Published: Saturday, October 3, 2026, 16:12 [IST]
Delhi University Promotion Criteria: दिल्ली विश्वविद्यालय में पहले साल के बाद प्रमोशन को लेकर परेशान छात्रों के लिए बड़ा फैसला आया है। अब एक खास बैच के छात्रों का अगले वर्ष में जाने का रास्ता केवल इसलिए नहीं रुकेगा कि वे 44 में से जरूरी 28 क्रेडिट हासिल नहीं कर पाए। विश्वविद्यालय ने प्रमोशन के इस नियम में एक बार के लिए छूट देने का फैसला किया है।
राहत शैक्षणिक सत्र 2025-26 के छात्रों को मिलेगी, जिन्होंने पहले साल की पढ़ाई पूरी कर ली है। हालांकि इस फैसले ने राहत के साथ कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। शिक्षकों के एक वर्ग का कहना है कि तीसरे सेमेस्टर की पढ़ाई शुरू हुए काफी समय बीत चुका है, ऐसे में अब प्रमोशन के नियम में छूट देने की जरूरत क्यों पड़ी और इसका आधार क्या है?
44 में 28 क्रेडिट की शर्त से राहत
दिल्ली विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक की ओर से 1 अक्टूबर को जारी सूचना में प्रमोशन के नियम में इस राहत की जानकारी दी गई है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 के जिन छात्रों ने एक साल की पढ़ाई पूरी कर ली है, उन्हें प्रमोशन के लिए 44 में से कम से कम 28 क्रेडिट हासिल करने की अनिवार्यता से छूट मिलेगी। यानी इस खास बैच के लिए 28 क्रेडिट की शर्त अगले वर्ष में प्रमोशन के रास्ते में बाधा नहीं बनेगी।
ये भी पढ़ें: DU के छात्रों की बल्ले-बल्ले! किन स्टूडेंट्स की 100% फीस होगी माफ? कैसे करें अप्लाई?
केवल इसी बैच को मिलेगा फायदा
विश्वविद्यालय ने साफ किया है कि यह नियम स्थायी रूप से नहीं बदला गया है। इसे केवल 2025-26 बैच के लिए एक बार की राहत के रूप में लागू किया गया है। आने वाले बैच इस फैसले के आधार पर ऐसी छूट का दावा नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा प्रमोशन से जुड़े पुराने नोटिफिकेशन की बाकी सभी शर्तें पहले की तरह लागू रहेंगी। विश्वविद्यालय के मुताबिक सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद यह फैसला लिया गया है।
शिक्षकों ने पूछा- आखिर जरूरत क्यों पड़ी?
छात्रों को मिली इस राहत के बाद फैसले की वजह और समय को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पीटीआई के मुताबिक दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ से जुड़ी और मिरांडा हाउस की एसोसिएट प्रोफेसर आभा देव हबीब ने सवाल किया है कि 28 क्रेडिट की शर्त में छूट आखिर किस आधार पर दी गई।
उनका कहना है कि विश्वविद्यालय ने यह साफ नहीं किया कि ऐसी कौन सी परिस्थितियां या परेशानियां सामने आईं, जिनके कारण नियम में यह राहत जरूरी हो गई। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या बड़ी संख्या में छात्र पहले से तय प्रमोशन के नियम को पूरा नहीं कर पाए थे और इसी वजह से विश्वविद्यालय को यह फैसला लेना पड़ा।
चुनिंदा छात्रों को फायदा मिलने की आशंका
आभा देव हबीब ने पहले भी शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी शर्तों में बदलाव किए जाने का जिक्र करते हुए चिंता जताई कि ऐसी व्यवस्था का फायदा कहीं चुनिंदा छात्रों तक सीमित न रह जाए। उनके मुताबिक विश्वविद्यालय को इस फैसले की वजह और प्रक्रिया को ज्यादा साफ तरीके से सामने रखना चाहिए।
तीसरा सेमेस्टर शुरू होने के बाद बदलाव क्यों?
शिक्षकों का एक बड़ा सवाल फैसले की टाइमिंग को लेकर है। हबीब के मुताबिक तीसरे सेमेस्टर की कक्षाएं 28 जुलाई से ही शुरू हो चुकी थीं, जबकि परीक्षा परिणाम अगस्त तक जारी किए जा रहे थे। ऐसे में सवाल उठाया गया है कि जब छात्र अगले सेमेस्टर में पहुंच चुके थे और पढ़ाई भी शुरू हो गई थी, तब अक्टूबर में प्रमोशन के क्रेडिट नियम में राहत क्यों दी गई?
उन्होंने कहा कि किसी विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और स्थिरता बेहद जरूरी होती है और नियमों में इस तरह बदलाव से इस व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
छात्रों के लिए क्या बदला?
इस फैसले का सीधा फायदा केवल शैक्षणिक सत्र 2025-26 के संबंधित छात्रों को मिलेगा। पहले साल के बाद अगले वर्ष में प्रमोशन के लिए उन्हें 44 में से 28 क्रेडिट हासिल करने की अनिवार्य शर्त से छूट दी गई है। हालांकि प्रमोशन से जुड़े बाकी नियम नहीं बदले हैं। विश्वविद्यालय ने इसे भविष्य के सभी बैचों के लिए नई व्यवस्था भी घोषित नहीं किया है। फिलहाल शिक्षकों की मांग है कि विश्वविद्यालय यह स्पष्ट करे कि यह विशेष राहत किन कारणों से और शैक्षणिक सत्र आगे बढ़ने के बाद क्यों दी गई।
ये भी पढ़ें: NEET UG राउंड-3 का सीट अलॉटमेंट रिजल्ट जारी, जानें MBBS और BDS की कैटेगरी वाइज कटऑफ