हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से कई जिलों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई। इससे गुस्साए लोग सड़कों पर उतर आए और उद्योगों से लेकर घरों में पानी की सप्लाई तक प्रभावित हुई। बढ़ते विरोध के बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शुक्रवार शाम को फरीदाबाद से
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सरकार ने बिजली अधिनियम की धारा 108 के तहत हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) से फैसले की समीक्षा कराने और निजी कंपनी के लाइसेंस के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का आश्वासन दिया। इसके बाद कर्मचारियों ने 45 घंटे बाद अपनी हड़ताल खत्म कर दी।
इस पूरे घटनाक्रम में 5 फैक्टर ऐसे रहे, जिन्होंने सरकार के सामने बिजली संकट से निपटने और कर्मचारियों की मांगों पर समाधान निकालने की चुनौती बढ़ाई।

अब सिलसिलेवार पांचों फैक्टर्स जानिए….
1. 15 से ज्यादा जिलों में बिजली संकट, जींद में 46 घंटे कटौती
21 अक्टूबर की रात 10 बजे बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल शुरू हुई। इस दौरान 15 जिलों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। फॉल्ट ठीक करने के लिए कर्मचारी उपलब्ध नहीं होने से कई जगह सप्लाई बहाल करने में देरी हुई। जींद शहर में 46 घंटे तक बिजली नहीं आई। ऐसे में सरकार और प्रशासन के सामने वैकल्पिक व्यवस्था से सप्लाई बनाए रखने की चुनौती थी।
2. गुरुग्राम में 24 घंटे तक बिजली गुल, मंत्री के घर बाहर जाम
गुरुग्राम के अशोक विहार, पालम विहार समेत कुछ इलाकों में करीब 24 घंटे तक बिजली गुल रही। गुरुग्राम में बिजली नहीं होने से घरों में पानी की किल्लत हो गई और लोगों को पैकेज्ड पानी खरीदना पड़ा। शुक्रवार को हिसार के कैमरी रोड पर लोगों ने कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा के घर के बाहर जाम लगा दिया।

हिसार के कैमरी रोड पर शुक्रवार देर शाम लोगों ने मंत्री रणबीर गंगवा के घर के बाहर जाम लगा दिया था।
3. पानी से लेकर इंटरनेट तक पर असर
बिजली कटौती से कई इलाकों में पानी की मोटरें नहीं चल सकीं। इनवर्टर की बैटरी खत्म होने और इंटरनेट कनेक्टिविटी बाधित होने की शिकायतें भी आईं। अस्पतालों, पानी की व्यवस्था और अन्य जरूरी सेवाओं को चालू रखना प्रशासन के लिए चुनौती बना। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक सेवाओं पर विशेष ध्यान देने और बिजली आपूर्ति बनाए रखने के निर्देश दिए।
4. फैक्ट्रियों का काम रुका, इलेक्ट्रिक बसें बंद
गुरुग्राम, करनाल, पानीपत और अंबाला की करीब 1,800 से अधिक फैक्ट्रियों का काम रुकने की बातें सामने आईं। रेवाड़ी बस अड्डे पर बिजली नहीं होने से इलेक्ट्रिक बसों का संचालन बंद करना पड़ा। मिठाई और रोजमर्रा का सामान बेचने वाले दुकानदार भी प्रभावित हुए। इनवर्टर बंद होने से कुछ दुकानदारों को शाम होते ही दुकानें बंद करनी पड़ीं।

रेवाड़ी में शुक्रवार को इलेक्ट्रिक बसों का संचालन बंद रहा। रोडवेज जनरल मैनेजर निरंजन शर्मा ने कहा कि बस स्टैंड पर बिजली नहीं होने के कारण बसों का संचालन नहीं हो पाया।
5. बिजली संकट पर सड़कों पर उतरे लोग, सरकार पर बढ़ा दबाव
बिजली आपूर्ति बाधित रहने से लोगों की नाराजगी बढ़ी। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में लोगों ने जाम लगाकर बिजली बहाल करने की मांग की। ऐसे में संकट केवल कर्मचारियों की हड़ताल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम लोगों के विरोध का मुद्दा भी बन गया। लगातार प्रदर्शन से सरकार पर जल्द समाधान निकालने का दबाव बढ़ा।

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