world-news

योगी-अखिलेश की चुनावी पिच में बड़ा फर्क, Coffee Par Kurukshetra में देखें पूरी चर्चा - India TV Hindi

August 19, 2026

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की राजनीति में अगले चुनाव को लेकर योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव की चुनावी पिच अलग-अलग नजर आ रही है। अखिलेश यादव की ओर से बीजेपी के सहयोगी दलों को लेकर किए गए पोस्ट और योगी आदित्यनाथ की ओर से कानून व्यवस्था, विकास और निवेश पर जोर चर्चा के केंद्र में है। इस मुद्दे पर इंडिया टीवी के लोकप्रिय शो Coffee Par Kurukshetra में चर्चा हुई। इस चर्चा में शो के एंकर और इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा, पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पाराशर के साथ-साथ गेस्ट के रूप में प्रदीप सिंह और अनंत विजय मौजूद रहे।

अखिलेश यादव ने एक पोस्ट में दावा किया कि पीडीए के दबाव और सहयोगी दलों को इधर-उधर छिटकने से बचाने के लिए बीजेपी आरएलडी को 73, सुभासपा को 39, निषाद पार्टी को 31 और अपना दल को 19 सीटें देने जा रही है। इसे बीजेपी का संभावित सीट शेयरिंग फॉर्मूला बताया गया।

जातीय समीकरण पर अखिलेश का फोकस

बातचीत में अखिलेश यादव की रणनीति को जातीय समीकरण और पीडीए के इर्द-गिर्द केंद्रित बताया गया। पीडीए के जरिए पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग को जोड़ने की कोशिश की बात सामने आई। सहयोगी दलों की सीटों को लेकर अलग-अलग दावों को भी इसी चुनावी गणित का हिस्सा माना गया।

योगी की पिच में कानून व्यवस्था सबसे बड़ा मुद्दा

इसके मुकाबले योगी आदित्यनाथ की चुनावी पिच में कानून व्यवस्था, माफिया और गुंडाराज जैसे मुद्दे प्रमुख बताए गए। चर्चा में कहा गया कि कानून व्यवस्था ऐसा मुद्दा है जिसका सीधा असर लोगों के रोजमर्रा के जीवन और सुरक्षा की भावना पर पड़ता है। खासतौर पर रात में आने-जाने और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुराने और मौजूदा हालात की तुलना की गई।

माफिया और गुंडाराज पर भी सियासी वार

अखिलेश यादव के कार्यकाल को लेकर चर्चा में माफिया और गुंडाराज का मुद्दा भी उठाया गया। बातचीत में कहा गया कि 2012 में अखिलेश यादव से उम्मीद थी कि समाजवादी पार्टी के राजनीतिक कल्चर में बदलाव आएगा, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद माफिया के प्रभाव में अपेक्षित कमी नहीं आई।

विकास और निवेश को भी चुनावी हथियार बनाने की तैयारी

योगी सरकार की पिच में कानून व्यवस्था के साथ विकास और निवेश का मुद्दा भी सामने आया। बातचीत में एक्सप्रेसवे, हाईवे, एयरपोर्ट, एमएसएमई, स्टार्टअप और डिफेंस कॉरिडोर का जिक्र किया गया। साथ ही उत्तर प्रदेश में एमएसएमई यूनिट्स, बड़ी इंडस्ट्री और स्टार्टअप्स के आंकड़ों तथा नौकरियों का भी उल्लेख किया गया।

दोनों नेताओं के मुद्दे अलग, मुकाबला सियासी नैरेटिव का

कुल मिलाकर बातचीत में उत्तर प्रदेश के चुनावी मुकाबले की दो अलग तस्वीरें सामने आईं। एक तरफ अखिलेश यादव जातीय समीकरण, पीडीए और सहयोगी दलों के जरिए चुनावी नैरेटिव बनाने की कोशिश करते नजर आते हैं, जबकि दूसरी तरफ योगी आदित्यनाथ के लिए कानून व्यवस्था, विकास और सुरक्षा जैसे मुद्दे अहम बताए गए हैं। चुनावी मुकाबले में जातीय समीकरण के साथ सुरक्षा और विकास का मुद्दा कितना असर डालता है, यह आगे की राजनीति में अहम रहने वाला है।

डिटेल में पूरी चर्चा देखने के लिए सबसे ऊपर दिये गये वीडियो पर क्लिक करें।

(डिस्क्लेमरः यह आर्टिकल कार्यक्रम में हुई चर्चा पर आधारित है और कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचार मेहमानों के निजी विचार हैं।)

ये भी पढ़ें-

क्या दिल्ली के प्रदर्शन से हेमंत सोरेन ने कुछ नहीं सीखा, क्या है उनकी योजना? Coffee Par Kurukshetra में देखें पूरी चर्चा

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Politics से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत।