Fri, 31 Jul 2026 11:51 AM IST
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Fri, 31 Jul 2026 11:51 AM IST
सार
भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल संग्रह प्रणाली में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। संसद में को दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जून 2026 तक देश में सक्रिय (एक्टिव) फास्टैग उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़कर 6.23 करोड़ के पार पहुंच गई है।
भारत में हाईवे पर टोल वसूली का तरीका तेजी से बदल रहा है। जून 2026 तक देश में 6.23 करोड़ सक्रिय FASTag (फास्टैग) यूजर हो चुके हैं। इसके साथ ही सरकार ऐसे सिस्टम की दिशा में भी तेजी से काम कर रही है, जिसमें वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा और टोल अपने आप कट जाएगा।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने 30 जुलाई को लोकसभा में लिखित जवाब के जरिए फास्टैग के आंकड़ों, वार्षिक पास योजना (Annual Pass Scheme), बैरियर-मुक्त टोलिंग की प्रगति (Barrier-less Tolling) और सैटेलाइट आधारित टोल संग्रह की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत ब्योरा साझा किया।
Fastag - फोटो : Adobe Stock
देश में FASTag का दायरा कितना बढ़ चुका है?
सरकार के अनुसार, जून 2026 तक देश में 6.23 करोड़ सक्रिय फास्टैग यूजर्स हैं।
लोकसभा में पेश जानकारी से साफ है कि इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम का दायरा लगातार बढ़ रहा है और बड़ी संख्या में वाहन मालिक अब फास्टैग का इस्तेमाल कर रहे हैं।
FASTag एनुअल पास को कितना अच्छा रिस्पॉन्स मिला है?
सरकार ने 15 अगस्त 2025 को गैर-व्यावसायिक कार, जीप और वैन के लिए फास्टैग वार्षिक पास योजना शुरू किया था।
एक साल से भी कम समय में इस योजना को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।
अब तक के प्रमुख आंकड़े
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जारी किए गए एनुअल पास - 77 लाख से अधिक
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कुल टोल ट्रांजैक्शन - करीब 63 करोड़
रिपोर्ट के अनुसार, अब कार, जीप और वैन से होने वाले कुल इलेक्ट्रॉनिक टोल लेनदेन का लगभग 33 प्रतिशत हिस्सा वार्षिक पास धारकों का है।
FASTag एनुअल पास की कीमत कितनी है?
सरकार ने फास्टैग वार्षिक पास की कीमत 3,075 रुपये तय की है।
रिपोर्ट के अनुसार, इसे ऐसे लोगों के लिए अधिक सुविधाजनक और किफायती विकल्प के रूप में पेश किया गया है, जो नियमित रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करते हैं।
भारत का पहला बैरियर-फ्री (MLFF) टोल सिस्टम - फोटो : एएनआई
बिना रुके टोल वसूली (Barrier-less Tolling) कैसे होगी?
सरकार मल्टी-लेन फ्री फ्लो (Multi-Lane Free Flow-MLFF) टोलिंग तकनीक लागू कर रही है।
इस तकनीक में कई आधुनिक प्रणालियों का एक साथ इस्तेमाल होगा।
इनमें शामिल हैं-
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FASTag की RFID तकनीक
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ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
इनकी मदद से वाहन की पहचान होगी और टोल शुल्क अपने आप कट जाएगा। इसके लिए वाहन को टोल प्लाजा पर न रुकना पड़ेगा और न ही गति कम करनी होगी।
MLFF सिस्टम से क्या फायदे होंगे?
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, इस नई व्यवस्था से कई लाभ मिलने की उम्मीद है।
मुख्य फायदे -
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टोल प्लाजा पर जाम कम होगा
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ईंधन की खपत घटेगी
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सड़क सुरक्षा बेहतर होगी
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यात्रा का समय कम होगा
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Toll plaza - फोटो : Adobe Stock
देश में MLFF तकनीक कितनी आगे बढ़ चुकी है?
सरकार ने बताया कि फिलहाल-
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17 टोल प्लाजा पर MLFF लागू करने की मंजूरी दी जा चुकी है।
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इनमें से 5 टोल प्लाजा पर यह प्रणाली शुरू भी हो चुकी है।
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इसके अलावा 104 और टोल प्लाजा भविष्य में इस तकनीक के लिए चिन्हित किए गए हैं।
क्या सैटेलाइट आधारित टोल सिस्टम जल्द लागू होगा?
लोकसभा में सरकार ने स्पष्ट किया कि GNSS (ग्लोबल नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम) आधारित सैटेलाइट टोलिंग को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
यह ऐसी प्रणाली है, जिसमें वाहन द्वारा तय की गई वास्तविक दूरी के आधार पर टोल शुल्क तय किया जाएगा।
हालांकि-
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इस प्रस्ताव पर विचार कर रही विशेषज्ञ समिति ने अभी और चर्चा की सिफारिश की है।
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इसलिए फिलहाल देशभर में इसे लागू करने का कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
सरकार का तत्काल फोकस फास्टैग और ANPR आधारित MLFF सिस्टम का चरणबद्ध विस्तार करना है।
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Toll plaza - फोटो : Adobe Stock
क्या दो टोल प्लाजा के बीच 60 किलोमीटर की दूरी का नियम बदलेगा?
सरकार ने लोकसभा में यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 के तहत एक ही दिशा में स्थित दो टोल प्लाजा के बीच न्यूनतम 60 किलोमीटर की दूरी का नियम अभी भी लागू है।
हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में इस नियम में छूट दी जा सकती है।
इसके लिए-
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स्थानीय परिस्थितियों का आकलन किया जाता है।
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समीक्षा समिति की सिफारिश ली जाती है।
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सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी आवश्यक होती है।