Published: Monday, September 14, 2026, 13:39 [IST]
अफगानिस्तान की टीम भारत को होस्ट कर रही है और दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए पहले टी20 मुकाबले में भारत ने जीत दर्ज की। मैदान पर भारतीय टीम के प्रदर्शन की चर्चा रही लेकिन मैच के बाद सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो ने स्टेडियम की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। मैच देखने पहुंचे कुछ दर्शकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए इसे गली-मोहल्ले जैसा मुकाबला तक बता दिया।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और दर्शकों की शिकायतों में सबसे बड़ा मुद्दा सीटों की व्यवस्था का रहा। आरोप है कि टिकट बेचने के बावजूद कई लोगों को बैठने के लिए सीट नहीं मिली। कुछ वीडियो में दर्शक गैलरी और सीढ़ियों पर खड़े होकर मैच देखते नजर आए। दिल्ली का मौसम पहले से उमस भरा था और भीड़ के बीच लंबे समय तक खड़े रहने से लोगों को परेशानी और घुटन महसूस होने की शिकायत भी सामने आई।
टिकट के बावजूद खड़े रहे दर्शक
यहां सवाल सिर्फ दर्शकों की असुविधा का नहीं है। जब मुकाबला दो अंतरराष्ट्रीय टीमों के बीच हो रहा हो और स्टेडियम में आने वाले लोगों ने टिकट के लिए पैसे दिए हों, तो उनके लिए बुनियादी व्यवस्था होना जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय मैच का नाम होने के बावजूद अगर दर्शकों को बैठने की जगह के लिए परेशान होना पड़े, तो आयोजन की तैयारियों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
कुछ वायरल वीडियो ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ाई है। इनमें कथित तौर पर कुछ दर्शक एक स्टैंड से दूसरे स्टैंड की तरफ जाते और कूदकर दूसरे हिस्से में पहुंचते दिखे। अगर दर्शक इस तरह आसानी से अलग-अलग स्टैंड तक पहुंच रहे थे, तो यह सिर्फ भीड़ प्रबंधन का मामला नहीं रह जाता। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था और स्टेडियम के अंदर निगरानी को लेकर भी सवाल उठते हैं।
डीडीसीए की थी जिम्मेदारी
इस सीरीज में आधिकारिक मेजबान अफगानिस्तान है लेकिन दिल्ली में मैच की स्थानीय व्यवस्थाएं डीडीसीए के जिम्मे हैं। इसलिए दर्शकों की सीट, स्टैंड के अंदर भीड़ और सुरक्षा से जुड़े सवाल सीधे तौर पर स्थानीय आयोजन व्यवस्था से जुड़ते हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में सिर्फ खिलाड़ियों और पिच की व्यवस्था ही काफी नहीं होती, बल्कि दर्शकों का अनुभव और उनकी सुरक्षा भी आयोजन का अहम हिस्सा होते हैं।
मीडिया अक्रेडिएशन में भी धांधली?
विवाद सिर्फ स्टेडियम में बैठे दर्शकों तक सीमित नहीं है। मीडिया अक्रेडिएशन को लेकर भी कई पत्रकारों ने सवाल उठाए हैं। कुछ पत्रकारों का कहना है कि उनके अक्रेडिएशन आवेदन पहले मंजूर हो चुके थे और उन्हें अप्रूवल से जुड़े ईमेल या मैसेज भी मिले थे। बाद में उनके कार्ड रद्द कर दिए गए। इसके बाद अक्रेडिएशन एप्लीकेशन लिंक दोबारा खोले जाने को लेकर भी सवाल उठे हैं।
बताया जा रहा है कि दोबारा प्रक्रिया शुरू होने के बाद अपने खास लोगों के कार्ड बनाए गए, जबकि जिन लोगों के आवेदन अप्रूव किए गए थे, उनको रद्द कर दिया गया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर उठता है।