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तिरुपति लड्डू के घी में पाम ऑयल और केमिकल! ED का बड़ा खुलासा, फैक्ट्री मालिक की गिरफ्तारी के बाद सामने आया सच

September 19, 2026

Time Published: Saturday, September 19, 2026, 10:36 [IST]

Tirupati Laddu Ghee Adulteration Case: तिरुपति बालाजी के प्रसिद्ध लड्डू प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि कथित तौर पर गाय के शुद्ध घी के नाम पर पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल और कई केमिकल से तैयार घी तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) को सप्लाई किया गया।

इस मामले में सुकृति फूड्स के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को गिरफ्तार किया गया है। क्या है पूरा मामला और कितने करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी हुई?

Tirupati Laddu Ghee Adulteration Case

Tirupati Laddu Ghee Case: घी में क्या-क्या मिलाने का आरोप?

ईडी की जांच में सामने आए दावों के मुताबिक, तिरुपति लड्डू बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कथित मिलावटी घी को तैयार करने में कई तरह के वनस्पति तेल और रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किया गया था। एजेंसी का आरोप है कि इस मिश्रण को बाद में गाय के घी के तौर पर बेचा गया।

जांच एजेंसी ने कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए पदार्थों में रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल और पामोलीन के नाम लिए हैं। इसके अलावा एमजी-90, मोनोग्लिसराइड्स, मायवेसिट सॉफ्ट 400 और एसिटिक एसिड एस्टर जैसे रसायनों का भी जिक्र किया गया है।

ईडी के मुताबिक, इन पदार्थों से तैयार उत्पाद को "एगमार्क स्पेशल ग्रेड काउ घी" के नाम से टीटीडी को सप्लाई किया गया। यानी एजेंसी का आरोप है कि जिस उत्पाद को गाय का घी बताया गया, उसकी असल तैयारी अलग-अलग वनस्पति तेलों और केमिकल से की गई थी।

कितने करोड़ का खेल?

ईडी की जांच साल 2019 से 2024 के बीच टीटीडी को कथित तौर पर मिलावटी घी की सप्लाई से जुड़ी है। एजेंसी के मुताबिक, इस पूरे कथित फर्जीवाड़े में घी की सप्लाई का कुल मूल्य करीब 230 करोड़ रुपये था। जांच एजेंसी का दावा है कि इस रकम में से करीब 96 करोड़ रुपये का कथित मिलावटी घी कैलाश चंद मंगला ने अपनी फैक्ट्री में तैयार कराया था।

ईडी ने मंगला को इस मामले में कथित सह-साजिशकर्ताओं में से एक बताया है। एजेंसी के आरोप के मुताबिक, मंगला की भूमिका सिर्फ घी तैयार करने तक सीमित नहीं थी। उसने कथित तौर पर मिलावट में इस्तेमाल होने वाले पदार्थों की खरीद की और आगे होने वाली सप्लाई की व्यवस्था भी संभाली।

कैसे हो रहा था मिलावटी घी सप्लाई?

ईडी का आरोप है कि कैलाश चंद मंगला ने कुछ कंपनियों के जरिए कथित मिलावटी घी की सप्लाई कराई। एजेंसी ने इन कंपनियों को कथित तौर पर सामने से कारोबार करने वाली संस्थाएं यानी फ्रंट एंटिटीज बताया है। जांच में जिन कंपनियों के नाम सामने आए हैं, उनमें श्री वैष्णवी डेयरी स्पेशियलिटीज प्राइवेट लिमिटेड, मालगंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और एआर डेयरी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

ईडी का कहना है कि कथित तौर पर असली कारोबार छिपाने के लिए घी और रिफाइंड पाम ऑयल की खरीद-बिक्री से जुड़े फर्जी रिकॉर्ड भी तैयार किए गए। एजेंसी के मुताबिक, इन रिकॉर्ड्स का मकसद मिलावट वाली सामग्री के इस्तेमाल को छिपाना और पूरे कारोबार को असली गाय के घी की सप्लाई जैसा दिखाना था।

कैलाश चंद मंगला की गिरफ्तारी

ईडी के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने 17 सितंबर को कैलाश चंद मंगला को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी धन शोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत की गई। गिरफ्तारी के बाद मंगला को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्थित पीएमएलए विशेष अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

ईडी ने बताया कि इस मामले की जांच तिरुपति ईस्ट पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। एफआईआर में कथित आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और टीटीडी को मिलावटी घी की सप्लाई से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोप शामिल हैं।

पहले भी हुई थी गिरफ्तारी

इस मामले में ईडी इससे पहले भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर और निदेशक विपिन जैन को भी गिरफ्तार कर चुकी है। एजेंसी का आरोप है कि जैन कथित तौर पर मिलावटी घी तैयार कराने और उसकी सप्लाई के पूरे नेटवर्क को संचालित करने में शामिल था।

कैलाश चंद मंगला और अन्य लोगों के खिलाफ लगे आरोपों की जांच अभी जारी है। फिलहाल, ईडी के दावे जांच का हिस्सा हैं। इन आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है।