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होटलों का लाइसेंस सीधे सस्पेंड क्यों? कड़क FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने खुद बताया इसके पीछे का कानून और मंशा| Navbharat Live

August 2, 2026

Updated On: Aug 02, 2026 | 07:15 PM IST

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सार

Food Safety Rules Maharashtra: FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने बताया कि मिलावटी व असुरक्षित भोजन परोसने वाले होटलों के लाइसेंस सीधे सस्पेंड क्यों किए जा रहे हैं और इसके पीछे क्या कानून है।

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तुकाराम मुंढे (सोर्स: एआई फोटो)

विस्तार

Tukaram Mundhe Suspends Hotel Licenses: महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। पिछले कुछ समय से उनके नेतृत्व में एफडीए ने मिलावटी और असुरक्षित भोजन परोसने वाले होटलों और रेस्टॉरेंट्स के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ रखा है।

इस दौरान कई बड़े संस्थानों के लाइसेंस सीधे सस्पेंड कर दिए गए, जिसने व्यापार जगत में हलचल पैदा कर दी है। कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि प्रशासन सीधे लाइसेंस सस्पेंड क्यों कर रहा है? उन्हें सुधार के लिए नोटिस क्यों नहीं दिया जाता? इन सवालों का जवाब खुद तुकाराम मुंढे ने विस्तार से दिया है।

सेफ फूड, सेफ महाराष्ट्र का मिशन

तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया कि उनका प्राथमिक उद्देश्य सेफ फूड, सेफ ड्रग, सेफ महाराष्ट्र है। उनके अनुसार, किसी भी होटल में 20-25 कर्मचारी काम करते हैं, लेकिन वह होटल रोजाना हजारों लोगों को खाना खिलाता है। यदि वह भोजन सुरक्षित नहीं है, तो हजारों लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होता है। मुंढे ने जोर देकर कहा कि लोगों का स्वास्थ्य मेरी प्राथमिकता है और नागरिकों को शुद्ध और सुरक्षित भोजन मिले, इसके लिए नियमों का पालन अनिवार्य है।

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क्या कहता है कानून?

सीधे लाइसेंस सस्पेंड की कार्रवाई पर स्पष्टीकरण देते हुए तुकाराम मुंढे ने बताया कि कानून के तहत FDA अधिकारियों को यह अधिकार प्राप्त हैं। यदि निरीक्षण के दौरान पाया जाता है कि अन्न खाने योग्य नहीं है या वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, तो अधिकारी के पास लाइसेंस निलंबित करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने बताया कि प्रेस नोट में अक्सर केवल सस्पेंशन की बात हाइलाइट होती है, जबकि उन गंभीर कारणों को नजरअंदाज कर दिया जाता है जिनकी वजह से यह कड़ी कार्रवाई की गई।

केवल 10% से कम पर कार्रवाई

इस धारणा को खारिज करते हुए कि वे केवल लाइसेंस सस्पेंड करते हैं, मुंढे ने पिछले दो महीनों के आंकड़े पेश किए-

  • कुल निरीक्षण (Inspections): 1400 के आसपास।
  • सुधार नोटिस (Improvement Notices): 300 से ज्यादा संस्थानों को दिए गए।
  • लाइसेंस निलंबन (License Suspension): केवल 110 संस्थानों पर।

मुंढे ने बताया कि लाइसेंस सस्पेंड करने की दर 10 प्रतिशत से भी कम है, जबकि सुधार का मौका 300 से अधिक जगहों पर दिया गया है।

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वर्धा का गोरस भंडार केस और बार-बार की गलतियां

वर्धा के प्रसिद्ध गोरस भंडार पर हुई कार्रवाई का उदाहरण देते हुए उन्होंने कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी संस्थान कानून से ऊपर या आइकॉनिक नहीं है; वह केवल एक फूड बिजनेस ऑपरेटर है। गोरस भंडार के मामले में 2020 से 2025 के बीच चार बार जांच हुई थी और हर बार बड़ी गलतियां पाई गई थीं। पांचवीं बार भी जब सुधार नहीं दिखा, तब लाइसेंस सस्पेंड किया गया। मुंढे का तर्क है कि जब चार बार चेतावनी मिलने पर भी कोई नहीं सुधरा, तो इसका मतलब है कि उन्हें सुधार की परवाह नहीं है।

तुकाराम मुंढे का यह रुख साफ करता है कि महाराष्ट्र में अब मिलावटखोरों और स्वच्छता के मानकों को ताक पर रखने वाले होटल मालिकों की खैर नहीं है। उनका स्पष्ट संदेश है कि व्यापार चलाने के लिए नियमों का पालन करना ही होगा, क्योंकि आम जनता की सेहत से समझौता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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