भारत-रूस संबंध
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पुतिन-मोदी वार्ता, BRICS और रक्षा सहयोग: पेसकोव ने भारत को लेकर क्या कहा?
पुतिन-मोदी वार्ता, BRICS और रक्षा सहयोग: पेसकोव ने भारत को लेकर क्या कहा?
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रूसी राष्ट्रपति के प्रेस सचिव दिमित्री पेसकोव ने Sputnik India की ओर से आयोजित विशेष ऑनलाइन ब्रीफिंग में भारतीय पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने... 08.09.2026, Sputnik भारत
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भारत-रूस संबंध
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पुतिन और मोदी के बीच करीबी संपर्कपेसकोव ने कहा कि पुतिन भारत में BRICS शिखर सम्मेलन के सभी प्रारूपों में हिस्सा लेंगे। इसके साथ ही मोदी और पुतिन के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता भी होगी।पेसकोव के मुताबिक, यह संवाद भारत और रूस के सहयोग के लिए नए अवसर खोलता है।भारत की BRICS अध्यक्षता की सराहनाक्रेमलिन के प्रवक्ता ने भारत की BRICS अध्यक्षता के परिणामों की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि नई दिल्ली में होने वाला शिखर सम्मेलन सफल रहेगा।उन्होंने BRICS के विकास में रूस, भारत और चीन की शुरुआती भूमिका को भी याद किया। पेसकोव ने कहा कि करीब 20 साल पहले यह यात्रा RIC यानी रूस, भारत और चीन के प्रारूप से शुरू हुई थी। ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद यह एक बड़े वैश्विक मंच में बदल गया।पेसकोव ने उन दावों को भी खारिज किया कि BRICS पश्चिम के विरुद्ध बनाया गया संगठन है।राष्ट्रीय मुद्राओं में 90 प्रतिशत भुगतानपेसकोव के अनुसार, BRICS देशों के साथ रूस के 90 प्रतिशत से अधिक भुगतान अब राष्ट्रीय मुद्राओं में किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य अमेरिकी डॉलर के विरुद्ध अभियान चलाना नहीं, बल्कि बाहरी राजनीतिक दबाव से व्यापार को सुरक्षित रखना है।पेसकोव ने कहा कि अमेरिका के अपने कदम डॉलर पर वैश्विक भरोसे को कमजोर कर रहे हैं। रूस किसी घोषित 'डी-डॉलराइजेशन' नीति का पालन नहीं कर रहा, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप भुगतान व्यवस्था विकसित कर रहा है।100 अरब डॉलर से आगे जा सकता है व्यापारपेसकोव ने विश्वास जताया कि भारत और रूस का द्विपक्षीय व्यापार तय समय से पहले 100 अरब डॉलर के लक्ष्य को पार कर सकता है। उन्होंने दुर्लभ खनिज, महत्वपूर्ण कच्चे माल और दवा उद्योग को सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में गिनाया।क्रेमलिन के प्रवक्ता ने स्वीकार किया कि दोनों देशों के व्यापार में असंतुलन है और भारत लगातार इस मुद्दे को उठाता रहा है। उनके मुताबिक, रूसी कंपनियां भारत से खरीदे जा सकने वाले नए उत्पादों और संयुक्त परियोजनाओं की तलाश कर रही हैं।उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार और संयुक्त परियोजनाओं के बढ़ने के साथ भारत और रूस के बीच सीधी उड़ानों की संख्या भी बढ़ेगी।S-400, Su-57 और ब्रह्मोस पर क्या बोले पेसकोव?पेसकोव ने कहा कि रूस भारत के प्रति S-400 की आपूर्ति से जुड़ी अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में सक्षम है। यह मुद्दा पुतिन और मोदी की बातचीत में भी उठाया गया है।Su-57 लड़ाकू विमानों पर उन्होंने बताया कि भारत को इन विमानों की बिक्री एजेंडे में है। नई दिल्ली उत्पादन तकनीक में भी रुचि रखती है और इस पर अतिरिक्त चर्चा जारी है।उन्होंने कहा कि देश आम तौर पर अपनी नई सैन्य तकनीकों को साझा नहीं करना चाहते, लेकिन भारत के साथ रूस की उन्नत रणनीतिक साझेदारी को देखते हुए संभावित तकनीकी सहयोग पर विचार किया जा रहा है।