BRICS Summit 2026: भारत की मेजबानी में 18वें ब्रिक्स समिट की बैठक नई दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू हो गई है. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "भारत में आप सभी का स्वागत करते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है. भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण पर आधारित है. लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता हमारी प्राथमिकताएं रही हैं. इन प्राथमिकताओं के साथ-साथ हमने ब्रिक्स सहयोग को आम जनता से जोड़ने पर विशेष जोर दिया है. इसी सोच के साथ 350 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं. हमें लगभग 30 शहरों में आपकी टीमों का स्वागत करने का अवसर मिला.
"भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को सफल बनाने में आपके सक्रिय योगदान और समर्थन के लिए मैं आप सभी का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं. इस वर्ष का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है. हम ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ मना रहे हैं. मानव जीवन में, 20 वर्ष की आयु परिपक्वता और जिम्मेदारी के एक नए चरण की शुरुआत का प्रतीक है. "आज ब्रिक्स भी परिपक्वता के मुकाम पर पहुंच गया है. पिछले दो दशकों में ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है. हम एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हैं और आम सहमति से आगे बढ़ते हैं. हम किसी का विरोध करके नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं. अब समय आ गया है कि हम ब्रिक्स के भीतर अपनी एकता और आम सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदलें."
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हर साल बदलती रहती है ब्रिक्स की अध्यक्षता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, "हमें अगले 20 वर्षों के लिए एक नए और महत्वाकांक्षी एजेंडे पर काम करने की आवश्यकता है. हमें इस प्रक्रिया की शुरुआत अपनी आंतरिक कार्यप्रणालियों से करनी होगी. हालांकि ब्रिक्स की अध्यक्षता हर साल बदलती रहती है, लेकिन इससे हमारी संस्थागत गति बाधित नहीं होनी चाहिए. मैं ब्रिक्स निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र की स्थापना का प्रस्ताव करता हूं. इससे 'त्रोइका' व्यवस्था के माध्यम से सभी पहलों और परिणामों की निगरानी संभव हो सकेगी. हम प्रत्येक निर्णय से संबंधित नोडल बिंदु, समयसीमा और कार्यान्वयन स्थिति को दर्ज करने के लिए एक सुरक्षित डिजिटल भंडार भी बना सकते हैं."
#WATCH | Delhi: During the BRICS Summit 2026, Prime Minister Narendra Modi says, "While strengthening BRICS, we must also chart a course for global reform. The current structure of global governance resembles a pyramid: power and decision-making are concentrated at the top, while… pic.twitter.com/6Ksdy8LEF7
— ANI (@ANI) September 12, 2026
'रोडमैप को तैयार करते समय तीन प्रमुख पहलुओं पर ध्यान देना होगा'
इस रोडमैप को तैयार करते समय हमें तीन प्रमुख पहलुओं पर ध्यान देना होगा: प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम निर्माण. प्रतिनिधित्व के संबंध में, मैं यह कहना चाहूंगा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता. इस विषय पर बातचीत एक निश्चित समयसीमा और स्पष्ट परिणामों से जुड़ी होनी चाहिए. इसी प्रकार, वित्तीय संस्थानों के भीतर मतदान शक्ति, नेतृत्व पद और नीतिगत प्राथमिकताएं आज की आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप होनी चाहिए. वैश्विक आर्थिक विकास को गति देने वाले देशों को वैश्विक आर्थिक शासन को आकार देने में भी उचित भूमिका निभानी चाहिए.
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'वैश्विक शासन सुधार के लिए 10 प्रस्ताव करें तैयार'
पीएम मोदी ने आगे कहा कि आज वैश्विक संकटों में दक्षिण के देश सबसे आगे हैं, लेकिन निर्णय लेने में सबसे पीछे हैं. हमें इस 'विशेषाधिकार के पिरामिड' को 'साझेदारी के मंच' में बदलना होगा—एक ऐसा मंच जहां हर राष्ट्र की आवाज हो, हर सदस्य की हिस्सेदारी हो, और मानवता का विकास हर प्रयास के केंद्र में हो. इस उद्देश्य से, मैं प्रस्ताव करता हूं कि हम संयुक्त रूप से वैश्विक शासन सुधार के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करें, जिनका लक्ष्य अगले शिखर सम्मेलन तक ब्रिक्स सुधार रोडमैप का रूप देना है."
#WATCH | Delhi: During the BRICS Summit 2026, Prime Minister Narendra Modi says, "Today, BRICS, too, has reached a moment of 'coming of age'. Over the past two decades, BRICS has established a distinct identity on the global stage. We respect each other's perspectives and move… pic.twitter.com/qZpvKTKVrZ
— ANI (@ANI) September 12, 2026
"ब्रिक्स को मजबूत करते हुए हमें वैश्विक सुधारों की दिशा भी तय करनी होगी. वैश्विक शासन की वर्तमान संरचना एक पिरामिड की तरह है: शक्ति और निर्णय लेने का अधिकार शीर्ष पर केंद्रित है, जबकि निचले स्तरों में वे राष्ट्र शामिल हैं जो इन निर्णयों से प्रभावित तो होते हैं लेकिन उन्हें आकार देने में असमर्थ होते हैं.