Published: Friday, August 14, 2026, 16:17 [IST]
उत्तर प्रदेश में 2027 और मध्य प्रदेश में 2028 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार चुनावी रणनीति में सिर्फ पारंपरिक वोट बैंक, जातीय समीकरण और बूथ मैनेजमेंट ही चर्चा में नहीं हैं, बल्कि Gen-Z यानी नई उम्र के मतदाताओं पर भी राजनीतिक दलों की नजर है।
15 अगस्त को देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। इसी बीच मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के चितरंगी से सामने आई एक घटना ने राजनीतिक कार्यक्रमों में स्कूली बच्चों की भागीदारी और उनकी सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक तिरंगा यात्रा के स्वागत के लिए आठ स्कूलों के 200 से अधिक बच्चों को करीब छह किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा। तेज धूप में लंबा इंतजार करने के बाद कई बच्चों की तबीयत बिगड़ गई और 12 छात्रों के बेहोश होने की बात सामने आई है।
यह कार्यक्रम मध्य प्रदेश सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री और चितरंगी से बीजेपी विधायक राधा रविंद्र सिंह से जुड़ा बताया जा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ यूपी के देवरिया में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया। आइए विस्तार से जानते हैं सबकुछ...
6 KM पैदल मार्च, फिर धूप में इंतजार का आरोप
मामला सिंगरौली जिले के चितरंगी का है, जहां 13 अगस्त को तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया था। स्वतंत्रता दिवस से पहले आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों के शामिल होने की बात सामने आई। स्थानीय स्तर पर लगाए गए आरोपों के मुताबिक, चितरंगी क्षेत्र के आठ स्कूलों के 200 से अधिक विद्यार्थियों को कार्यक्रम में शामिल होने और तिरंगा यात्रा के स्वागत के लिए करीब छह किलोमीटर पैदल चलना पड़ा।
आरोप है कि बच्चों को चिलचिलाती धूप में काफी देर तक रहना पड़ा। कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बाद भी उन्हें करीब एक घंटे से ज्यादा समय तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान पर्याप्त पेयजल, छाया और भोजन की व्यवस्था नहीं होने का भी दावा किया गया। इसके बाद कुछ बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। आरोपों के मुताबिक, 12 छात्र बेहोश हो गए और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। कुछ दावों में बच्चों को ऑक्सीजन सपोर्ट दिए जाने की बात भी कही गई है।
BJP मंत्री राधा सिंह पर क्यों उठ रहे सवाल?
इस मामले में राज्यमंत्री राधा रविंद्र सिंह का नाम इसलिए चर्चा में है, क्योंकि पूरा कार्यक्रम उनके विधानसभा क्षेत्र चितरंगी में हुआ और बच्चों को कथित तौर पर उनके स्वागत के लिए बुलाए जाने का आरोप लगाया गया है। सोशल मीडिया पर राधा सिंह को टैग करते हुए एक पोस्ट में दावा किया गया कि आठ स्कूलों के 200 से ज्यादा बच्चों को करीब छह किलोमीटर तक पैदल चलाया गया और फिर कार्यक्रम में लंबे समय तक इंतजार कराया गया। पोस्ट में आरोप लगाया गया कि बच्चों के लिए पर्याप्त पानी और भोजन की व्यवस्था नहीं की गई। हालांकि, किसी कार्यक्रम से किसी जनप्रतिनिधि का जुड़ाव अपने आप में यह साबित नहीं करता कि बच्चों को पैदल चलाने या उनके लिए व्यवस्था नहीं करने का फैसला उसी जनप्रतिनिधि ने लिया था।
Who Is Radha Ravindra Singh: कौन हैं राधा रविंद्र सिंह?
