Azan in Islam Meaning: नमाज इस्लाम के पांच सबसे मेन अरकानों (स्तंभों) में से एक है. नमाज पढ़ना हर बालिग मुसलमान पर फर्ज बताया गया है, जो किसी भी हालत में नहीं छोड़ी जाती है. नमाज पढ़ने से पहले मस्जिदों में अजान होती है, जिसके बाद मुसलमान नमाज पढ़ने के लिए जाते हैं. आपने दुनियाभर की तमाम मस्जिदों में पांच वक्त (फज्र, जोहर, असर, मगरिब और ईशा) की अजान होते हुए जरूर सुनी होगी. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मुसलमान अजान क्यों देते हैं और इसका क्या मतलब होता है? आइए जानते हैं इस लेख में इस्लाम में अजान की फजीलत.
मुसलमान दिन भर में पांच वक्त की इबादत करते हैं और इसके लिए पांचों टाइम ही मस्जिद की मीनारों में अजान की जाती है, जिसे सुनकर मुसलमान मस्जिद की ओर रवाना होते हैं. इस्लाम में अजान की और अजान पढ़ने वाले शख्स को बहुत अहमियत दी गई है. इस्लाम में मुसलमानों को हुक्म दिया गया है कि वो अजान के वक्त खामोश रहे हैं और साथ ही अपने कामों को भी बीच में ही रोक दें.
इस्लाम में अजान क्या है?
इस्लाम में अजान दिन की पांचों नमाजों के लिए मुसलमानों को मस्जिदों में बुलाने और याद दिलाने की एक पुकार है. ये मुसलमानों को आगाह करती है कि नमाज का समय हो गया है. इसके शब्दों में अल्लाह की तारीफ और इस्लाम के मूल सिद्धांतों (तौहीद) की गवाही दी जाती है. जो शख्स अजान देता है, उसे मुअज़्ज़िन कहते हैं. अजान सुनने और उसका जवाब देने से सवाब (पुण्य) मिलता है.
अज़ान सुनने और जवाब्र देने के फायदे
शैतान का दूर होना:- अजान की आवाज सुनकर शैतान भाग जाता है और वो उस जगह से दूर चला जाता है जहां अजान की गूंज होती है. दुआओं की कुबूलियत:- अजान और इकामत के बीच का समय बेहद पाक माना जाता है. इस दौरान की गई दुआएं कुबूल होती हैं.
जन्नत का मिलना:- मुअज़्ज़िन (अजान देने वाले) की आवाज के साथ-साथ वैसे ही शब्द दोहराने और अजान का जवाब देने वाले शख्स के लिए जन्नत में जाने का रास्ता आसान होता है.
गवाही और माफी:- मुअज़्ज़िन की आवाज जितनी दूर तक जाती है, वहां मौजूद हर जीवित और निर्जीव चीज कयामत के दिन उसके हक में गवाही देती है. मुअज़्ज़िन की आवाज की हद तक उसके गुनाहों की माफी की दुआ की जाती है.
समय की याद दिलाना:- अजान मसरूफियत के बीच इंसान को उसके असल मकसद यानी अल्लाह की याद और नमाज के समय की सही जानकारी देता है.
अजान के अल्फाज और उनका मतलब
| अजान | मतलब |
| अल्लाहु अकबर (4 बार) | अल्लाह सबसे बड़ा है |
| अशहदु अन् ला इलाह इल्लल्लाह (2 बार) | मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवा कोई दूसरा इबादत के काबिल नहीं |
| अश-हदू अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह (2 बार) | मैं गवाही देता हूं कि मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं |
| ह़य्य अलस्सलाह (2 बार) | आओ इबादत की ओर |
| ह़य्य अलल्फलाह (2 बार) | आओ कामयाबी की ओर |
| अल्लाहु अकबर (2 बार) | अल्लाह सब से महान है |
| ला-इलाहा इल्लल्लाह | अल्लाह के सिवा कोई इबादत के काबिल नहीं. |
अजान की शुरुआत कैसे हुई?
इस्लाम में अजान की शुरुआत मदीना में हिजरत (622 ईस्वी) के तुरंत बाद पैगंबर हजरत मुहम्मद के समय हुई थी. शुरुआत में मुसलमानों को नमाज़ के समय की जानकारी नहीं होती थी, इसलिए नमाज के लिए लोगों को इकट्ठा करने का कोई तरीका तय नहीं था. नमाज के लिए लोगों को बुलाने के लिए घंटी, सिंग (तुरही) या आग जलाने जैसे कई सुझाव आए, लेकिन पैगंबर मुहम्मद को ये तरीके पसंद नहीं आए क्योंकि ये दूसरे धर्मों के तरीके थे. फि एक सहाबी (अनुयायी) अब्दुल्ला इब्न जैद ने सपने में अजान के शब्द और नमाज के लिए पुकारने का तरीका देखा. हजरत उमर ने भी ऐसा ही सपना देखा था. पैगंबर मुहम्मद ने इस बुलंद पुकार को मंजूरी दी और इतिहास के पहले मुअज़्ज़िन (अजान देने वाले) हजरत बिलाल इब्न रबाह को बनाया, जिनकी आवाज बहुत सुरीली थी.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

सना चौधरी
सना यूपी के गाजियाबाद की रहने वाली हैं. सना ने हाईटेक इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है. पढ़ाई के साथ-साथ कंटेंट ऑप्टिमाईजेशन और वीडियो एडिटिंग भी सीखा है. जिसके बाद सना ने अलग-अलग जगहों पर डिजिटल कॉन्टेंट राइटर और वीडियो एडिटर के तौर पर काम किया. इससे पहले सना Zee मीडिया में बतौर वीडियो और कंटेंट एडिटर काम कर चुकी हैं. उन्होंने जी न्यूज में सोशल मीडिया पेज मैनेज किया है. Zee के बाद सना ने टीवी9 भारतवर्ष की वेबसाइट TV9hindi.com में बतौर ट्रेनी ज्वाइन किया. सना को न्यूज़ एंकरिंग का भी शौक है.
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