Home Caregiver: उम्र के साथ कई माता-पिता को रोजमर्रा के कामों में मदद की जरूरत पड़ने लगती है. ऐसे में परिवार अक्सर उनके लिए एक केयरगिवर रखने का फैसला करता है.
Written By : सोनम | Updated at : 17 Jul 2026 04:12 PM (IST)

बुजुर्ग माता पिता के लिए केयरगिवर
Source : pexels
How To Choose Caregiver For Elderly Parents: बढ़ती उम्र के साथ कई माता-पिता को रोजमर्रा के कामों में मदद की जरूरत पड़ने लगती है. ऐसे में परिवार अक्सर उनके लिए एक केयरगिवर रखने का फैसला करता है. लेकिन किसी भी व्यक्ति को सिर्फ अनुभव या कम खर्च देखकर चुन लेना सही नहीं है. सही केयरगिवर का चुनाव आपके माता-पिता की सेहत, सुरक्षा और मानसिक आराम से जुड़ा होता है. इसलिए कुछ जरूरी बातों को पहले समझ लेना बेहद जरूरी है.
किस बात का ध्यान रखना सबसे जरूरी?
सबसे पहले यह तय करें कि आपके माता-पिता को किस तरह की देखभाल की जरूरत है. अगर उन्हें अल्जाइमर, डिमेंशिया या किसी दूसरी गंभीर बीमारी है, तो प्रशिक्षित केयरगिवर की जरूरत होगी. वहीं अगर उन्हें सिर्फ दवा समय पर देने, खाना खिलाने या रोजमर्रा के कामों में मदद चाहिए, तो सामान्य केयरगिवर भी पर्याप्त हो सकता है. केयरगिवर तय करने से पहले रोजाना की जरूरतों की एक सूची बना लें. जैसे नहाने, कपड़े बदलने, खाना खाने, वॉशरूम जाने, दवा लेने या रात में देखभाल की जरूरत कितनी है. इससे सही व्यक्ति का चुनाव करना आसान हो जाता है.
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सवाल पूछते समय किन बातों का रखें ध्यान?
इंटरव्यू के दौरान सिर्फ अनुभव पूछना काफी नहीं है. यह भी जानें कि उन्होंने पहले किन मरीजों की देखभाल की है, क्या वे दवाइयों का समय संभाल सकते हैं, जरूरत पड़ने पर खाना बना सकते हैं और किसी मेडिकल इमरजेंसी में सही फैसला लेने की क्षमता रखते हैं. अगर मरीज व्हीलचेयर का इस्तेमाल करता है या बिस्तर से उठाने में मदद चाहिए, तो इस बारे में भी पहले बात कर लें.
माता- पिता से मुलाकात?
फैसला लेने से पहले केयरगिवर की मुलाकात माता-पिता से जरूर कराएं. इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि दोनों एक-दूसरे के साथ सहज हैं या नहीं. कई बार व्यवहार और बातचीत का तरीका अनुभव से भी ज्यादा महत्वपूर्ण साबित होता है.ध्यान रखें कि हर केयरगिवर प्रशिक्षित नहीं होता. कई लोगों के पास बुजुर्गों की देखभाल का व्यावहारिक अनुभव या मेडिकल ट्रेनिंग नहीं होती. ऐसे में अगर मरीज को इंसुलिन देना, ब्लड शुगर की निगरानी करना, घाव की ड्रेसिंग करना या दूसरी नर्सिंग संबंधी देखभाल की जरूरत है, तो प्रशिक्षित केयरगिवर ही चुनें.
परिवार की जिम्मेदारी
एक और बात जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, वह है परिवार की जिम्मेदारी. केयरगिवर रखने का मतलब यह नहीं कि परिवार पूरी तरह जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाए. समय-समय पर निगरानी रखना, मरीज की स्थिति पर नजर रखना और केयरगिवर का सहयोग करना भी उतना ही जरूरी है.
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About the author सोनम
जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं.
लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.
ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.
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Published at : 17 Jul 2026 04:12 PM (IST)
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