भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने उम्र छुपाकर खेलने वाले क्रिकेटरों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है. बीसीसीआई ने बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन (CAB) के 60 से ज्यादा खिलाड़ियों को फर्जी दस्तावेज बनाने के आरोप में एक साथ सस्पेंड कर दिया है. इस बड़े फैसले से पूरे भारतीय घरेलू क्रिकेट में खलबली मच गई है. हैरान करने वाली बात यह है कि उम्र की धोखाधड़ी के इस मामले में साल 2022 का अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने वाले तेज गेंदबाज रवि कुमार और हाल ही में टीम इंडिया जूनियर में जगह बनाने वाले लेग स्पिनर रोहित यादव जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं. आइए इस आर्टिकल में जानते हैं कि यह पूरा घोटाला कैसे सामने आया और BCCI इस पर इतनी सख्त क्यों है.
कैसे सामने आया उम्र के फर्जीवाड़े का यह बड़ा खेल?
बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन ने जब नए घरेलू सीजन की तैयारी के लिए अपने सभी खिलाड़ियों के कागजातों की जांच शुरू की, तब इस बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ. इस जांच के दौरान खिलाड़ियों के स्कूल सर्टिफिकेट, जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड के डेटा का आपस में मिलान किया गया. सत्यापन के दौरान सामने आया कि कई क्रिकेटरों के सरकारी कागजातों और असली उम्र में बहुत बड़ा अंतर था. जब कैब की अंदरूनी जांच में दस्तावेजों की यह भारी गड़बड़ी साबित हो गई, तो उन्होंने बिना देर किए संदिग्ध खिलाड़ियों की पूरी लिस्ट बीसीसीआई (BCCI) को भेज दी. इसके तुरंत बाद बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाते हुए इन सभी क्रिकेटरों के खेलने पर बैन लगा दिया.
एक ही खिलाड़ी के मिले 3 बर्थ सर्टिफिकेट
उम्र के फर्जीवाड़े में सबसे बड़ा झटका बंगाल के उभरते हुए लेग स्पिनर रोहित यादव को लगा है, जिन्हें हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली घरेलू सीरीज के लिए भारतीय अंडर-19 स्क्वाड में चुना गया था. इससे पहले वे जुलाई में श्रीलंका दौरे पर भी भारतीय जूनियर टीम का हिस्सा रह चुके थे. जांच के दौरान उनके दस्तावेजों में बेहद हैरान करने वाली धोखाधड़ी पकड़ी गई, जहां उनके नाम पर 2007, 2009 और 2010 के जन्म वर्ष वाले तीन अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्र मिले. इसके साथ ही उनके आधार रिकॉर्ड और स्कूल के कागजातों में भी भारी गड़बड़ी पाई गई. इस गंभीर जालसाजी को देखते हुए BCCI ने रोहित यादव पर 2 साल का कड़ा प्रतिबंध लगा दिया है, जिसके कारण अब वे अगले दो सालों तक किसी भी घरेलू मैच या बोर्ड से जुड़े टूर्नामेंट में नहीं खेल पाएंगे.
CAB Bars 65 Cricketers Over Alleged Age Fraud 🚨
The Cricket Association of Bengal has barred 65 cricketers following allegations of age-related fraud, in a move that has sent shockwaves through Bengal’s cricketing circles. The list includes current India U19 international… pic.twitter.com/ssb3qIQapg
— Vipin Tiwari (@Vipintiwari952) September 4, 2026
अंडर-19 वर्ल्ड कप चैंपियन रवि कुमार पर भी गिरी गाज
इस प्रतिबंधित सूची में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला नाम बाएं हाथ के तेज गेंदबाज रवि कुमार का है, जो 2022 में यश ढुल की कप्तानी में अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम के मुख्य खिलाड़ी थे और जिन्होंने उस टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन किया था. क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल के आधिकारिक रिकॉर्ड्स की जांच में यह खुलासा हुआ है कि रवि कुमार के दस्तावेजों में 45 महीने (लगभग पौने चार साल) का भारी अंतर पाया गया है. भारत को वर्ल्ड चैंपियन बनाने वाले एक इतने प्रमुख खिलाड़ी का इस तरह उम्र के फर्जीवाड़े में पकड़ा जाना साफ दर्शाता है कि यह समस्या भारतीय क्रिकेट के निचले स्तर पर कितनी गहराई तक जमी हुई है. रवि कुमार के अलावा, बंगाल के लिए फर्स्ट क्लास मैच खेल चुके ऑलराउंडर विशाल भाटी को भी कागजातों में गड़बड़ी पाए जाने के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया है.
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खिलाड़ियों को क्या सजा मिली है?
क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल और बीसीसीआई ने मिलकर इन दोषी खिलाड़ियों पर बहुत सख्त एक्शन लिया है. इस फर्जीवाड़े में शामिल सभी 62 से 64 क्रिकेटरों को 2026-27 और 2027-28 के अगले दो घरेलू सीजनों के लिए पूरी तरह बैन कर दिया गया है. इस बैन के दौरान वो न तो किसी नई टीम में रजिस्ट्रेशन करा पाएंगे और न ही ट्रांसफर ले सकेंगे. इसके अलावा, ये खिलाड़ी इस 2 साल के समय में बीसीसीआई के किसी भी जूनियर टूर्नामेंट (जैसे कूच बेहार ट्रॉफी या वीनू मांकड़ ट्रॉफी) और सीनियर लेवल के घरेलू मैचों में भी हिस्सा नहीं ले पाएंगे.
BCCI का 'एंटी-एज फ्रॉड' मिशन और नए कड़े नियम
भारतीय क्रिकेट में जूनियर स्तर पर ज्यादा मौके और अनुचित लाभ पाने के लिए खिलाड़ियों द्वारा उम्र छिपाने की समस्या को खत्म करने के लिए BCCI ने नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है. बोर्ड ने अब एक प्रोफेशनल थर्ड-पार्टी वेरिफिकेशन एजेंसी को तैनात किया है, जो सिर्फ कागजातों पर भरोसा न करके सीधे स्कूलों में जाकर खिलाड़ियों के एडमिशन रिकॉर्ड और जन्म प्रमाण पत्र का भौतिक सत्यापन करती है. इसके साथ ही, भविष्य में पहचान बदलकर दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने की धोखाधड़ी को रोकने के लिए सभी खिलाड़ियों का बायोमेट्रिक डेटा (फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन) अनिवार्य किया जा रहा है. वहीं, हाल ही में आईपीएल खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी के मामले के बाद जूनियर क्रिकेटरों के लिए हड्डियों की जांच से उम्र का पता लगाने वाले TW3 बोन-एज टेस्ट को भी पहले से कहीं अधिक सख्त बना दिया गया है.
भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए क्यों जरूरी था यह कदम?
भले ही एक साथ 60 से ज्यादा खिलाड़ियों पर बैन लगने से बंगाल क्रिकेट और उन खिलाड़ियों के करियर को बड़ा झटका लगा है, लेकिन भारतीय क्रिकेट की ईमानदारी बनाए रखने के लिए यह सख्त कदम उठाना बेहद जरूरी था. जब भी कोई खिलाड़ी अपनी उम्र छिपाकर जूनियर लेवल पर खेलता है, तो वह किसी ईमानदार और असली हकदार बच्चे का मौका छीन लेता है. BCCI की इस कड़ी कार्रवाई से देश भर के युवा क्रिकेटरों और अकादमियों को साफ संदेश मिल गया है कि खेल में धोखाधड़ी या शॉर्टकट अपनाने का अंजाम सिर्फ और सिर्फ करियर को बर्बाद करना है.
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