नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से 'न्यू दिल्ली घोषणापत्र' को मंजूरी दे दी है। सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई, सीमा पार फंडिंग रोकने, और 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करने पर सहमति बनी है।
नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन 2026 वैश्विक राजनीति और कूटनीति का सबसे बड़ा मंच बनकर उभरा है।
- Published: 12 Sep 2026, 06:06 PM IST
- Last Updated: 12 Sep 2026, 06:06 PM IST
राजधानी नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन वैश्विक कूटनीति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका समेत नए सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान जारी संयुक्त घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक नीतियों और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई को लेकर महत्वपूर्ण समझौते किए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प के बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग पहली बार सात वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भारत दौरे पर पहुंचे हैं, जिनकी शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है।
ब्रिक्स घोषणापत्र की 10 सबसे प्रमुख बातें
- पहलगाम आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा: ब्रिक्स देशों ने 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले की सामूहिक रूप से कड़ी निंदा की और हमले में जान गंवाने वाले 26 लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
- आतंकवाद के खिलाफ सख्त और बिना शर्त रुख: सम्मेलन में आतंकवाद के सभी रूपों, स्वरूपों और किसी भी कारण से की जाने वाली आतंकी गतिविधियों की स्पष्ट निंदा की गई।
- आतंकवाद को धर्म से न जोड़ने का संकल्प: घोषणापत्र में स्पष्ट कहा गया कि आतंकवाद को किसी भी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
- सीमा पार आतंकवाद और फंडिंग पर नकेल: सीमा पार आतंकवाद, आतंकियों को सुरक्षित पनाह देने वाले ठिकानों और आतंकी संगठनों तक पहुँचने वाली वित्तीय मदद को रोकने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति बनी।
- आतंकियों की जवाबदेही तय करने पर जोर: आतंकवाद फैलाने वाले व्यक्तियों, प्रायोजकों और उनके नेटवर्क के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई कर उनकी जवाबदेही तय करने का फैसला लिया गया।
- संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद रोधी संधि: संयुक्त राष्ट्र (UN) के तहत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर प्रस्तावित व्यापक संधि को जल्द से जल्द अपनाने का आह्वान किया गया।
- मूल सिद्धांतों को मजबूती: आपसी सम्मान, संप्रभु समानता, एकजुटता और सर्वसम्मति से निर्णय लेने के ब्रिक्स के मूलभूत सिद्धांतों पर अडिग रहने का संकल्प जताया गया।
- एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक पाबंदियों की निंदा: वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले एकतरफा टैरिफ पर चिंता जताई गई और कहा गया कि सभी व्यापारिक कदम विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के अनुकूल होने चाहिए।
- बढ़ते वैश्विक तनाव और परमाणु खतरे पर चिंता: दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के बढ़ते खतरों पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की गई।
- भारत की अध्यक्षता की सराहना: सभी ब्रिक्स सदस्य देशों ने भारत की कुशल अध्यक्षता, ब्रिक्स प्लस और आउटरीच संवाद के सफल आयोजन की खुलकर सराहना की।
ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के 5 मुख्य बातें
- अगले 20 साल का नया एजेंडा: पीएम मोदी ने सुझाव दिया कि ब्रिक्स को अगले 20 वर्षों के लिए अपनी रणनीतियों का नया एजेंडा तैयार करना चाहिए और फैसलों पर अमल के लिए एक स्थायी संस्थागत व्यवस्था बनानी चाहिए।
- ग्लोबल साउथ की तकनीक में हिस्सेदारी: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबरस्पेस, अंतरिक्ष और बायोटेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों के नियम बनाने में विकासशील देशों की बराबर भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
- युवाओं और नीति-निर्माताओं का प्रशिक्षण: अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, बातचीत और कानूनों की समझ बढ़ाने के लिए युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों का प्रस्ताव रखा।
- नाविकों के लिए इमरजेंसी नेटवर्क: समुद्र में आपातकालीन परिस्थितियों में फंसने वाले नाविकों के इलाज, उनके परिवारों से संपर्क और सुरक्षित निकासी के लिए सदस्य देशों के बीच एक समर्पित नेटवर्क बनाने की वकालत की।
- 'भविष्य सबका, फैसला भी सबका': प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि दुनिया का भविष्य साझा है, तो वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रिया में सभी देशों के पास समान अधिकार और प्रतिनिधित्व होना चाहिए।