Published: Wednesday, September 9, 2026, 11:59 [IST]
Akshat Tripathi CJP Notice: CJP के विरोध प्रदर्शन में शामिल होना गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी को भारी पड़ गया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल होने के बाद अब ग्रेटर नोएडा के कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने उसे 5 लाख रुपये का नोटिस जारी किया है। यह नोटिस शांति भंग की आशंका से जुड़े मामले में BNSS की धारा 130 के तहत जारी किया गया है।
अक्षत SFI की उत्तर प्रदेश स्टेट कमेटी के सदस्य हैं। हालांकि, छात्र ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए प्रदर्शन में शांतिपूर्ण तरीके से शामिल होने का दावा किया है।
4 सितंबर को जारी हुआ नोटिस
ग्रेटर नोएडा के कार्यपालक मजिस्ट्रेट-3 की ओर से अक्षत त्रिपाठी को 4 सितंबर को BNSS की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया गया। यह कार्रवाई ईकोटेक-1 थाने के एक सब-इंस्पेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर की गई है। नोटिस में शांति भंग की आशंका को लेकर छात्र से जवाब मांगा गया है। इसी मामले में अक्षत पर 5 लाख रुपये की राशि का नोटिस जारी किया गया है।
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छात्रों को सरकार के खिलाफ भड़काने का आरोप
नोटिस में आरोप लगाया गया है कि जंतर-मंतर पर CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान अक्षत त्रिपाठी ने छात्रों को सरकार के खिलाफ भड़काने और उन्हें एकजुट करने का प्रयास किया। हालांकि, अक्षत ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने प्रदर्शन में शांतिपूर्ण तरीके से हिस्सा लिया था और किसी भी तरह की हिंसा या अशांति फैलाने की कोशिश नहीं की।
प्रदर्शन के दौरान घायल होने का दावा
अक्षत त्रिपाठी का कहना है कि प्रदर्शन के समय गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी करीब तीन महीने से बंद थी, इसलिए वह नियमित रूप से क्लास में शामिल नहीं हो रहे थे। उन्होंने दावा किया कि 20 जुलाई को CJP के संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में वह घायल भी हुए थे। अक्षत के मुताबिक, वह सिर्फ अपनी मांगों और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन में शामिल हुए थे।
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SFI ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने अक्षत को जारी नोटिस की कड़ी आलोचना की है। संगठन ने इसे छात्रों को डराने और विरोध की आवाज दबाने की कोशिश बताया है। SFI के मुताबिक, जंतर-मंतर के प्रदर्शन में पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे उठाए गए थे। संगठन ने उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस पर कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
नोटिस वापस लेने की मांग
SFI ने दावा किया है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद अक्षत त्रिपाठी के खिलाफ कार्रवाई की गई। संगठन ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर हमले भी किए गए और आंदोलन को बाधित करने की कोशिश हुई। SFI ने उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस से अक्षत को जारी नोटिस तत्काल वापस लेने की मांग की है। साथ ही पूरे मामले पर सवाल उठाए हैं।