Low cost AC Tain Tickets: भारतीय रेलवे ने आम और मिडिल क्लास लोगों को सस्ते में एसी का सफर कराने के लिए 'गरीब रथ एक्सप्रेस' शुरू की थी। साल 2006 में चली इस ट्रेन में कोई लग्जरी सुविधा तो नहीं है, लेकिन सफर एकदम आरामदायक होता है। कम किराया, ज्यादा सीटें और हरे-पीले रंग के डिब्बे इसकी सबसे बड़ी पहचान हैं।
Garib Rath Train History: भारतीय रेलवे हमारे देश की लाइफलाइन है। हर दिन लाखों लोग अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए ट्रेनों का सहारा लेते हैं। आम तौर पर एसी (AC) ट्रेन में सफर करने का मतलब है महंगा टिकट और ज्यादा खर्च। लेकिन, मिडिल क्लास और कम आमदनी वाले लोगों के लिए एसी का सफर आसान बनाने के लिए रेलवे ने एक शानदार ट्रेन शुरू की थी, जिसका नाम है 'गरीब रथ एक्सप्रेस'
गरीब रथ एक्सप्रेस आखिर है क्या?
गरीब रथ एक्सप्रेस पूरी तरह से वातानुकूलित (AC) सुपरफास्ट ट्रेन है। इसमें कोई फालतू का दिखावा या लग्जरी सुविधाएं नहीं हैं। इसे सिर्फ यात्रियों के सुरक्षित और आरामदायक सफर को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। आम सुपरफास्ट और प्रीमियम ट्रेनों की तरह ही इसे भी स्पीड और रूट पर पूरी अहमियत मिलती है।
कैसे हुई शुरुआत?
इस ट्रेन की शुरुआत साल 2006 में हुई थी, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। उस वक्त नॉर्मल एक्सप्रेस ट्रेनों के स्लीपर क्लास और थर्ड एसी (3-Tier) के किराये में बहुत बड़ा अंतर होता था। गर्मी, धूल और लंबे सफर की थकान से बचने के लिए आम आदमी भी एसी में सफर करना चाहता था, लेकिन महंगा टिकट एक बड़ी रुकावट था। इसी दूरी को पाटने और हर किसी को एसी की सुविधा देने के लिए यह मास्टर प्लान बनाया गया था।
नाम के पीछे की कहानी
'गरीब' का मतलब है कम आमदनी वाला वर्ग और 'रथ' का मतलब है शाही सवारी। रेलवे यह मैसेज देना चाहता था कि एसी का सफर सिर्फ अमीरों के लिए नहीं है, बल्कि आम आदमी भी इसका मजा ले सकता है। "आम आदमी की शाही सवारी" की इसी सोच के साथ इसका नाम **गरीब रथ** रखा गया।
गरीब रथ की खास बातें
1. कम किराया: नॉर्मल ट्रेनों के थर्ड एसी (3-Tier) के मुकाबले इसका टिकट 30 से 40 फीसदी तक सस्ता होता है।
2. ज्यादा सीटें: इस ट्रेन के कोच में साइड में 2 बर्थ की जगह 3 बर्थ (साइड लोअर, साइड मिडल, साइड अपर) होती हैं। इस वजह से एक डिब्बे में 72 की जगह 81 से 102 यात्री तक सफर कर सकते हैं।
3. बेडरोल का अलग चार्ज: टिकट का बेस फेयर कम रखने के लिए इसमें चादर, तकिया और कंबल का खर्च शामिल नहीं किया गया है। यात्री चाहें तो 25 से 30 रुपये का अलग चार्ज देकर इन्हें ले सकते हैं।
4. पैंट्री कार नहीं: ट्रेन का खर्च कम करने के लिए इसमें पैंट्री कार नहीं होती है। इसकी जगह ऑन-बोर्ड कैटरिंग के जरिए यात्रियों को खाना और पानी दिया जाता है।
5. अलग पहचान: इस ट्रेन के डिब्बे हरे और पीले रंग के होते हैं, जिन्हें दूर से ही आसानी से पहचाना जा सकता है।
पहला सफर और विस्तार
देश की सबसे पहली गरीब रथ एक्सप्रेस 5 अक्टूबर 2006 को बिहार के सहरसा जंक्शन और दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन के बीच चली थी। अपने पहले ही सफर से इस ट्रेन ने लोगों का दिल जीत लिया था।
प्रमुख रूट्स
आज पूरे देश में 25 से ज्यादा गरीब रथ ट्रेनें बड़े शहरों को आपस में जोड़ रही हैं:
- हजरत निजामुद्दीन ↔ बांद्रा टर्मिनस (मुंबई)
- हजरत निजामुद्दीन ↔ चेन्नई सेंट्रल
- आनंद विहार ↔ जयनगर / भागलपुर
- सिकंदराबाद ↔ विशाखापट्टनम / यशवंतपुर (बेंगलुरु)
- जबलपुर ↔ मुंबई (CSMT)
गरीब रथ एक्सप्रेस भारतीय रेलवे की एक ऐसी क्रांतिकारी योजना है, जिसने कम खर्च में एसी के सफर का सपना सच कर दिखाया।
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