Anant Chaturdashi 2026: 25 सितंबर को होगा गणपति विसर्जन। जानें बप्पा को विदाई देते समय मूर्ति का मुख किस दिशा में रखना माना जाता है शुभ।
Ganpati Visarjan
- Published: 20 Sep 2026, 09:03 AM IST
- Last Updated: 20 Sep 2026, 09:03 AM IST
गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश की स्थापना और पूजा-अर्चना के बाद विसर्जन के साथ संपन्न होता है। भक्त कई दिनों तक बप्पा की आराधना करते हैं और फिर पूरे सम्मान के साथ उन्हें विदाई देते हैं। इस दौरान पूजा-पाठ से जुड़े कई नियमों और परंपराओं का ध्यान रखा जाता है।
पंचांग के अनुसार, साल 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई गई, जबकि अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को है। इसी दिन मुख्य गणपति विसर्जन होगा। हालांकि, कई जगहों पर डेढ़ दिन, तीसरे, पांचवें और सातवें दिन भी विसर्जन करने की परंपरा है।
ऐसे में भक्तों के मन में अक्सर सवाल आता है कि बप्पा को विसर्जन के लिए ले जाते समय उनकी मूर्ति का मुख किस दिशा में होना चाहिए। आइए जानते हैं इससे जुड़ी प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के बारे में।
गणपति विसर्जन के समय किस दिशा में रखें बप्पा का मुख?
प्रचलित परंपराओं के अनुसार, गणपति विसर्जन के समय मूर्ति का मुख भक्तों की ओर या उत्तर दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर से जोड़ा जाता है। इसे ज्ञान और सकारात्मकता से संबंधित दिशा भी माना जाता है।
हालांकि, गणपति विसर्जन के समय मूर्ति का मुख किसी एक निश्चित दिशा में रखना सभी के लिए अनिवार्य शास्त्रीय नियम नहीं माना जा सकता। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में विसर्जन की अलग-अलग परंपराएं प्रचलित हैं।
गणपति विसर्जन से पहले करें ये काम
गणपति बप्पा को विदाई देने से पहले भक्त अपनी परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना कर सकते हैं। इस दौरान इन बातों का ध्यान रखें:
- विसर्जन से पहले भगवान गणेश की विधिवत पूजा और आरती करें।
- बप्पा को फल, मोदक या अपनी परंपरा के अनुसार भोग लगाएं।
- परिवार के सभी सदस्य सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना कर सकते हैं।
- गणेश प्रतिमा को उठाते समय जल्दबाजी न करें और सम्मानपूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाएं।
- मूर्ति के साथ लगी ऐसी सजावटी सामग्री, जो पानी में नहीं घुलती, उसे विसर्जन से पहले अलग कर दें।
- घर पर मिट्टी की छोटी गणेश प्रतिमा का विसर्जन कर रहे हैं, तो साफ पानी से भरे पात्र का इस्तेमाल किया जा सकता है।
क्या गणपति विसर्जन के लिए दिशा का नियम अनिवार्य है?
गणपति विसर्जन की दिशा को लेकर अलग-अलग मान्यताएं और परंपराएं प्रचलित हैं। लेकिन हर दिशा से जुड़े नियम को शास्त्रों का अनिवार्य विधान नहीं माना जाना चाहिए।
यदि आपके परिवार में गणपति विसर्जन के समय किसी विशेष दिशा या विधि का पालन लंबे समय से किया जा रहा है, तो उस परंपरा के अनुसार विसर्जन कर सकते हैं। बप्पा को विदाई देते समय श्रद्धा, सम्मान और स्वच्छता का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।
25 सितंबर को होगा मुख्य गणपति विसर्जन
साल 2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को मनाई जाएगी। इसी दिन गणपति विसर्जन का प्रमुख पर्व होगा। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, चतुर्दशी तिथि 25 सितंबर की रात करीब 11 बजकर 06 मिनट तक रहेगी।
इस दिन भक्त भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर उन्हें विदाई देंगे और अगले वर्ष फिर से आने की कामना करेंगे।