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राजस्थान: 87 लाख से अधिक वोटर तय करेंगे 18266 प्रत्याशियों का भाग्य, छह बड़े शहरों में भाजपा-कांग्रेस का टेस्ट

September 11, 2026

राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव का दूसरा और अंतिम चरण शुक्रवार यानी आज होगा। 87.60 लाख से ज्यादा मतदाता 147 निकायों के 4,774 वार्डों में 18,266 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे। इनमें जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर और पाली के छह नगर निगम भी शामिल हैं। मतदान सुबह 7 से शाम 6 बजे तक होगा।

दूसरा चरण आंकड़ों से ज्यादा राजनीतिक वजन के कारण अहम है। पहले चरण में 162 निकायों के 5,393 वार्डों में मतदान हुआ था, जबकि दूसरे चरण में वार्डों की संख्या कम है। लेकिन इसमें प्रदेश के सबसे बड़े शहरी केंद्र शामिल हैं। ऐसे में शुक्रवार का मतदान भाजपा और कांग्रेस के लिए शहरी राजस्थान में अपनी पकड़ परखने का बड़ा मौका है।

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जयपुर में 24.33 लाख से ज्यादा वोटर

दूसरे चरण का सबसे बड़ा चुनावी केंद्र जयपुर है। यहां 150 वार्डों में 723 प्रत्याशी मैदान में हैं। कुल 24,33,198 मतदाता मतदान करेंगे। इसके लिए 2,256 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें 2,204 मुख्य और 52 सहायक मतदान केंद्र शामिल हैं।

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राजधानी का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां के नतीजे सिर्फ नगर निगम की सत्ता तक सीमित नहीं रहेंगे। जयपुर का शहरी वोट प्रदेश सरकार के कामकाज और विपक्ष की स्थिति को लेकर भी राजनीतिक संकेत देगा।


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जोधपुर, कोटा समेत बड़े शहरों में मुकाबला
जोधपुर में 100 वार्डों के लिए 7.12 लाख से ज्यादा मतदाता वोट डालेंगे। कोटा में 100 वार्ड और 8.26 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। अजमेर में 80 वार्डों में 4.38 लाख, उदयपुर में 80 वार्डों में 4.16 लाख और पाली में 65 वार्डों में 1.81 लाख से ज्यादा मतदाता अपने प्रतिनिधि चुनेंगे।

इन छह निगमों के नतीजे भाजपा और कांग्रेस के लिए इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये प्रदेश के प्रमुख शहरी राजनीतिक केंद्र हैं। यहां का प्रदर्शन दोनों दलों के शहरी वोट बैंक, संगठन और स्थानीय नेतृत्व की ताकत का संकेत देगा।

भाजपा की चुनौती, कांग्रेस की उम्मीद
सत्तारूढ़ भाजपा दूसरे चरण में पहले चरण के मतदान के बाद बने माहौल और सरकार के चुनाव प्रचार के असर को भुनाने की कोशिश में है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर में रोड शो किए और पार्टी संगठन ने प्रत्याशियों के पक्ष में वोटों को एकजुट करने पर जोर दिया।

कांग्रेस के सामने भाजपा सरकार के खिलाफ कथित एंटी-इंकंबेंसी को वोट में बदलने की चुनौती है। कई वार्डों में बागी और निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनावी समीकरण बिगाड़ रहे हैं। खासकर करीबी मुकाबलों में इनका प्रदर्शन बोर्ड गठन के समय भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
 

छह शहरों में नेताओं की प्रतिष्ठा भी दांव पर
दूसरे चरण की खासियत यह भी है कि इसमें कई ऐसे शहर हैं, जिन्हें प्रदेश की राजनीति में बड़े नेताओं के प्रभाव क्षेत्र के तौर पर देखा जाता है। जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार और संगठन की शहरी पकड़ पर नजर रहेगी, तो जोधपुर में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के राजनीतिक प्रभाव की परीक्षा होगी।

कोटा में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शांति धारीवाल जैसे बड़े चेहरों का प्रभाव चर्चा में रहेगा। अजमेर में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी की राजनीतिक प्रतिष्ठा से चुनाव को जोड़कर देखा जा रहा है। पाली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का क्षेत्र है, जबकि उदयपुर में भाजपा के पुराने प्रभाव और कांग्रेस की चुनौती पर नजर रहेगी।

मतदान की तैयारियां पूरी
शुक्रवार के मतदान के लिए गुरुवार को शहरों में मतदान दलों और चुनाव सामग्री को निर्धारित केंद्रों से रवाना किया गया। जयपुर में जिला निर्वाचन अधिकारी (शहर) संदेश नायक के अनुसार मतदान दलों को सीकर रोड स्थित श्री भवानी निकेतन कॉलेज से रवाना किया गया। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगा। इसके बाद ईवीएम को निर्धारित स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखा जाएगा।

14 सितंबर को आएगा फैसला
पहले और दूसरे दोनों चरणों के पार्षद पदों के लिए मतगणना 14 सितंबर को सुबह 8 बजे से होगी। इसके बाद 21 सितंबर को मेयर और सभापति पदों के लिए चुनाव होगा। 22 सितंबर को डिप्टी मेयर, डिप्टी चेयरमैन और उपाध्यक्ष पदों के चुनाव होंगे।

9 सितंबर को हुए पहले चरण में 162 शहरी निकायों के 5,393 वार्डों में 20,623 प्रत्याशी मैदान में थे। इस चरण में 57.52 लाख मतदाताओं में से 41 लाख से ज्यादा ने वोट डाला था और मतदान प्रतिशत 76.41% रहा। अब दूसरे चरण की बारी है। वार्ड भले कम हों, लेकिन बड़े शहरों का वोट ज्यादा है और राजनीतिक दांव भी बड़ा। शुक्रवार का मतदान यह संकेत देगा कि शहरी राजस्थान में भाजपा की पकड़ कितनी मजबूत है और कांग्रेस वापसी के लिए कितनी जमीन तैयार कर पाई है।