Khandwa News: मध्य प्रदेश के खंडवा में एक व्यक्ति कुत्ते का भेष रखकर एडीएम के ऑफिस पहुंच गया, वहां जनसुनवाई कार्यक्रम चल रहा था. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. आइए जानते हैं कि क्या है पूरा मामला...
Khandwa News: मध्य प्रदेश के खंडवा में एक व्यक्ति कुत्ते का भेष रखकर एडीएम के ऑफिस पहुंच गया, वहां जनसुनवाई कार्यक्रम चल रहा था. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. आइए जानते हैं कि क्या है पूरा मामला...
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Khandwa Video viral
Khandwa News: आए दिन देशभर में कई अनोखे प्रदर्शन देखने को मिलते रहते हैं. ऐसा ही कारनामा एक बार फिर मध्य प्रदेश में देखने को मिला है. मप्र के खंडवा में एक व्यक्ति कुत्ते का भेष रखकर एडीएम के ऑफिस पहुंच गया, वहां जनसुनवाई कार्यक्रम चल रहा था. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. आइए जानते हैं कि क्या है पूरा मामला...
दरअसल, मध्य प्रदेश के खंडवा में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष दीपक मुल्लू राठौर ने अनोखे अंदाज में प्रशासन का ध्यान खींचने की कोशिश की. शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए वह 18 अगस्त को एक युवक को कुत्ते की वेशभूषा और मास्क पहनाकर कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में पहुंच गए. घटना जरूर कल की है लेकिन अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है.
खंडवा, मध्य प्रदेश
खंडवा में आवारा कुत्तों के आतंक के विरोध में अनोखा प्रदर्शन, कुत्ते को देखने उमड़ी अधिकारियो औऱ स्थानीय लोगों की भीड़
शहर में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक के विरोध में कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई में एक व्यक्ति को कुत्ते का कॉस्ट्यूम पहनकर पहुंचा pic.twitter.com/KWo2erTvC0
— Gaurav Kumar (@gaurav1307kumar) August 18, 2026
क्यों अपनाया ये तरीका?
नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से लोग परेशान हैं. स्थानीय लोगों की ओर से लगातार शिकायतें किए जाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है. इसी मुद्दे को प्रशासन के सामने अलग अंदाज में रखने के लिए उन्होंने युवक को कुत्ते का रूप देकर जनसुनवाई में पहुंचाया. कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद युवक ने कुत्ते का मास्क पहना हुआ था और उसे लेकर नेता प्रतिपक्ष प्रशासनिक अधिकारियों की टेबल तक पहुंचे. इस दौरान उन्होंने आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया और कार्रवाई की मांग की.
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खंडवा में 13 हजार से ज्यादा डॉग बाइट के मामले
खंडवा में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनकी नसबंदी के नाम पर खर्च किए गए लाखों रुपये को लेकर नगर निगम पर सवाल उठे हैं. मामले को लेकर एक शख्स अनोखे अंदाज में डॉगी की ड्रेस पहनकर जनसुनवाई में पहुंच गया. उसने आरोप लगाया कि कुत्तों की नसबंदी के नाम पर करीब 40 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद शहर में आवारा कुत्तों की संख्या कम नहीं हुई.
राठौर का आरोप है कि पिछले चार वर्षों में नगर निगम ने कुत्तों की नसबंदी पर करीब 40 लाख रुपये खर्च किए। इसके बावजूद आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ती गई. उन्होंने दावा किया कि इस दौरान शहर में कुत्तों के काटने की 13,225 घटनाएं सामने आई हैं.
जनसुनवाई में कसा व्यंग्य
जनसुनवाई में राठौर ने व्यंग्य करते हुए कहा कि जिस डॉगी की नसबंदी कराई गई थी, वह बाद में छह बच्चों का पिता बन गया. इस उदाहरण के जरिए उन्होंने नसबंदी के काम में कथित अनियमितता और फर्जीवाड़े का मुद्दा उठाया. उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की.
डॉगी की ड्रेस पहनकर जनसुनवाई में पहुंचे व्यक्ति को शुरुआत में कलेक्टर सभागृह के बाहर पुलिसकर्मियों ने रोकने की कोशिश की. बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद उसे अंदर जाने दिया गया. उसे इस रूप में देखकर वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए और कुछ देर माहौल हल्का-फुल्का हो गया. हालांकि, शिकायत के मुद्दे को अधिकारियों ने गंभीरता से सुना.
क्या बोले ADM?
एडिशनल कलेक्टर काशीराम बड़ोले ने नगर निगम आयुक्त से मामले पर चर्चा की. उन्होंने बताया कि कुत्तों के बधियाकरण के नाम पर करीब 40 लाख रुपये के बिल निकाले जाने और काम नहीं होने की शिकायत मिली है. मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की जाएगी और जांच के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई होगी.
खंडवा में करीब 10 हजार आवारा कुत्ते
नगर निगम के अनुसार खंडवा शहर में करीब 10 हजार आवारा कुत्ते हैं. इनके कारण डॉग बाइट की घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं. आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में 3,961 लोग कुत्तों के काटने का शिकार हुए थे. वहीं, वर्ष 2026 में जुलाई तक 2,463 लोगों के घायल होने के मामले सामने आ चुके हैं. हालांकि, दोनों वर्षों में कुत्ते के काटने से किसी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है. अब नसबंदी के नाम पर हुए खर्च और काम की वास्तविक स्थिति की जांच के लिए कमेटी गठित किए जाने की बात कही गई है. इसकी रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायतों में लगाए गए आरोप कितने सही हैं.
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