Published: Saturday, September 12, 2026, 11:58 [IST]
उत्तराखंड की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने पार्टी के अपने सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। हरीश रावत के एक फैसले ने नया सियासी सवाल खड़ा कर दिया है। रावत ने कांग्रेस में अपने दोनों अहम पदों से इस्तीफा दे दिया है।
यह फैसला उनके पुराने सहयोगी और पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर ED की छापेमारी के अगले दिन आया। हरीश रावत ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस्तीफे की जानकारी दी और बताया कि उन्होंने यह कदम आखिर क्यों उठाया।
ED ने साल 2016 में हुए ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में देहरादून में कई जगह छापे मारे थे। इस कार्रवाई की जद में हरीश रावत के करीबी चंदन सिंह जीना का ठिकाना भी आया। ED दावा है कि छापेमारी के दौरान जीना के घर से 32 लाख रुपये की बिना हिसाब वाली नकदी, करीब 200.5 ग्राम सोना और 12 महंगी रोलेक्स जैसी घड़ियां बरामद हुई हैं। इसके अलावा एजेंसी ने उनके और परिजनों के बैंक खातों में जमा 52.16 लाख रुपये की रकम भी फ्रीज कर दी है।
हरीश रावत ने अचानक इस्तीफा क्यों दिया?
हरीश रावत ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य पद से इस्तीफा दिया है। उनका कहना है कि कांग्रेस इस समय भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है। ऐसे में उनके किसी सहयोगी पर हुई कार्रवाई की वजह से पार्टी के अभियान पर सवाल उठें, यह वह नहीं चाहते।
रावत ने अपने पोस्ट में लिखा,
"अगर मेरे किसी कृत्य या मेरे किसी सहयोगी से जुड़े मामले की वजह से कांग्रेस के भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष को कमजोर करने की कोशिश होती है, तो मैं उसका हिस्सा नहीं बनना चाहता। इसी वजह से मैंने दोनों पदों से हटने का फैसला किया है।"
रावत ने सोशल मीडिया पर लिखा,
"चंदन सिंह जीना एक बेहद शालीन और मेहनती व्यक्ति हैं। अगर भर्ती परीक्षा में ओएमआर शीट के साथ कोई धांधली हुई है और इसके सबूत मिलते हैं, तो मुझे इस हरकत पर बेहद शर्मिंदगी होगी।"
हालांकि उन्होंने टीवी पर दिखाए जा रहे दावों पर अविश्वास जताया और कहा कि पूरा सच निष्पक्ष जांच के बाद ही बाहर आएगा।
चुनाव से पहले 'नैरेटिव' बनाने का आरोप
उत्तराखंड के आगामी चुनावों का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने राजनीतिक साजिश का अंदेशा जताया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, "जब लोग मुझसे पूछते थे कि राज्य में चुनाव कब होंगे, तो मैं मजाक में कहता था कि जब सीबीआई मेरे दरवाजे पर आ जाएगी।
लेकिन इस बार मेरे घर के बजाय मेरे साथी के घर पर दस्तक देकर एक नया राजनीतिक माहौल और नैरेटिव बनाने की कोशिश की गई है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पार्टी के संघर्ष को कमजोर नहीं पड़ने देना चाहते, इसीलिए वे खुद पदों से अलग हो रहे हैं।
2016 भर्ती घोटाला और ओएमआर शीट से छेड़छाड़
यह पूरा मामला 2016 की भर्ती परीक्षा में हुई व्यापक गड़बड़ी से जुड़ा है। ईडी ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) के तत्कालीन चेयरमैन, सचिव, परीक्षा नियंत्रक और ओएमआर शीट प्रोसेस करने वाली प्राइवेट कंपनी के मालिक के परिसरों पर भी तलाशी ली। जांच एजेंसी के मुताबिक, ओएमआर शीट की गुप्त जानकारियां निजी हाथों तक पहुंचाई गईं और उत्तरों में फेरबदल किया गया। जांच टीम अब कैश लेनदेन, जब्त मोबाइल फोन की फोरेंसिक रिपोर्ट और पैसों के मुख्य सोर्स को खंगाल रही है।
गलती साबित हुई तो सजा भुगतने को तैयार
अपने कार्यकाल को याद करते हुए रावत ने बताया कि उस तीन साल की अवधि में करीब 42 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई थीं। उन्होंने कहा,
"अगर भर्ती प्रक्रिया में अनजाने में भी कोई मानवीय भूल हुई है, तो मैं राज्य की जनता से हाथ जोड़कर क्षमा मांगता हूं।"
तत्कालीन आयोग अध्यक्ष की नियुक्ति पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी की सलाह और मेरिट के आधार पर ही यह फैसला लिया गया था, लेकिन शिकायत मिलते ही उस अधिकारी को हटा भी दिया गया था। उन्होंने खुला चैलेंज दिया कि यदि किसी के पास गड़बड़ी में उनकी सीधी भूमिका का कोई भी प्रमाण है, तो वह पुलिस या ईडी को सौंपे। दोष साबित होने पर वे कानून की हर सजा भुगतने के लिए तैयार हैं।