Published: Saturday, July 11, 2026, 16:51 [IST]
China Dam Crisis: चीन आए दिन नई-नई खोजें और विकास के नाम पर नए-नए कीर्तिमान बनाता रहता है। इन्हीं कीर्तिमानों को बनाने के चक्कर में कई बार ऐसी गलतियां कर बैठता है जिसका खतरा पूरी दुनिया पर मंडराने लगता है। ऐसा ही एक और बार होने का डर फिर से पैदा हो गया है। जिसका खुलासा खुद चीनी वैज्ञानिकों ने किया।
कैसे खुली पोल?
चीनी वैज्ञानिकों नई रिपोर्ट ने ब्रह्मपुत्र नदी जिसे वह यारलुंग सांगपो नदी पर बन रहे मेगा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' के हाथ लगे इस वैज्ञानिक दस्तावेज के मुताबिक, जिस जगह पर इस बांध का जलाशय बनना है, उसके ठीक नीचे पाइझेन फॉल्ट नाम की एक बेहद सेंसटिव दरार पाई गई है।। इस एक्टिव फॉल्ट लाइन की मौजूदगी ने न सिर्फ इस भारी-भरकम बांध, बल्कि आसपास बन रही सड़कों, पुलों और सुरंगों के वजूद पर भी संकट खड़ा कर दिया है।
यह वही नदी है जो आगे चलकर भारत के असम में ब्रह्मपुत्र और बांग्लादेश में जमुना के नाम से बहती है, जिससे अब इन निचले इलाकों में रहने वाले करोड़ों लोगों की सुरक्षा भी सीधे तौर पर प्रभावित हो सकती है। अगर कुछ गड़बड़ होती है तो इसका खतरा भारत और बांग्लादेश तक भी आ सकता है।
साइंटिफिक एंगल से समझें समस्या
चट्टानों की बनावट और पुराने भूकंपीय रिकॉर्ड इस खतरे को और पुख्ता करते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि इस दरार की वजह से पूरे इलाके की चट्टानें अंदरूनी तौर पर कमजोर और खोखली हो चुकी हैं। जमीन की पकड़ इतनी ढीली है कि जब इस जलाशय में भारी मात्रा में पानी भरा जाएगा, तो दोनों तरफ की ढलानें पानी के दबाव को बर्दाश्त नहीं कर पाएंगी। इसी वजह से कई 9500 सौ साल पहले से लेकर अब तक इस इलाके में लगातार जमीन के भीतरी हिस्से में हलचल दर्ज की गई है। अभी कुछ साल पहले, 2017 में इसी फॉल्ट लाइन के उत्तरी छोर पर 6.9 तीव्रता का मिलिन भूकंप आया था, जिसने यहां की धरती को बुरी तरह हिला दिया था। ऐसे में भविष्य में आने वाला कोई भी बड़ा भूकंप बांध को भारी नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे पहाड़ों में बड़े पैमाने पर लैंडस्लाइड होने की आशंका है।
क्या करना चाहता है चीन?
यह कोई आम पावर प्रोजेक्ट नहीं है। चीन ने पिछले साल ही इसका निर्माण शुरू किया है और इसका मुख्य उद्देश्य हर साल करीब 300 बिलियन किलोवाट-घंटा बिजली पैदा करना है। आकार और क्षमता के मामले में यह चीन के अपने ही मशहूर थ्री गोर्जेस डैम से लगभग तीन गुना बड़ा होने वाला है। यही वजह है कि इसके निर्माण क्षेत्र में आने वाले पाइ गांव के आसपास की जमीनी हलचल का वैज्ञानिक लगातार बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं, क्योंकि पिछले 9,500 सालों के इतिहास में यह दरार बार-बार सक्रिय हुई है।
तुरंत बदलाव नहीं तो आ जाएगी प्रलय
जोखिमों की गंभीरता को देखते हुए चेंगदू यूनिवर्सिटी और चाइना जियोलॉजिकल सर्वे के वैज्ञानिकों ने निर्माण कार्य के तरीकों में तुरंत बदलाव करने का सुझाव दिया है। उनकी रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि पारंपरिक तरीकों से इस बांध को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। पहाड़ों की ढलानों को कंक्रीट और लोहे के मेश से अतिरिक्त मजबूती देनी होगी और मलबे को रोकने के लिए भारी सुरक्षा दीवारें खड़ी करनी होंगी। अगर इन सुरक्षा उपायों को नजरअंदाज किया गया, तो पानी के भारी दबाव और कमजोर जमीन के कारण यह ड्रीम प्रोजेक्ट किसी बड़ी तबाही की वजह बन सकता है।
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