ChatGPT Diet Advice: एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोग एआई चैटबॉट को डाइटिशियन के तौर पर ट्रीट कर रहे हैं. एक्सपर्ट्स ने वॉर्निंग दी है कि ऐसा करना नुकसान का कारण बन सकता है.
Written By : प्रमोद कुमार | Updated at : 13 Jul 2026 11:45 AM (IST)

ChatGPT Diet Advice: एआई से खाने की सलाह लेना पड़ सकता है भारी
Source : Magnific
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- लोग AI चैटबॉट्स को डाइट कोच बना रहे, ले रहे सलाह।
- विशेषज्ञों ने AI की सलाह को खतरनाक बताया, गलत आदतें पड़ सकती हैं।
- AI यूजर की मेडिकल हिस्ट्री, मानसिक स्वास्थ्य नहीं समझ पाता।
- ईटिंग डिसऑर्डर में इंसानी देखभाल, विशेषज्ञ उपचार आवश्यक है।
ChatGPT Diet Advice: एआई टूल्स अब सिर्फ फैक्ट्रियों और ऑफिस तक सीमित नहीं रहे हैं. ये हमारे किचन में भी घुस आए हैं. लोग इनसे खाने की रेसिपी के साथ-साथ अपना वजन कम करने के लिए पर्सनलाइज्ड मील प्लान भी बना रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोग चैटजीपीटी जैसे एआई चैटबॉट्स को डाइट कोच के तौर पर ट्रीट कर रहे हैं और उनसे अपने लिए मील प्लान बनवा रहे हैं. अगर आप भी ऐसा कर रहे हैं तो संभल जाने की जरूरत है. थेरेपिस्ट का कहना है कि इससे चुनौतियां बढ़ सकती हैं और यह फायदे की जगह आफत का सौदा बन सकता है. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.
एआई को ही डाइटिशियन बना रहे हैं लोग
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, एआई चैटबॉट्स पर कई लोग अपनी फोटो शेयर कर वजन कम करने और मसल्स गेन करने की टिप्स मांग रहे हैं. इसी तरह कुछ लोग अपने खाने की फोटो शेयर कर उसका हेल्दी ऑप्शन पूछते हैं. ऐसी कई रिक्वेस्ट्स के जवाब में ये चैटबॉट लोगों को कार्बोहाइड्रेट कम करने, फास्ट रखने और बहुत ही कम कैलोरी वाला खाना खाने की सलाह दे रहे हैं. मेडिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसी सामान्य सलाह खतरनाक हो सकती है. इससे लोगों को अनहेल्दी आदतें लग सकती हैं. एआई को यूजर की मेडिकल हिस्ट्री और मेंटल हेल्थ कंडीशन की जानकारी नहीं होती. इस कारण यह खाने से संबंधित बीमारियों से जूझ रहे लोगों को और मुश्किलों में डाल सकती है.
एआई नहीं कर पा रही है अंतर
रिपोर्ट में बताया गया है कि भले ही लोग एआई चैटबॉट्स को एक्सपर्ट मान रहे हैं, लेकिन यह जरूरी चीजों में अंतर नहीं कर पाता. किसी एआई चैटबॉट के लिए फिटनेस के लिए रूटीन फॉलो करने वाले ईटिंग डिसऑर्डर से जूझ रहे लोगों में अंतर कर पाना बहुत मुश्किल है.
एक्सपर्ट्स की सलाह- रिकवरी के लिए एआई पर न रहें निर्भर
एआई के बढ़ते यूज को देखते हुए थेरेपिस्ट का कहना है कि लोगों को एक जरूरी चीज याद रखनी चाहिए. एआई चैटबॉट आपके सवालों के जवाब दे सकता है, लेकिन यह जटिल इमोशन, मेडिकल हिस्ट्री और ईटिंग डिसऑर्डर के पीछे के स्ट्रगल को नहीं समझ सकता. इसलिए ईटिंग डिसऑर्डर से जूझ रहे लोगों के लिए इंसानी केयर और एक्सपर्ट ट्रीटमेंट जरूरी है. सिर्फ एआई के सहारे रिकवरी नहीं हो सकती. यह फायदे से ज्यादा नुकसान का कारण भी बन सकती है.
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About the author प्रमोद कुमार
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले एक दशक से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं. फिलहाल एबीपी न्यूज के साथ काम कर रहा हूं और यहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों, गैजेट्स, ऐप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेंड्स पर लिख रहा हूं. फ्यूचर टेक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया से जुड़े टॉपिक्स में विशेष रुचि है. पिछले 10 वर्षों में नेशनल, पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, ऑटो, बिजनेस और टेक समेत कई बीट्स पर काम करने का अनुभव रहा है. इस दौरान टाइम्स इंटरनेट, दैनिक जागरण और न्यूजबाइट्स जैसे कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला.
विभिन्न बीट्स पर काम करने के अनुभव ने खबरों को अलग-अलग नजरिए से समझने और पेश करने की समझ दी. रिपोर्टिंग और कंटेंट लिखने के दौरान हमेशा कोशिश रही कि खबरों को आसान और भरोसेमंद तरीके से रीडर तक पहुंचाया जाए. 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग करने और कई नेताओं के इंटरव्यू लेने का भी अवसर मिला.
काम के सिलसिले में कई बड़े कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विशेष आयोजनों को कवर करने का मौका मिला, जहां अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला. डिजिटल मीडिया के लगातार बदलते दौर में नई चीजें सीखने और खुद को अपडेट रखने की कोशिश रहती है, ताकि कंटेंट को बेहतर और रीडर के समझने के लिए आसान बनाया जा सके.
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Published at : 13 Jul 2026 11:44 AM (IST)
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