पेसकोव ने ब्रह्मोस को सामान्य खरीद-बिक्री से आगे बढ़ चुके रक्षा सहयोग का उदाहरण बताया। उनके अनुसार, अब दोनों देश इस संयुक्त रूप से निर्मित मिसाइल को अधिक प्रभावी बनाने और उसमें नई क्षमताएं जोड़ने पर विचार कर सकते हैं।यूक्रेन समाधान में भारत की भूमिकापेसकोव ने कहा कि रूस अपने लक्ष्यों को शांतिपूर्ण तरीके से हासिल करना पसंद करेगा और यूक्रेन संकट के समाधान में योगदान देने की भारत की इच्छा का स्वागत करता है।उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रयासों का भी उल्लेख किया। पेसकोव के मुताबिक, अमेरिकी वार्ताकार मॉस्को और कीव के बीच लगातार संपर्क कर रहे हैं और एक-दूसरे का रुख पहुंचा रहे हैं।उन्होंने कहा कि मॉस्को रूस, अमेरिका और यूक्रेन के बीच त्रिपक्षीय वार्ता दोबारा शुरू होने की उम्मीद करता है। हालांकि, पेसकोव ने दावा किया कि कीव अभी युद्ध रोकने के लिए पर्याप्त इच्छुक नहीं है।फारस की खाड़ी और होर्मुज पर चिंतापेसकोव ने कहा कि फारस की खाड़ी में तनाव का वैश्विक तेल और LNG आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। इसके आर्थिक परिणाम भारत और रूस दोनों को प्रभावित कर रहे हैं तथा यह विषय पुतिन-मोदी वार्ता में शामिल होगा।उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों की आवाजाही के लिए खुला रखने का समर्थन किया। पेसकोव के अनुसार, क्षेत्रीय तनाव जितना लंबा चलेगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था को उतना ही अधिक नुकसान होगा।रूस ने ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच संबंध सामान्य करने में आवश्यक सहायता देने की भी पेशकश की। पेसकोव ने कहा कि मॉस्को क्षेत्रीय सुरक्षा, आपसी विश्वास और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है।
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15:36 08.09.2026 (अपडेटेड: 15:38 08.09.2026)
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रूसी राष्ट्रपति के प्रेस सचिव दिमित्री पेसकोव ने Sputnik India की ओर से आयोजित विशेष ऑनलाइन ब्रीफिंग में भारतीय पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आगामी भारत यात्रा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी वार्ता, BRICS, द्विपक्षीय व्यापार, ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर रूस का रुख स्पष्ट किया।
पेसकोव ने कहा कि पुतिन भारत में BRICS शिखर सम्मेलन के सभी प्रारूपों में हिस्सा लेंगे। इसके साथ ही मोदी और पुतिन के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता भी होगी।
उन्होंने कहा, "दोनों नेताओं के बीच बेहद करीबी व्यक्तिगत संपर्क है। उनके संबंध व्यावहारिक और ईमानदार हैं, इसलिए वे वैश्विक एजेंडे तथा द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े सबसे संवेदनशील मुद्दों पर भी खुलकर और रचनात्मक तरीके से चर्चा कर सकते हैं।"
पेसकोव के मुताबिक, यह संवाद भारत और रूस के सहयोग के लिए नए अवसर खोलता है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता ने भारत की BRICS अध्यक्षता के परिणामों की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि नई दिल्ली में होने वाला शिखर सम्मेलन सफल रहेगा।
उन्होंने BRICS के विकास में रूस, भारत और चीन की शुरुआती भूमिका को भी याद किया। पेसकोव ने कहा कि करीब 20 साल पहले यह यात्रा RIC यानी रूस, भारत और चीन के प्रारूप से शुरू हुई थी। ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद यह एक बड़े वैश्विक मंच में बदल गया।
पेसकोव ने उन दावों को भी खारिज किया कि BRICS पश्चिम के विरुद्ध बनाया गया संगठन है।
उन्होंने कहा, "हम भारत की इस बात से सहमत हैं कि BRICS किसी पश्चिमी देश या तीसरे पक्ष के खिलाफ नहीं है। BRICS अपने सदस्यों और उसके दृष्टिकोण को साझा करने वाले देशों के हितों के लिए काम करता है।"
