चंडीगढ़ पुलिस के इंस्पेक्टर जसमिंदर सिंह ने 6 करोड़ रुपए की लूट के आरोपियों को फायदा पहुंचाने के मामले में डिस्चार्ज अर्जी दायर की है। उन्होंने खुद को बेकसूर बताते हुए केस से आरोपमुक्त करने की मांग की है। अदालत में अर्जी पर सुनवाई चल रही है।
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अदालत ने डीएसपी धीरज कुमार और इंस्पेक्टर बलदेव कुमार को पेश होकर अपना पक्ष रखने और जवाब देने के निर्देश दिए थे, लेकिन दोनों अधिकारी सुनवाई के दौरान अदालत में पेश नहीं हुए। दोनों अधिकारियों के पेश न होने पर चंडीगढ़ जिला अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई और उन्हें चेतावनी दी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई पर भी दोनों अधिकारी पेश नहीं हुए तो यह माना जाएगा कि उन्हें इंस्पेक्टर जसमिंदर सिंह की डिस्चार्ज अर्जी पर कुछ नहीं कहना है। ऐसी स्थिति में अदालत उनके जवाब और दलीलों का इंतजार किए बिना उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अर्जी पर फैसला सुना सकती है।
अदालत इस मामले में दोनों पुलिस अधिकारियों का पक्ष सुनना चाहती है, ताकि जसमिंदर सिंह की अर्जी पर फैसला लेने से पहले उनकी बात भी सामने आ सके। अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 नवंबर को होगी। इस दिन दोनों अधिकारियों को अदालत में पेश होकर अपना पक्ष रखना होगा।

जिला अदालत चंडीगढ़।
4 पॉइंट में पढ़ें क्या है मामला…
- इंस्पेक्टर ने खुद को बेकसूर बता अर्जी लगाई: चंडीगढ़ पुलिस के इंस्पेक्टर जसमिंदर सिंह डिस्ट्रिक्ट क्राइम सेल के इंचार्ज रह चुके हैं। उनके खिलाफ 6 करोड़ रुपए की लूट के आरोपियों को फायदा पहुंचाने के आरोप में जिला अदालत में मामला चल रहा है। जसमिंदर सिंह ने खुद को बेकसूर बताते हुए अदालत में डिस्चार्ज अर्जी दायर की है।
- आरोप तय करने के बजाय आरोपमुक्त किया जाए: जसमिंदर ने मांग की है कि उनके खिलाफ चल रहे केस में आरोप तय करने के बजाय उन्हें आरोपमुक्त किया जाए। इस अर्जी पर फैसला लेने से पहले अदालत संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष जानना चाहती है।
- सुनवाई के दौरान अदालत में पेश नहीं हुए: इसी सिलसिले में अदालत ने डीएसपी धीरज कुमार और इंस्पेक्टर बलदेव कुमार को पेश होकर अपना जवाब देने के निर्देश दिए थे। दोनों को जसमिंदर सिंह की अर्जी पर अपना पक्ष रखना था, लेकिन वे सुनवाई के दौरान अदालत में पेश नहीं हुए।
- बिना डिस्चार्ज अर्जी पर फैसला सुना सकती है: उनके जवाब नहीं आने के कारण अदालत ने अगली सुनवाई पर दोनों को फिर से पेश होने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि वे 13 नवंबर को भी पेश नहीं हुए तो अदालत उनके पक्ष का इंतजार किए बिना डिस्चार्ज अर्जी पर फैसला सुना सकती है।

DSP धीरज कुमार और इंस्पेक्टर बलदेव कुमार।
जवाब से संतुष्ट नहीं थे जज इससे पहले भी अदालत डीएसपी धीरज कुमार और इंस्पेक्टर बलदेव कुमार को इंस्पेक्टर जसमिंदर सिंह की डिस्चार्ज अर्जी पर जवाब देने के लिए पेश होने के निर्देश दे चुकी थी। करीब दो महीने पहले डीएसपी धीरज कुमार अदालत में पेश हुए थे, लेकिन उनके जवाब से जज संतुष्ट नहीं हुए।
अर्जी पर जवाब देने के लिए कहा था इसके बाद अदालत ने उन्हें दोबारा पेश होकर अपना पक्ष स्पष्ट करने और अर्जी पर जवाब देने के लिए कहा था। इसके बावजूद दोनों अधिकारी अगली सुनवाई पर पेश नहीं हुए। इस बार डीएसपी धीरज कुमार की गैरहाजिरी की वजह एक हत्याकांड की जांच में व्यस्त होना बताई गई, जबकि इंस्पेक्टर बलदेव कुमार के छुट्टी पर होने की बात सामने आई।
डिस्चार्ज अर्जी पर सुनवाई आगे बढ़ाने में देरी दोनों अधिकारियों के पेश नहीं होने से डिस्चार्ज अर्जी पर सुनवाई आगे बढ़ाने में देरी हुई। इसी को देखते हुए अदालत ने अगली तारीख पर पेश होने के निर्देश देते हुए चेतावनी दी कि इस बार भी गैरहाजिर रहने पर उनके जवाब का इंतजार नहीं किया जाएगा और अर्जी पर उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर फैसला सुनाया जा सकता है।
पेश नहीं हुए तो बिना सुने फैसला दोनों पुलिस अधिकारियों के बार-बार पेश नहीं होने पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 13 नवंबर को अगली सुनवाई पर डीएसपी धीरज कुमार और इंस्पेक्टर बलदेव कुमार को पेश होकर इंस्पेक्टर जसमिंदर सिंह की डिस्चार्ज अर्जी पर अपना पक्ष रखना होगा।
सुनवाई उनके जवाब के इंतजार में नहीं रुकेगी यदि वे इस बार भी पेश नहीं हुए तो अदालत यह मान सकती है कि उन्हें अर्जी पर कुछ नहीं कहना है। ऐसी स्थिति में कोर्ट दोनों अधिकारियों का पक्ष सुने बिना ही अर्जी पर फैसला सुना सकती है। इससे जसमिंदर सिंह की आरोपमुक्त करने की मांग पर सुनवाई उनके जवाब के इंतजार में नहीं रुकेगी।