राधा रविंद्र सिंह मध्य प्रदेश की बीजेपी की प्रमुख महिला आदिवासी नेताओं में शामिल हैं। वह सिंगरौली जिले की अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित चितरंगी विधानसभा सीट से विधायक हैं। उन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर जीत दर्ज की। चुनाव में राधा सिंह को 1,05,410 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार मानिक सिंह को 45,531 वोट हासिल हुए। यानी उन्होंने करीब 59,879 वोटों के बड़े अंतर से चुनाव जीता।
चुनाव में बड़ी जीत के बाद उन्हें मोहन यादव सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की राज्यमंत्री बनाया गया। यह विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत व्यवस्था और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण कामों के लिए जिम्मेदार है। राधा सिंह का राजनीतिक सफर विधानसभा पहुंचने से पहले भी सक्रिय रहा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वह पूर्व मंत्री जगन्नाथ सिंह की बहू हैं और सिंगरौली के अलग जिला बनने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष की भूमिका भी निभा चुकी हैं।
आदिवासी राजनीति में अहम चेहरा
चितरंगी विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। सिंगरौली के इस इलाके में आदिवासी मतदाताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में राधा सिंह का राजनीतिक महत्व केवल विधायक या मंत्री के तौर पर ही नहीं, बल्कि बीजेपी के आदिवासी महिला नेतृत्व के चेहरे के रूप में भी देखा जाता है। 2023 में लगभग 60 हजार वोटों से मिली जीत ने क्षेत्र में उनकी राजनीतिक स्थिति मजबूत की। मंत्री बनने के बाद क्षेत्र में सरकारी और राजनीतिक कार्यक्रमों में उनकी सक्रियता भी बढ़ी है। यही वजह है कि तिरंगा यात्रा जैसे सार्वजनिक कार्यक्रमों को लेकर उठे सवालों का राजनीतिक असर भी हो सकता है। हालांकि, बच्चों के बीमार होने की घटना को सीधे चुनावी राजनीति से जोड़ने के लिए अभी पर्याप्त तथ्य सामने आना बाकी है।
Gen-Z के बहाने बच्चों की सुरक्षा का सवाल
उत्तर प्रदेश में 2027 और मध्य प्रदेश में 2028 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में युवा मतदाता राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। Gen-Z का एक बड़ा हिस्सा आने वाले चुनावों में पहली बार मतदान करेगा। राजनीतिक दलों के लिए यह वर्ग इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि युवा मतदाता सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और नए राजनीतिक मुद्दों से तेजी से जुड़ रहा है।
क्या सरकारी स्कूलों के बच्चों को भीड़ जुटाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है?
इस घटना ने सरकारी स्कूलों के बच्चों की बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भागीदारी पर भी सवाल खड़ा किया है। बच्चों को किसी कार्यक्रम में ले जाने से पहले मौसम, दूरी, परिवहन, पानी, भोजन, शौचालय, छाया और मेडिकल इमरजेंसी जैसी व्यवस्थाओं की योजना बनाना जरूरी है। अगर वास्तव में 200 से ज्यादा बच्चों को छह किलोमीटर पैदल चलना पड़ा और उसके बाद उन्हें लंबे समय तक धूप में इंतजार करना पड़ा, तो यह प्रशासनिक तैयारियों की गंभीर समीक्षा की मांग करता है। खास तौर पर तब, जब कार्यक्रम में शामिल बच्चे सरकारी स्कूलों से आते हों और उनके पास अपनी सुविधा के विकल्प सीमित हों।
सरकारी स्कूलों के बजट पर भी सवाल?
यह घटना केवल एक तिरंगा यात्रा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इससे सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठता है। स्कूलों में साफ पानी, पर्याप्त पंखे, शौचालय, बैठने की व्यवस्था और प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाएं बच्चों की मूल जरूरत हैं। अगर किसी आयोजन के लिए बच्चों को स्कूल से बाहर ले जाया जाता है तो अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम भी जरूरी हो जाते हैं। अब यह पूछा जाना चाहिए कि चितरंगी में बच्चों के लिए कितने पानी के टैंकर या पेयजल केंद्र बनाए गए थे? कितनी मेडिकल टीमें मौजूद थीं? कितनी एंबुलेंस तैयार रखी गई थीं? बच्चों के लिए छाया और आराम की व्यवस्था कहां थी? अगर बच्चे बीमार हुए तो मेडिकल टीम कितने समय में पहुंची?
मेडिकल रिस्पॉन्स टाइम भी जांच का अहम हिस्सा
बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में मेडिकल इमरजेंसी की तैयारी पहले से की जाती है। बच्चों की मौजूदगी में यह जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। अगर 12 छात्रों के बेहोश होने की पुष्टि होती है तो प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि उन्हें किस अस्पताल में भर्ती कराया गया, डॉक्टरों ने उनकी स्थिति क्या बताई और बीमारी की वास्तविक वजह क्या थी। क्या यह डिहाइड्रेशन था? क्या गर्मी और उमस की वजह से तबीयत बिगड़ी? क्या लंबे समय तक पैदल चलने और इंतजार करने का असर पड़ा? या इसके पीछे कोई अन्य चिकित्सकीय कारण था? इन सवालों का जवाब मेडिकल रिपोर्ट से ही मिल सकता है।
देवरिया में भी बीमार हुईं छात्राएं
मध्य प्रदेश के चितरंगी की घटना के बीच उत्तर प्रदेश के देवरिया से भी तिरंगा यात्रा के दौरान स्कूली छात्राओं के बीमार होने की खबर सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज परिसर से निकली यात्रा के दौरान तेज धूप और उमस के कारण 40 से अधिक छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। इस घटना को लेकर विपक्ष ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की मांग की।