पेसकोव के अनुसार, BRICS देशों के साथ रूस के 90 प्रतिशत से अधिक भुगतान अब राष्ट्रीय मुद्राओं में किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य अमेरिकी डॉलर के विरुद्ध अभियान चलाना नहीं, बल्कि बाहरी राजनीतिक दबाव से व्यापार को सुरक्षित रखना है।
उन्होंने कहा, "अगर वे हमें अपनी मुद्रा इस्तेमाल नहीं करने देते, तो हम अपनी मुद्रा इस्तेमाल करते हैं।"
पेसकोव ने कहा कि अमेरिका के अपने कदम डॉलर पर वैश्विक भरोसे को कमजोर कर रहे हैं। रूस किसी घोषित 'डी-डॉलराइजेशन' नीति का पालन नहीं कर रहा, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप भुगतान व्यवस्था विकसित कर रहा है।
पेसकोव ने विश्वास जताया कि भारत और रूस का द्विपक्षीय व्यापार तय समय से पहले 100 अरब डॉलर के लक्ष्य को पार कर सकता है। उन्होंने दुर्लभ खनिज, महत्वपूर्ण कच्चे माल और दवा उद्योग को सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में गिनाया।
क्रेमलिन के प्रवक्ता ने स्वीकार किया कि दोनों देशों के व्यापार में असंतुलन है और भारत लगातार इस मुद्दे को उठाता रहा है। उनके मुताबिक, रूसी कंपनियां भारत से खरीदे जा सकने वाले नए उत्पादों और संयुक्त परियोजनाओं की तलाश कर रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार और संयुक्त परियोजनाओं के बढ़ने के साथ भारत और रूस के बीच सीधी उड़ानों की संख्या भी बढ़ेगी।
ऊर्जा व्यापार पर पेसकोव ने कोई आंकड़ा नहीं दिया, लेकिन कहा, "हर महीने हम एक नया रिकॉर्ड बना रहे हैं।"
पेसकोव ने कहा कि रूस भारत के प्रति S-400 की आपूर्ति से जुड़ी अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में सक्षम है। यह मुद्दा पुतिन और मोदी की बातचीत में भी उठाया गया है।
Su-57 लड़ाकू विमानों पर उन्होंने बताया कि भारत को इन विमानों की बिक्री एजेंडे में है। नई दिल्ली उत्पादन तकनीक में भी रुचि रखती है और इस पर अतिरिक्त चर्चा जारी है।
उन्होंने कहा कि देश आम तौर पर अपनी नई सैन्य तकनीकों को साझा नहीं करना चाहते, लेकिन भारत के साथ रूस की उन्नत रणनीतिक साझेदारी को देखते हुए संभावित तकनीकी सहयोग पर विचार किया जा रहा है।
पेसकोव ने ब्रह्मोस को सामान्य खरीद-बिक्री से आगे बढ़ चुके रक्षा सहयोग का उदाहरण बताया। उनके अनुसार, अब दोनों देश इस संयुक्त रूप से निर्मित मिसाइल को अधिक प्रभावी बनाने और उसमें नई क्षमताएं जोड़ने पर विचार कर सकते हैं।
पेसकोव ने कहा कि रूस अपने लक्ष्यों को शांतिपूर्ण तरीके से हासिल करना पसंद करेगा और यूक्रेन संकट के समाधान में योगदान देने की भारत की इच्छा का स्वागत करता है।
उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रयासों का भी उल्लेख किया। पेसकोव के मुताबिक, अमेरिकी वार्ताकार मॉस्को और कीव के बीच लगातार संपर्क कर रहे हैं और एक-दूसरे का रुख पहुंचा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मॉस्को रूस, अमेरिका और यूक्रेन के बीच त्रिपक्षीय वार्ता दोबारा शुरू होने की उम्मीद करता है। हालांकि, पेसकोव ने दावा किया कि कीव अभी युद्ध रोकने के लिए पर्याप्त इच्छुक नहीं है।
पेसकोव ने कहा कि फारस की खाड़ी में तनाव का वैश्विक तेल और LNG आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। इसके आर्थिक परिणाम भारत और रूस दोनों को प्रभावित कर रहे हैं तथा यह विषय पुतिन-मोदी वार्ता में शामिल होगा।
उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों की आवाजाही के लिए खुला रखने का समर्थन किया। पेसकोव के अनुसार, क्षेत्रीय तनाव जितना लंबा चलेगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था को उतना ही अधिक नुकसान होगा।
रूस ने ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच संबंध सामान्य करने में आवश्यक सहायता देने की भी पेशकश की। पेसकोव ने कहा कि मॉस्को क्षेत्रीय सुरक्षा, आपसी विश्वास और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है।