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Devshayani Ekadashi 2026: पद्म पुराण में देवशयनी एकादशी व्रत का क्या बताया गया महत्व? जानें चातुर्मास से जुड़ी पौराणिक कथा

July 22, 2026

Devshayani Ekadashi 2026: पद्म पुराण में देवशयनी एकादशी व्रत का क्या बताया गया महत्व? जानें चातुर्मास से जुड़ी पौराणिक कथा

देवशयनी एकादशी 2026Image Credit source: Unplash

Devshayani Ekadashi 2026: हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाता है. इस साल 25 जुलाई को इसका व्रत रखा जाएगा. देवशयनी एकादशी के दिन से ही चार माह के चातुर्मास की शुरुआत मानी जाती है. देवशयनी एकादशी वो दिन होता है, जब भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और पाताल लोक में विश्राम करते हैं. यही कारण है कि चातुर्मास का समय देवताओं के शयनकाल का माना जाता है.

चातुर्मास में विवाह समेत सारे शुभ और मांगलिक काम रोक दिए जाते हैं, क्योंकि इस दौरान मांगलिक कामों का शुभ फल नहीं मिलता. देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने और चातुर्मास का प्रारंभ हेने से इस व्रत और भगवान की पूजा का महत्व कम नहीं हो जाता है. देवशयनी एकादशी के दिन भी विधि-विधान से विष्णु जी की पूजा और व्रत किया जाता है. इस व्रत का महत्व पद्म पुराण समेत कई पुराणों में बताया गया है. आइए जानते हैं. साथ ही जानते हैं चातुर्मास की कथा.

देववशयनी एकादशी का महत्व

पद्म पुराण के अनुसार, देववशयनी एकादशी के दिन व्रत और भगवान विष्णु का पूजन करने से जीवन में खुशहाली आती है और सभी पापों का नाश हो जाता है. इस दिन व्रत रखने और पूजन करने से बहुत अधिक पुण्य प्राप्त होता है. साथ ही मृत्यु के आत्मा मोक्ष को प्राप्त करती है. इस पुराण में कहा गया है कि हे जगत के नाथ आपके शयन करने पर ऐसा लगता है मानो सारा संसार सो रहा हो और आपके जागने पर ही संसार भी जागता है.

चातुर्मास की कथा

चातुर्मास की पावन कथा दैत्यराज बलि से जुड़ी हुई है. एक बार राजा बलि से सारे संसार पर अधिकार जमा लिया. तीनों लोकों में वो शासन करने लगे. इस बात से देवराज इंद्र को चिंता हुई. फिर इंद्र समेत सभी देवता रक्षा के लिए भगवान विष्णु के पास पहुंचे. तब श्री हरि ने वामन अवतार लिया और राजा बलि से दान मांगने पहुंच गए. वामन भगवान ने दान में तीन पग भूमि मांगी, लेकिन उन्होंने दो पग में ही सारा आकाश और धरती नाप ली. तब राजा बलि ने उनको तीसरा चरण अपने सिर पर रखने के लिए कहा.

इस तरह से वामन भगवान ने राजा बलि से तीनों लोकों को मुक्त कराया और अपने असली स्वरूप में आ गए. भगवान विष्णु राजा बलि की दानविरता से बहुत प्रसन्न हुए और उनसे वरदान मांगने को कहा. बलि ने भगवान को पाताल लोक में अपने साथ चलने और निवास करने के लिए कहा. भगवान विष्णु ने अपने भक्त बलि की इच्छा पूरी की और पाताल चले गए. इधर भगवान के वैकुंठ में न होने से माता लक्ष्मी चिंता में पड़ गईं.देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को पाताल लोक से मुक्त कराने की एक योजना सोची.

वो एक गरीब स्त्री बनकर राजा बलि के पास गईं. मां ने राजा बलि को अपना भाई मानते हुए राखी बांधी और बदले में भगवान विष्णु को पाताल से मुक्त करने का वचन मांगा. राजा बलि ने वचन दे दिया, लेकिन भगवान अपने भक्त को निराश नहीं करना चाहते थे, इसलिए बलि को वरदान दिया कि वह साल चार महीने आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से पाताल लोक में विश्राम करेंगे और कार्तिक शुक्ल की एकादशी के दिन वैकुंठ लौटेंगे. यही कारण है कि भगवान चार माह योगनिद्रा में रहते हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण कुमार

वरुण कुमार

वरुण कुमार पिछले पांच वर्षों से पत्रकारिता जगत का हिस्सा हैं. साल 2021 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद प्रभासाक्षी न्यूज वेबसाइट से पत्रकारिता की शुरुआत की और फिर एबीपी न्यूज का हिस्सा बने. अब TV9 डिजिटल की धर्म टीम के साथ काम कर रहे हैं.

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