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Chhattisgarh Freedom Religion Act: धर्म स्वतंत्रता अधिनियम को में हाईकोर्ट में चुनौती, सरकार से 3 हफ्ते में मांगा जवाब

October 9, 2026

Chhattisgarh Freedom Religion Act: छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। इसके लिए सरकार को तीन हफ्ते समय दिया है। चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की बेंच ने कहा कि अगली सुनवाई में दोनों पक्षों को सुनने के बाद अंतरिम आवेदन पर भी विचार किया जा सकता है। अब मामले की सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी।

किसने दायर की याचिका ?

इस कानून (Chhattisgarh Freedom Religion Act) के प्रावधानों को चुनौती देते हुए वीएन प्रसाद राव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील राहुल तामस्कर ने पैरवी की।

 सरकार को कम समय देने की मांग की

याचिकाकर्ता की ओर से अंतरिम आवेदन पर अलग से सुनवाई करने और सरकार को जवाब की तैयारी के लिए कम समय देने की मांग की गई। वहीं, राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखने के लिए तीन हफ्ते का समय मांगा।

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इसी कानून पर दूसरी याचिकाएं भी लंबित

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026 (Chhattisgarh Freedom Religion Act) के अलग-अलग प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली अन्य याचिकाएं भी हाईकोर्ट में लंबित हैं। सरकार ने इसी आधार पर मौजूदा मामले में नोटिस जारी करने का अनुरोध किया।

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अंतरिम आवेदन पर अगली सुनवाई में होगा विचार

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर मूल याचिका पर जवाब और अंतरिम आवेदन पर अपनी आपत्ति दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि जवाब की एक कॉपी याचिकाकर्ता के वकील को दी जाए।(Chhattisgarh Freedom Religion Act)

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई (Chhattisgarh Freedom Religion Act) में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अंतरिम आवेदन पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल, कानून की संवैधानिक वैधता को लेकर अदालत में सुनवाई जारी है और राज्य सरकार के जवाब के बाद मामले में आगे की कार्यवाही होगी।

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