Published: Monday, September 21, 2026, 14:55 [IST]
Actress Mithu Mukherjee Death: बंगाली सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री मिठू मुखर्जी का 71 साल की उम्र में निधन हो गया। वह करीब एक साल से कैंसर से जूझ रही थीं। रविवार (21 सितंबर) रात मुंबई के एक निजी अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली। लंबे समय से मुंबई में रह रहीं मिठू मुखर्जी 1970 और 1980 के दशक में बंगाली फिल्म इंडस्ट्री का चर्चित चेहरा थीं।
उनके निधन की खबर से बंगाली सिनेमा में शोक की लहर है। अभिनेत्री ने अपने करियर में उत्तम कुमार, सौमित्र चट्टोपाध्याय और रंजीत मल्लिक जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया था। आइए जानते हैं कि कैसे हुई मिठू मुखर्जी की मौत?
मिठू मुखर्जी पिछले करीब एक साल से कैंसर का इलाज करा रही थीं। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बीच उन्हें मुंबई के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां रविवार रात उनका निधन हो गया। रिपोर्टों के मुताबिक, इलाज के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और 71 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। अभिनय से लंबे समय पहले दूरी बना चुकीं मिठू मुखर्जी पिछले कई वर्षों से सार्वजनिक जीवन से भी दूर थीं। यही वजह है कि उनके निधन की खबर सामने आने के बाद उनके कई प्रशंसकों को उनके बारे में दोबारा जानने की उत्सुकता हुई।
17 साल की उम्र में शुरू किया था फिल्मी सफर
मिठू मुखर्जी का जन्म 1955 में कोलकाता में हुआ था। उन्होंने महज 17 साल की उम्र में फिल्मों में कदम रखा। वर्ष 1972 में चित्त बोस की फिल्म 'शेष परबा' से उन्होंने अभिनय की शुरुआत की। इस फिल्म में वह अभिनेता शमित भंजा के साथ नजर आई थीं। शुरुआती दौर में ही उनके अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस ने दर्शकों का ध्यान खींचा और उन्हें बंगाली सिनेमा में आगे काम करने के मौके मिलने लगे।
'मरजीना अब्दुल्ला' से मिली बड़ी पहचान
मिठू मुखर्जी के करियर में बड़ा मोड़ दीनन गुप्ता की फिल्म 'मरजीना अब्दुल्ला' से आया। फिल्म में उन्होंने देबराज रॉय के साथ मुख्य भूमिका निभाई थी। इस फिल्म के बाद वह बंगाली सिनेमा में पहचाना जाने वाला नाम बन गईं। इसके बाद उन्होंने कई चर्चित फिल्मों में काम किया। उनकी फिल्मों में 'निशीकन्या', 'मौचक', 'कवि', 'होटल स्नो फॉक्स', 'प्रतिमा', 'बंधन', 'प्रार्थना' और 'स्वयंसिद्धा' जैसी फिल्में शामिल हैं।
उत्तम कुमार और सौमित्र चट्टोपाध्याय के साथ किया काम
मिठू मुखर्जी ने अपने दौर के कई बड़े बंगाली कलाकारों के साथ स्क्रीन साझा की। उन्होंने उत्तम कुमार, सौमित्र चट्टोपाध्याय और रंजीत मल्लिक जैसे कलाकारों के साथ काम किया। 1970 और 1980 के दशक में उनकी गिनती बंगाली सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्रियों में होती थी। उनकी फिल्मों में अभिनय के साथ-साथ उनकी स्क्रीन प्रेजेंस को भी दर्शकों ने पसंद किया।
हिंदी फिल्मों में भी आजमाया हाथ
मिठू मुखर्जी ने सिर्फ बंगाली सिनेमा तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी काम किया। साल 1976 में दुलाल गुहा की फिल्म 'खान दोस्त' से उन्होंने हिंदी सिनेमा में डेब्यू किया। इसके बाद वह 'सफेद झूठ', 'दिल्लगी' और 'दो लड़के दोनों कड़के' जैसी फिल्मों में नजर आईं।'सफेद झूठ' का निर्देशन बासु चटर्जी ने किया था। इस तरह मिठू मुखर्जी ने बंगाली और हिंदी, दोनों फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई।
1980 के दशक के बाद फिल्मों से बनाई दूरी
मिठू मुखर्जी ने 1980 के दशक में 'दुजाने' जैसी फिल्मों में काम करने के बाद अभिनय से ब्रेक ले लिया। काफी समय तक बड़े पर्दे से दूर रहने के बाद उन्होंने 1990 में चंद्र बरोट की फिल्म 'आश्रिता' से वापसी की। हालांकि, यह वापसी लंबे समय तक नहीं चली। 'आश्रिता' ही उनके फिल्मी करियर की आखिरी फिल्म साबित हुई। इसके बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से पूरी तरह दूरी बना ली और निजी जिंदगी को प्राथमिकता दी।
आखिरी सालों में लाइमलाइट से दूर रहीं
'आश्रिता' के बाद मिठू मुखर्जी सार्वजनिक जीवन से लगभग गायब हो गई थीं। वह मुंबई में रहने लगीं और बेहद निजी जीवन जी रही थीं। उनकी बीमारी की जानकारी भी सार्वजनिक रूप से ज्यादा सामने नहीं आई। करीब एक साल तक कैंसर से जूझने के बाद रविवार रात उनका निधन हो गया।