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हिंदी न्यूज़ऐस्ट्रोGanesh Visarjan 2026: आज विराजे बप्पा की कल होगी विदाई, विसर्जन के लिए मिलेंगे ये 4 शुभ समय
Ganesh Visarjan 2026: डेढ़ दिन के गणपति का विसर्जन 15 सितंबर को होगा. नई दिल्ली के अनुसार जानें चार शुभ मुहूर्त और विदाई की सही विधि.
Written By : Hirdesh Kumar Singh | Updated at : 14 Sep 2026 02:50 PM (IST)

गणेश विसर्जन 2026
Source : abplive
Ganesh Visarjan 2026 Muhurat: गणेश चतुर्थी पर आज स्थापित डेढ़ दिन के गणपति का विसर्जन मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को होगा. नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार पहला शुभ समय दोपहर 12:16 बजे शुरू होगा.
15 सितंबर को डेढ़ दिन के गणपति का विसर्जन मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार नई दिल्ली के लिए 15 सितंबर को विसर्जन के लिए चार शुभ मुहूर्त बन रहे हैं.
- पहला मुहूर्त: दोपहर 12:16 से 1:49 बजे तक
- दूसरा मुहूर्त: दोपहर 3:21 से शाम 4:54 बजे तक
- तीसरा मुहूर्त: शाम 7:54 से रात 9:21 बजे तक
- चौथा मुहूर्त: रात 10:49 से 16 सितंबर तड़के 3:15 बजे तक
परिवार के साथ सुविधाजनक और दिन के उजाले में विसर्जन करना चाहते हैं तो दोपहर 12:16 से 1:49 बजे का समय सबसे उपयोगी रहेगा. यह संभव न हो तो दोपहर 3:21 से शाम 4:54 बजे के बीच बप्पा को विदाई दी जा सकती है.
यह भी पढ़ें- Ganesh Visarjan 2026: 14 सितंबर को बप्पा की स्थापना, डेढ़ दिन वाले गणपति का विसर्जन किस दिन होगा?
ये समय नई दिल्ली के अनुसार हैं. सूर्योदय और स्थानीय चौघड़िया के कारण मुंबई, पुणे, जयपुर और दूसरे शहरों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है. इसलिए स्थानीय पंचांग का समय भी देख लेना चाहिए.
चतुर्थी सुबह समाप्त, फिर दोपहर में विसर्जन क्यों?
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि 15 सितंबर को सुबह लगभग 7:44 बजे समाप्त हो जाएगी. इससे कुछ लोगों को लग सकता है कि विसर्जन भी इससे पहले कर लेना चाहिए. ऐसा जरूरी नहीं है.
डेढ़ दिन का विसर्जन तिथि की गणना से अधिक स्थापना की अवधि और पारिवारिक परंपरा से जुड़ा है. 14 सितंबर को मध्याह्न में स्थापित की गई प्रतिमा को अगले दिन मध्याह्न पूजा के बाद विदा किया जाता है. इसी कारण इसे डेढ़ दिन का गणपति कहा जाता है. इसका अर्थ घड़ी देखकर पूरे 36 घंटे पूरे करना नहीं है.
विसर्जन से पहले बप्पा की अंतिम पूजा कैसे करें?
सुबह गणपति को स्नान या जल के छींटे देकर सिंदूर, दूर्वा, फूल और भोग अर्पित करें. घर में मोदक न हों तो फल, गुड़, लड्डू अथवा घर में बना सात्विक भोजन भी चढ़ाया जा सकता है.
विसर्जन से ठीक पहले परिवार के सदस्य साथ बैठकर गणपति की आरती करें. इसके बाद बप्पा से पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें और अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करें. फिर प्रतिमा को स्थापित स्थान से थोड़ा हिलाया जाता है. इसे इस बात का संकेत माना जाता है कि स्थापना का संकल्प पूरा हुआ और अब विदाई की प्रक्रिया शुरू हो रही है.
प्रतिमा को उठाने से पहले उसके पास रखे फूल, दूर्वा और पूजा सामग्री अलग कर लें. कलश का जल घर में छिड़का जा सकता है या किसी पौधे में डाला जा सकता है.
क्या घर में ही गणपति विसर्जन कर सकते हैं?
मिट्टी की छोटी गणेश प्रतिमा का विसर्जन घर में साफ बाल्टी, टब या बड़े पात्र में किया जा सकता है. प्रतिमा पूरी तरह घुलने के बाद यह जल किसी पेड़ या पौधे की मिट्टी में डालें. इसे नाली या गंदे स्थान पर न बहाएं.
यदि प्रतिमा बड़ी है या ऐसे रंग और सामग्री से बनी है जो पानी में आसानी से नहीं घुलती, तो स्थानीय प्रशासन द्वारा बनाए गए कृत्रिम विसर्जन कुंड का प्रयोग करना बेहतर रहेगा.
बप्पा की विदाई में सबसे जरूरी केवल शुभ घड़ी नहीं, बल्कि वही सम्मान है जिसके साथ उन्हें घर लाया गया था. आरती, क्षमा-प्रार्थना और पुनरागमन की कामना के साथ कहें, गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ.
FAQ
डेढ़ दिन के गणपति का विसर्जन कब होगा?
डेढ़ दिन के लिए स्थापित गणपति का विसर्जन मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को किया जाएगा.
दिल्ली में गणपति विसर्जन का पहला शुभ समय क्या है?
नई दिल्ली के अनुसार पहला शुभ समय दोपहर 12:16 से 1:49 बजे तक रहेगा.
क्या चतुर्थी तिथि समाप्त होने से पहले विसर्जन जरूरी है?
नहीं. डेढ़ दिन के गणपति का विसर्जन अगले दिन मध्याह्न पूजा के बाद करने की परंपरा है.
क्या शाम को गणपति विसर्जन किया जा सकता है?
हां. दिल्ली के अनुसार शाम 7:54 से रात 9:21 बजे तक भी शुभ चौघड़िया उपलब्ध है.
क्या गणपति का विसर्जन घर में किया जा सकता है?
प्राकृतिक मिट्टी की छोटी प्रतिमा का विसर्जन साफ बाल्टी या बड़े पात्र में किया जा सकता है. बाद में जल किसी पौधे या स्वच्छ मिट्टी में डालें.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader
'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'
हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.
वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.
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वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.
डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.
उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.
श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.
ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.
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Published at : 14 Sep 2026 01:42 PM (IST)
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