Aja Ekadashi 2026: 7 सितंबर को अजा एकादशी मनाई जाएगी। जानें भगवान विष्णु के हृषिकेश स्वरूप की पूजा क्यों होती है और ऋषिकेश नाम से जुड़ी पौराणिक कथा क्या है।
Aja Ekadashi 2026
- Published: 06 Sep 2026, 08:38 AM IST
- Last Updated: 06 Sep 2026, 08:38 AM IST
Aja Ekadashi 2026: सनातन धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। साल में आने वाली सभी एकादशियों में अजा एकादशी का भी विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
अजा एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा तो की ही जाती है, लेकिन इस दिन भगवान विष्णु के हृषिकेश स्वरूप की आराधना का भी महत्व बताया गया है। हृषिकेश नाम अपने आप में भगवान के उस स्वरूप की ओर संकेत करता है, जो मनुष्य की इंद्रियों पर नियंत्रण का संदेश देता है।
क्या है भगवान विष्णु का हृषिकेश स्वरूप?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, ‘हृषिक’ का संबंध इंद्रियों से और ‘ईश’ का अर्थ स्वामी से माना जाता है। इस तरह हृषिकेश का अर्थ हुआ—इंद्रियों के स्वामी।
भगवान विष्णु के इस स्वरूप को आत्मसंयम और इंद्रियों पर नियंत्रण से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि हृषिकेश स्वरूप की कथा केवल भगवान के दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को अपनी इंद्रियों और इच्छाओं पर नियंत्रण रखने का संदेश भी देती है।
रैभ्य ऋषि की तपस्या से जुड़ी है कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में रैभ्य ऋषि ने गंगा के तट पर भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। ऋषि की साधना का उद्देश्य भगवान के दर्शन प्राप्त करना और अपनी इंद्रियों पर विजय हासिल करना था।
लंबे समय तक कठिन तप और साधना करने के बाद भगवान विष्णु रैभ्य ऋषि से प्रसन्न हुए। इसके बाद उन्होंने ऋषि को हृषिकेश स्वरूप में दर्शन दिए। भगवान के इस स्वरूप को इंद्रियों के स्वामी के रूप में जाना गया।
ऋषि ने भगवान से मांगा था यह वरदान
कहा जाता है कि भगवान विष्णु के दर्शन होने के बाद रैभ्य ऋषि ने उनसे एक विशेष वरदान मांगा। ऋषि की इच्छा थी कि भगवान इसी पवित्र स्थान पर निवास करें, ताकि भविष्य में यहां आने वाले भक्तों को भी भगवान के दर्शन और उनकी कृपा मिल सके।
भगवान विष्णु ने ऋषि की प्रार्थना स्वीकार की और इस स्थान पर हृषिकेश नारायण के रूप में रहने का वर प्रदान किया। इसी मान्यता को ऋषिकेश की धार्मिक पहचान से जोड़कर देखा जाता है।
झुके हुए आम के पेड़ से भी जुड़ी है मान्यता
इस कथा का एक उल्लेख स्कंद पुराण से जुड़ी मान्यता में भी मिलता है। कहा जाता है कि भगवान विष्णु एक झुके हुए आम के पेड़ के नीचे प्रकट हुए थे। इस वजह से इस क्षेत्र को कुब्जाम्रक नाम से भी जाना गया।
समय के साथ भगवान के हृषिकेश स्वरूप से जुड़े इस स्थान का नाम हृषिकेश और फिर ऋषिकेश के रूप में प्रसिद्ध होने की मान्यता है। इस तरह ऋषिकेश की धार्मिक पहचान को भगवान विष्णु और रैभ्य ऋषि की तपस्या से जोड़ा जाता है।
श्री भरत मंदिर का भी है धार्मिक संबंध
ऋषिकेश का प्रसिद्ध श्री भरत मंदिर भी इसी धार्मिक परंपरा से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि मंदिर में भगवान हृषिकेश नारायण की चार भुजाओं वाली प्रतिमा विराजमान है। यही वजह है कि ऋषिकेश को केवल योग और गंगा के लिए ही नहीं, बल्कि भगवान विष्णु की इस पौराणिक परंपरा के लिए भी महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है।
अजा एकादशी पर क्या करें?
अजा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा है। पूजा के दौरान इन बातों का ध्यान रखा जा सकता है
भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को साफ चौकी पर स्थापित करें।
भगवान को तुलसी दल अर्पित करें।
पीले फूल चढ़ाना शुभ माना जाता है।
भगवान विष्णु को फल और अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित करें।
केसर की खीर या पंजीरी का भोग लगाया जा सकता है।
पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
भगवान विष्णु के हृषिकेश स्वरूप का ध्यान करते हुए संयम और सदाचार का संकल्प लें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अजा एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु की पूजा भक्त के जीवन में सकारात्मकता, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक शांति लाने वाली मानी जाती है। हालांकि पूजा-व्रत की विधि और मान्यताएं अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकती हैं।