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CJP Protest: इन राजनीतिक दलों के इशारे पर जंतर-मंतर पर हुई हिंसा, दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR

August 1, 2026

जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है. पुलिस की जांच में सामने आया है कि ये आंदोलन और संसद मार्च में हुई हिंसा छात्रों का आक्रोश नहीं बल्कि राजनीतिक दलों के इशारों पर भीड़ में शामिल असामाजिक तत्वों की साजिश का नतीजा थी. इस मामले में संसद मार्ग पुलिस थाने में एक FIR दर्ज करवाई है, जिसमें तीन राजनीतिक दलों का नाम शामिल है. पुलिस के विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और भीम आर्मी के लोगों द्वारा हिंसा भड़काए जाने का जिक्र है. 

सूत्रों का कहना है कि पुलिस जल्द ही इन पार्टियों के नेताओं को नोटिस भेजकर पूछताछ कर सकती है. मामले की निष्पक्षता और साइंटिफिक जांच के लिए स्पेशल सेल को केस ट्रांसफर कर दिया है. इससे पहले शुरुआती जांच मार्ग थाने में इंस्पेक्टर दिनेश कुमार इसकी जांच कर रहा है.

#WATCH | Delhi | Protesters gathered for CJP's protest march clash with RPF personnel at Jantar Mantar; RPF personnel & police use lathis for crowd control pic.twitter.com/gijaCjJksW

— ANI (@ANI) July 20, 2026

क्या राजनीतिक साजिश के तहत हुई थी हिंसा?

आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़ी एक एफआईआर संसद मार्ग थाने में इंस्पेक्टर इंद्रजीत की शिकायत पर दर्ज की गई है. सूत्रों के अनुसार, FIR में कहा गया है कि संसद मार्च के दौरान, सुनियोजित तरीके से साजिश के तहत हिंसा को अंजाम दिया गया है. बता दें, संसद मार्ग थाने में हिंसा से जुड़े कुल 21 केस दर्ज किए गए हैं लेकिन राजनीतिक दलों के इशारों पर हिंसा होने वाली बात सिर्फ इस एफआईआर में हुई है. इस एफआईआर में हिंसा कैसे हुई, इस बारे में विस्तार से बताया गया है. इस एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता, आर्म्स एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की 15 गंभीर धाराएं लगाई गईं हैं.

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सीसीटीवी फुटेज में क्या मिला?

पुलिस सीसीटीवी फुटेज से हिंसा से जुड़े उपद्रवियों की पहचान में जुटी हुई है. इसी कड़ी में तीनों राजनीतिक दलों का प्रमुखता से जिक्र किया गया है. इसमें कहा गया है कि 16 मई को सीजेपी के गठन से लेकर 20 जुलाई की सुबह तक आप नेताओं ने भीड़ को संबोधित किया है. उनके उकसावे में आकर भीड़ आक्रामक हो गई. भीड़ ने सुरक्षा इंतजामों को तोड़ते हुए पुलिस पर हमला किया. सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान भी पहुंचाया.  

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डिजिटल साक्ष्यों और सोशल मीडिया से क्या मिला?

पुलिस का दावा है कि अब तक उपलब्ध दस्तावेजों, डिजिटल प्रूफों, सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया की सामाग्री से साफ हो गया कि इसके पीछे बड़ी आपराधिक और संगठित, साजिश की योजना थी. इसके लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई गई. इसके लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई गई थी.

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इन धाराओं में दर्ज हुआ केस

FIR में बीएनएस की धारा 109 (हत्या का प्रयास), 191(2,3) (दंगा और घातक हथियारों से लैस होना), 61 (आपराधिक साजिश), 121 (सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने के लिए गंभीर चोट पहुंचाना), 181 (गैरकानूनी सभा), आर्म्स एक्ट की धारा 25(1एबी) (बलपूर्वक पुलिस का हथियार छीनना) और दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 3 सहित कई अन्य धाराएं जोड़ी गई हैं.

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