रीवा के 100 बिस्तरों वाले आयुष्मान अस्पताल को बंद करने का मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है। रीवा कलेक्टर और एसपी समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई।
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जस्टिस विशाल मिश्रा की कोर्ट ने फिलहाल अस्पताल का संचालन रोकने के आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही डीजीपी को अस्पताल और पास के पेट्रोल पंप पर लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
23 सितंबर की रात प्रशासन ने किया था निरीक्षण
दरअसल, 23 सितंबर 2026 की रात करीब साढ़े 10 बजे रीवा कलेक्टर, एसपी और अन्य अधिकारियों ने शहर स्थित आयुष्मान अस्पताल में अचानक निरीक्षण किया था। अस्पताल में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद कार्रवाई की गई।
अस्पताल के डॉक्टर केडी सिंह के खिलाफ शिकायतों की बात भी सामने आई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल पहुंचकर जांच की और कई दस्तावेज जब्त किए।
प्रशासन की ओर से अस्पताल संचालक डॉ. प्रियंका सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा गया। इसके बाद 24 सितंबर को अस्पताल के संचालन पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया गया। साथ ही भर्ती मरीजों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए।
अस्पताल ने कहा-तीन दिन का समय दिए बिना बंद करने का आदेश
प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ आयुष्मान अस्पताल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय के. अग्रवाल और सिद्धार्थ कुमार शर्मा ने कोर्ट में तर्क दिया कि अस्पताल को जारी कारण बताओ नोटिस में तीन दिन में जवाब देने का समय दिया गया था। इसके बावजूद जवाब का इंतजार किए बिना अस्पताल बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया।
याचिकाकर्ता ने यह भी सवाल उठाया कि कलेक्टर, एसपी और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को अस्पताल का निरीक्षण कर इस तरह की कार्रवाई करने का अधिकार किस आधार पर मिला। अस्पताल की कमियों और लाइसेंस संबंधी कार्रवाई के लिए मध्यप्रदेश नर्सिंग होम्स एंड क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट, 1973 के तहत स्वास्थ्य विभाग और सीएमएचओ के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
धारा 6 में एक माह के नोटिस का दिया हवाला
अस्पताल की ओर से कोर्ट को बताया गया कि एक्ट की धारा 6 के तहत अस्पताल का पंजीकरण रद्द करने से पहले एक माह का नोटिस देने का प्रावधान है। इसके विपरीत अस्पताल को केवल तीन दिन का नोटिस दिया गया। याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि प्रशासन की कार्रवाई पास के पेट्रोल पंप पर लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई है।
सरकार बोली- अस्पताल बंद नहीं किया गया
मंगलवार की सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता एएस बघेल ने कोर्ट को बताया कि अस्पताल बंद नहीं हुआ है। उनका कहना था कि 24 सितंबर को अस्पताल बंद करने का आदेश लागू नहीं किया गया और अस्पताल को संचालन की अनुमति है। उन्होंने यह भी कहा कि तीन दिन के नोटिस को 30 दिन का माना जा सकता है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के इस जवाब को संतोषजनक नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि 24 सितंबर के अंतरिम आदेश में अस्पताल का संचालन तत्काल प्रभाव से रोकने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे।
अगली सुनवाई तक संचालन नहीं रोका जाएगा
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 24 सितंबर को रीवा कलेक्टर और एसपी की ओर से की गई कार्रवाई पर रोक लगा दी। जस्टिस विशाल मिश्रा की कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक 100 बिस्तरों वाले आयुष्मान अस्पताल का संचालन नहीं रोका जाए। साथ ही डीजीपी को अस्पताल और पास के पेट्रोल पंप के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।