बड़ी कर देते हैं. मैं इस बात को मानता हूं कि सिलेक्शन के दौरान बहुत पॉलिटिक्स होती है. साथ ही जागरुकता का आभाव भी इसमें शामिल है. इस बार ऑस्कर्स में कम्पिटिशन बहुत टफ है और इंटरनेशनल एंट्रीज को बीट करना आसान नहीं होगा. हालांकि गोंधल के बारे में अभी कुछ भी कहना बइमानी होगी क्योंकि मैंने अभी इसे और अन्य सबमिट फिल्मों को देखा नहीं है.

गोंधल के बारे में अनुराग ने क्या कहा?
अनुराग कश्यप ने ऑस्कर्स के सबमिशन प्रॉसेस पर बात करते हुए कहा- ऑस्कर्स में एलिजिबिलिटी के लिए सबसे जरूरी क्वालिफिकेशन ये होता है कि हम देश से बाहर विदेशों में अपनी फिल्मों को फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाएं. इसके अलावा फिल्म में अमेरिकन डिस्ट्रिब्यूशन भी हो. गोंधल को भी पहले दूसरे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाना चाहिए था. ये पहला स्टेप होना चाहिए था. नहीं तो स्क्रीनिंग और एडवरटाइजमेंट पर लगाया गया सारा पैसा वेस्ट माना जाता है. वहीं इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया(IFFI) भी एक अहम फिल्म फेस्टिवल है. ऐसे में अगर गोंधल उसमें सिल्वर पिकॉक जीतती तो NFDC को एक्सपोजर्स के लिए IFFI में जीतने वाली रीजनल फिल्मों को ऑस्कर्स में सबमिट करना चाहिए.
गोंधल के डायरेक्टर ने क्या रिएक्ट किया?
गोंधल के डायरेक्टर संतोष डावखर ने इसपर रिएक्ट करते हुए सोशल मीडिया पर स्टेटमेंट जारी किया. उन्होंने कहा- ”मैं अनुराग कश्यप सर और उनकी फिल्ममेकिंग की बहुत इज्जत करता हूं. 26 अप्रैल को 23:55 पर बेंगलुरु-मुंबई फ्लाइट में मैंने उन्हें अपनी फिल्म गोंधल के बारे में बताया था. उन्होंने कहा था कि ना तो उन्होंने इस फिल्म के बारे में सुना है ना देखा है लेकिन वे जरूर इसे देखेंगे. लेकिन उसके बाद से ये फिल्म पब्लिकली अविलेबल नहीं थी और मुंबई में इसकी कहीं स्क्रीनिंग भी नहीं हुई है.”
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”मेरी सभी से ये रिक्वेस्ट है कि नतीजा तय करने से पहले एक बार फिल्म देख लें. इसे फिल्म फर्टेरनिटी के बाहर के फिल्ममेकर ने बनाया है और ये उसकी डेब्यू फिल्म है. गोंधल एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर है जिसमें मराठी कल्चर को वैश्विक स्तर पर प्रख्यात करने की क्षमता है. ये फिल्म बड़े पर्दे के लिए बनाई गई है ओटीटी के लिए नहीं. हमें आभास है कि वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना कितनी बड़ी जिम्मेदारी होती है और हम देश की उम्मीदों को कम नहीं होने देंगे. कृपया री-रिलीज के दौरान इस फिल्म को देखिए और हमारा सपोर्ट करिये क्योंकि हमारी लड़ाई पूरी दुनिया की फिल्मों से है.” फिलहाल फिल्म की री-रिलीज डेट अभी अनाउंस नहीं की गई है.

पुनीत उपाध्याय
पत्रकारिता जगत में 7 साल पूरे कर चुके पुनीत उपाध्याय रायबरेली से ताल्लुक रखते हैं. वे टीवी 9 के डिजिटल विंग में साल 2022 से सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. कला, संगीत, सिनेमा, साहित्य पर लिखने का शौक रखते हैं. साथ ही इससे जुड़ी हर छोटी, बड़ी और रोचक खबरें पाठकों तक पहुंचाते हैं. इसके अलावा वे अन्य बीट्स में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. पुनीत मानते हैं कि कला सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि उससे इतर अंतरमन से जुड़ने और समाज से रूबरू होने का एक सार्थक जरिया भी है. CSJM कानपुर युनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद पुनीत ने ITMI (इंडिया टुडे मीडिया इंस्टिट्यूट) से मास कॉम्युनिकेशन में पीजी डिप्लोमा का कोर्स किया है. पुनीत की पहली जॉब आज तक में थी जहां उन्होंने 4 साल सब एडिटर की पोस्ट पर काम किया और मनोरंजन बीट के लिए अपनी सेवाएं दीं. पुनीत की रुचि लिखने में है और वे कलम की धार से समाज में बदलाव लाने में विश्वास रखते हैं. इसके अलावा उनकी रुचि आध्यात्म, साहित्य, गायन, दर्शन, क्रिकेट और मनोविज्ञान में है.
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