अभिषेक जैन | मैनपुरी40 मिनट पहले
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मैनपुरी में 540 साल पुराने ऐतिहासिक श्री शीतला माता मंदिर में रविवार को कुछ ऐसा नजारा देखने को मिला, जो पहले कभी नहीं देखा गया। जिस मंदिर के प्रांगण में श्रद्धालु आस्था लेकर पहुंचते हैं, उसी परिसर की गंदगी और अव्यवस्थाओं से परेशान होकर महिलाओं ने खुद हाथों में झाड़ू थाम ली। ‘सफाई की देवी श्री शीतला माता संगठन’ के बैनर तले महिलाओं और पुरुषों ने मंदिर परिसर में श्रमदान कर सफाई अभियान चलाया। सावन के महीने में हरे रंग के वस्त्र पहनकर पहुंची महिलाओं ने सफाई के साथ जन-जागरण भी किया।
संगठन की डॉ. नूपुर सिन्हा ने बताया कि मंदिर की साफ-सफाई और व्यवस्थाओं में सुधार की मांग को लेकर अभियान की शुरुआत इसी वर्ष 7 मार्च से की गई थी। पिछले छह महीनों में जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायतें दर्ज कराने के साथ अधिकारियों को लिखित रूप से अवगत कराया गया। मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजा गया। इसके अलावा नगर पालिका से भी सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की गई, लेकिन उनका आरोप है कि तमाम प्रयासों के बावजूद मंदिर की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

मंदिर परिसर में गंदगी देख महिलाओं ने झाड़ू लगानी शुरू कर दी।
डॉ. नूपुर के मुताबिक जब शिकायतों और पत्राचार के बाद भी व्यवस्थाएं नहीं सुधरीं तो संगठन की महिलाओं ने खुद मोर्चा संभालने का फैसला लिया। इसी के तहत मंदिर परिसर में पहुंचकर श्रमदान किया गया। उन्होंने कहा कि सावन के महीने में महिलाएं हरे परिधानों में सफाई अभियान चला रही हैं और इसे ‘सावन स्पेशल’ तरीके से जन-जागरण का रूप दिया गया है।
अभियान के दौरान मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल भी उठाए गए। डॉ. नूपुर ने मंदिर परिसर में बने कुंड की स्थिति पर चिंता जताई। उनका कहना है कि मान्यता है कि कुंड का जल रोगों से मुक्ति दिलाता है, लेकिन वर्तमान में कुंड की हालत बेहद खराब है। उनके मुताबिक कुंड के पानी में कीड़े तक पड़े हैं और सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। उन्होंने मंदिर की बिजली व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। आरोप है कि बिजली जाने के बाद पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण मंदिर परिसर में अंधेरा छा जाता है। ऐसे में श्रद्धालुओं को परेशानी होती है।

पुरूषों ने भी साफ-सफाई में सहयोग किया।
डॉ. नूपुर ने मंदिर के पुजारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि जब संगठन के लोग सफाई अभियान चला रहे थे, तब पुजारियों की ओर से सहयोग नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग सफाई कर रहे सदस्यों को देखकर हंस रहे थे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संगठन ने मंदिर में आने वाले चढ़ावे को लेकर भी सवाल उठाए हैं। डॉ. नूपुर का आरोप है कि मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ावा आता है, लेकिन इसके बावजूद सफाई और मूलभूत व्यवस्थाओं की हालत खराब है। उन्होंने चढ़ावे और उसके उपयोग में पारदर्शिता की मांग की है। सफाई अभियान के जरिए संगठन ने प्रशासन से मंदिर परिसर की नियमित सफाई, बिजली व्यवस्था दुरुस्त कराने, कुंड की साफ-सफाई और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यह अभियान किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि ऐतिहासिक मंदिर की गरिमा और स्वच्छता बहाल कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
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