अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (ABRSM) के प्रदेश उपाध्यक्ष व्यास ने स्कूलों में बाहरी हस्तक्षेप रोकने को लेकर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के निर्देशों का समर्थन किया है।
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उन्होंने कहा कि स्कूलों को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। स्कूलों का माहौल शिक्षा, अनुशासन और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए होना चाहिए, इसलिए बाहरी राजनीतिक या अन्य अनावश्यक हस्तक्षेप पर रोक लगाने के निर्देश सही और जरूरी कदम हैं।
सरकारी विद्यालयों में बिना अनुमित के बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने और जयपुर में कॉकरोच जनता पार्टी एवं ग्रामीणों के बीच हुए विवाद को लेकर शनिवार को अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
किसी भी परिस्थिति में हिंसा या मारपीट का समर्थन नहीं
संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव व्यास ने कहा कि शिक्षा के मंदिरों को किसी भी कीमत पर राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। विद्यालय बच्चों के भविष्य निर्माण के केंद्र हैं, राजनीतिक संघर्ष के नहीं।
जयपुर की घटना का उल्लेख करते हुए व्यास ने कहा कि मिली जानकारी के अनुसार, सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका के साथ कुछ बाहरी लोगों द्वारा एक सरकारी स्कूल में निरीक्षण के प्रयास का ग्रामीणों ने विरोध किया। इस दौरान विवाद बढ़ने और कथित रूप से गाली-गलौज एवं मारपीट की स्थिति उत्पन्न होने की जानकारी सामने आई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में हिंसा या मारपीट का समर्थन नहीं किया जा सकता, लेकिन यह सवाल भी गंभीर है कि राजनीतिक विवादों को सरकारी स्कूलों तक ले जाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।
महासंघ का मानना है कि किसी व्यक्ति या संगठन को किसी सरकारी स्कूल की व्यवस्था, सुविधाओं या शैक्षणिक स्थिति को लेकर आपत्ति है, तो इसके लिए शिक्षा विभाग और प्रशासन के निर्धारित माध्यम उपलब्ध हैं। विद्यालय परिसर में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना प्रवेश कर राजनीतिक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है।
विद्यालय में शिक्षा होगी, राजनीति नहीं
प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव व्यास ने कहा कि राजस्थान सरकार की ओर से विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। संसाधनों, शिक्षण व्यवस्था, अनुशासन और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की प्रक्रिया निरंतर जारी है। महासंघ ने कहा कि राजनीति करना लोकतांत्रिक अधिकार हो सकता है, लेकिन सरकारी स्कूलों को राजनीतिक संघर्ष का मंच बनाना स्वीकार्य नहीं है।
शिक्षकों को राजनीतिक दबाव या राजनीतिक गतिविधियों का हिस्सा बनाने का प्रयास शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है। शिक्षक विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए हैं, किसी राजनीतिक दल के एजेंडे के लिए नहीं।
सरकार के दिशा-निर्देशों का समर्थन
महासंघ ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर द्वारा शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में बाहरी एवं राजनीतिक हस्तक्षेप को नियंत्रित करने के लिए जारी दिशा-निर्देशों का उद्देश्य विद्यालयों को सुरक्षित, अनुशासित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है।
महासंघ ने स्पष्ट किया कि इन दिशा-निर्देशों का अर्थ किसी व्यक्ति को विद्यालय में प्रवेश से रोकना नहीं है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत संस्था प्रधान की अनुमति लेकर विद्यालय में प्रवेश किया जा सकता है। ऐसे में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बजाय सरकारी आदेशों को राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है।
राजनीतिक लाभ के लिए विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं
उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या संगठन को अपनी राजनीतिक गतिविधियों के लिए लोकतांत्रिक मंचों का उपयोग करना चाहिए। सरकारी स्कूलों में जाकर राजनीतिक टकराव पैदा करना विद्यार्थियों, शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था किसी के हित में नहीं है।
व्यास ने कहा कि यदि किसी विद्यालय की वास्तविक समस्याएं सामने आती हैं तो संगठन उनका समाधान कराने के लिए प्रशासन के समक्ष तथ्यात्मक और लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने के पक्ष में है। लेकिन विद्यालयों को राजनीतिक प्रचार, निरीक्षण या शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।