Published: Tuesday, August 11, 2026, 23:53 [IST]
Chhattisgarh Liquor Scam: छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस नेता और पार्टी के पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। एजेंसी ने मंगलवार (11 अगस्त) को उन्हें रायपुर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया, जहां से अदालत ने अग्रवाल को सात दिनों के लिए ED की हिरासत में भेज दिया।
ED का आरोप है कि रामगोपाल अग्रवाल का कथित शराब घोटाले से पैदा हुई अवैध कमाई के एक हिस्से से संबंध रहा है। एजेंसी के मुताबिक, जांच के दौरान उनके खिलाफ वित्तीय लेन-देन और कथित तौर पर अपराध से हुई कमाई के इस्तेमाल से जुड़े तथ्य सामने आए हैं। हालांकि, इन आरोपों का अंतिम रूप से साबित होना अभी बाकी है।
Who Is Ramgopal Agrawal: कौन हैं रामगोपाल अग्रवाल?
रामगोपाल अग्रवाल छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। वह प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और पार्टी के भीतर उन्हें संगठनात्मक कामकाज में सक्रिय नेता के तौर पर जाना जाता रहा है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अग्रवाल ने कांग्रेस में अपनी राजनीतिक पारी 1980 के दशक में शुरू की थी। बाद में वह अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) से भी जुड़े। वर्ष 2013 में उन्हें छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। वह चुनावी राजनीति में सीधे तौर पर ज्यादा सक्रिय नहीं रहे और उन्होंने कोई विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा।
पार्टी के भीतर उनका मुख्य फोकस संगठनात्मक गतिविधियों और प्रबंधन पर रहा। अग्रवाल को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के करीबी नेताओं में भी गिना जाता रहा है। हालांकि, उनकी पहचान किसी बड़े जननेता के बजाय संगठन के स्तर पर काम करने वाले नेता के रूप में ज्यादा रही है।
शराब घोटाले में कैसे आया नाम?
छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की जांच ED लंबे समय से कर रही है। एजेंसी का आरोप है कि 2019 से 2022 के बीच राज्य में एक संगठित शराब सिंडिकेट सक्रिय था। इसके जरिए सरकारी शराब कारोबार में कथित तौर पर अवैध कमीशन और नकद लेन-देन का नेटवर्क चलाया गया। ED का दावा है कि इस कथित सिंडिकेट ने छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग पर प्रभाव स्थापित कर लिया था और सरकारी खजाने को करीब 2,883 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। एजेंसी के अनुसार, इस नेटवर्क में नौकरशाहों, कारोबारियों और राजनीतिक लोगों की भूमिका थी। रामगोपाल अग्रवाल का नाम इस मामले में उस समय प्रमुखता से सामने आया जब ED ने अपनी जांच में कथित नकद लेन-देन और कांग्रेस संगठन तक पहुंची रकम का जिक्र किया।
ED ने क्या आरोप लगाए हैं?
ED की 2025 की चार्जशीट में दावा किया गया था कि कारोबारी लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल ने एजेंसी को दिए बयान में शराब घोटाले से कथित तौर पर हासिल रकम के बारे में जानकारी दी थी। एजेंसी के मुताबिक, बंसल ने आरोप लगाया कि चैतन्य बघेल के निर्देश पर बड़ी मात्रा में नकदी रामगोपाल अग्रवाल और अन्य लोगों तक पहुंचाई जाती थी।
ED के अनुसार, कथित तौर पर रकम रायपुर स्थित कांग्रेस के राजीव भवन तक पहुंचाई जाती थी। एजेंसी ने दावा किया कि इस प्रक्रिया में अग्रवाल के तत्कालीन सहायक देवेंद्र दादसेना की भूमिका भी सामने आई। ED ने आरोप लगाया कि दादसेना कथित तौर पर अग्रवाल की ओर से नकदी प्राप्त करता था। जांच एजेंसी ने यह भी कहा है कि बंसल ने 2019 से 2021 के बीच कई बार नकदी पहुंचाए जाने की बात कही। उसके बयान के आधार पर ED ने दावा किया कि करीब 960 करोड़ रुपये की कथित नकदी का लेन-देन हुआ, जिसमें बड़ी रकम राजीव भवन तक पहुंचने का आरोप है। हालांकि, ये सभी दावे जांच एजेंसी के आरोप और बयानों पर आधारित हैं, जिनका अंतिम न्यायिक परीक्षण होना बाकी है।
72 करोड़ रुपये की रकम का क्या मामला है?
ED की जांच में 72 करोड़ रुपये का एक अलग कथित नकद लेन-देन भी सामने आया है। एजेंसी ने आरोप लगाया कि बंसल से जुड़ी रकम में से करीब 72 करोड़ रुपये के नकद लेन-देन का जिक्र जांच में हुआ। इस रकम को लेकर भी एजेंसी ने अलग-अलग लोगों और कथित हवाला नेटवर्क की भूमिका की जांच की है। मंगलवार की कार्रवाई में ED ने अदालत को बताया कि अग्रवाल का कथित तौर पर अपराध से हुई करीब 72 करोड़ रुपये की कमाई से संबंध है। एजेंसी ने यह भी कहा कि अग्रवाल को पूछताछ के लिए कई समन भेजे गए थे, लेकिन वह उसके सामने पेश नहीं हुए।
पहले EOW कर चुकी है गिरफ्तारी
ED की गिरफ्तारी से पहले रामगोपाल अग्रवाल राज्य की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की कार्रवाई का भी सामना कर चुके हैं। जुलाई 2026 में उन्होंने कथित शराब और अन्य आर्थिक अपराधों से जुड़े मामले में अदालत के समक्ष सरेंडर किया था। इसके बाद राज्य की जांच एजेंसी ने मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाई।
जुलाई में सामने आई रिपोर्टों में EOW की जांच के हवाले से आरोप लगाया गया था कि कथित अवैध रकम कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचाई जाती थी। एजेंसी ने अग्रवाल पर इस पूरे नेटवर्क में अहम भूमिका होने का आरोप लगाया था।
पहले भी ED के रडार पर रहे
रामगोपाल अग्रवाल का नाम इससे पहले भी ED की अलग-अलग जांच में सामने आ चुका है। 2023 में ED ने उनके परिसरों पर तलाशी ली थी। उस समय एजेंसी छत्तीसगढ़ के कथित कोयला लेवी मामले और शराब से जुड़े मामलों की जांच कर रही थी।
ED ने 2023 में अग्रवाल से जुड़ी करीब 68.88 करोड़ रुपये की संपत्तियों को भी अटैच किया था। इन संपत्तियों में उनकी और अन्य आरोपियों से जुड़ी संपत्तियां शामिल थीं।
किन नेताओं के नाम पहले से शामिल हैं?
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच में ED ने अब तक कई राजनीतिक नेताओं, अधिकारियों और कारोबारियों को आरोपी बनाया है। इनमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास, पूर्व संयुक्त सचिव अनिल टुटेजा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल और मुख्यमंत्री कार्यालय की पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया समेत कई नाम शामिल हैं।
चैतन्य बघेल के खिलाफ दाखिल अभियोजन शिकायत में ED ने आरोप लगाया था कि वह कथित शराब सिंडिकेट के शीर्ष स्तर पर भूमिका निभा रहे थे और करीब 1,000 करोड़ रुपये के कथित अपराध से हासिल धन से उनका संबंध था। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि इस रकम का एक हिस्सा रियल एस्टेट परियोजनाओं में लगाया गया।
(PTI इनपुट के साथ)