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Bihar Flood Alert: बिहार में बाढ़ का खतरा बरकरार! गंगा समेत कई नदियां उफान पर, इन इलाकों में बढ़ रहा जलस्तर

September 7, 2026

पटना: बिहार में बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। राज्य की कई प्रमुख नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। जल संसाधन विभाग (WRD) की 7 सितंबर 2026 की सुबह 6 बजे की रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि कई इलाकों में नदी का जलस्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। खासकर गंगा, पुनपुन, बूढ़ी गंडक, बागमती, कोसी और घाघरा जैसी नदियों के कई स्थानों पर पानी खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है।हालांकि कुछ स्थानों पर जलस्तर में गिरावट भी दर्ज हुई है, लेकिन कई महत्वपूर्ण साइटों पर नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में तटवर्ती इलाकों के लोगों को अभी राहत मिलने की उम्मीद कम है।

पुनपुन में सबसे ज्यादा खतरा, खतरे के निशान से 2.87 मीटर ऊपर पानी

रिपोर्ट के मुताबिक पुनपुन नदी का जलस्तर पटना जिले के श्रीपालपुर में 53.47 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का निशान 50.60 मीटर है। यानी नदी का पानी खतरे के निशान से 2.87 मीटर ऊपर है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यहां पानी का ट्रेंड RISING यानी बढ़ता हुआ दर्ज किया गया है। इससे पुनपुन नदी के आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।

बूढ़ी गंडक भी उफान पर

बूढ़ी गंडक नदी भी कई इलाकों में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। खगड़िया में नदी का जलस्तर 38.50 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 36.58 मीटर है। यानी यहां पानी 1.92 मीटर ऊपर है। खास बात यह है कि खगड़िया में बूढ़ी गंडक का जलस्तर बढ़ रहा है। वहीं बागमती नदी के बेनीबाद में पानी 48.93 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 48.68 मीटर से 0.25 मीटर ऊपर है। यहां भी जलस्तर बढ़ने का ट्रेंड दर्ज किया गया है।

गंगा कई जगह खतरे के निशान से ऊपर

बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच गंगा नदी भी कई प्रमुख घाटों और शहरों में खतरे के निशान से ऊपर है। गांधी घाट, पटना में गंगा का जलस्तर 50.41 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 48.60 मीटर है। यहां नदी 1.81 मीटर ऊपर बह रही है। हालांकि गांधी घाट पर पानी में हल्की गिरावट दर्ज की गई है।

इसके अलावा दीघा में गंगा का जलस्तर 51.78 मीटर रहा, जो खतरे के निशान 50.45 मीटर से 1.33 मीटर ऊपर है। हथीदह में पानी 43.52 मीटर और खतरे का निशान 41.76 मीटर है। यानी यहां भी नदी 1.76 मीटर ऊपर बह रही है और जलस्तर बढ़ने का ट्रेंड है।

मुंगेर में गंगा का जलस्तर 40.06 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 0.73 मीटर ऊपर है। भागलपुर में नदी 0.76 मीटर और कहलगांव में 1.52 मीटर खतरे के निशान से ऊपर है। इन दोनों जगहों पर भी पानी बढ़ने का ट्रेंड दर्ज किया गया है।

कोसी और गंडक में भी स्थिति गंभीर

कोसी नदी के बलतारा में जलस्तर 35.13 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 33.85 मीटर है। यानी नदी 1.28 मीटर ऊपर बह रही है। हालांकि यहां पानी में मामूली गिरावट दर्ज हुई है। गंडक नदी के डुमरिया घाट में जलस्तर 62.77 मीटर रहा, जो खतरे के निशान 62.22 मीटर से 0.55 मीटर ऊपर है। हाजीपुर में भी गंडक का पानी खतरे के निशान से ऊपर है।

बैराजों से डिस्चार्ज पर भी नजर

बिहार के प्रमुख बैराजों से पानी के डिस्चार्ज की स्थिति भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार बिरपुर बैराज से कोसी नदी में सुबह 8 बजे 1,96,645 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज दर्ज किया गया। वहीं वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में 1,21,500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इंद्रपुरी बैराज से सोन नदी में 1,39,847 क्यूसेक डिस्चार्ज दर्ज किया गया। कोसी के बिरपुर बैराज में डिस्चार्ज का ट्रेंड रिपोर्ट में FALLING, जबकि वाल्मीकिनगर बैराज में RISING दर्ज किया गया है।

कई जगह घट रहा पानी, लेकिन खतरा अभी बरकरार

रिपोर्ट का सबसे अहम संकेत यही है कि कुछ जगहों पर नदियों का जलस्तर घट रहा है, लेकिन कई संवेदनशील स्थानों पर पानी अब भी बढ़ रहा है। पुनपुन, बूढ़ी गंडक, बागमती और गंगा के कई हिस्सों में बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन और तटवर्ती आबादी की चिंता बढ़ा दी है।

ऐसे में अगले कुछ घंटे बिहार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। नदियों के जलस्तर में होने वाले बदलाव पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। तटवर्ती और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को नदी के आसपास जाने से बचने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।