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862 शिक्षकों को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर छठे-सातवें वेतन आयोग का बकाया एरियर मिलेगा

September 23, 2026

चंडीगढ़ (उत्तम हिन्दू न्यूज): सुप्रीम कोर्ट द्वारा 21 अप्रैल को दिए गए ऐतिहासिक फैसले के अनुपालन में स्कूल शिक्षा विभाग ने अपने 862 कार्यरत शिक्षकों को छठे और सातवें वेतन आयोग का बकाया एरियर जारी करने के निर्देश दिए हैं। बुधवार को स्कूल शिक्षा विभाग के निदेशक नीतीश सिंगला ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए। शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद करीब एक दशक से कानूनी लड़ाई लड़ रहे शिक्षकों को बड़ी वित्तीय और मानसिक राहत मिली है।

2015 की शिक्षक भर्ती पर पेपर लीक का साया और कानूनी जंग
स्कूल शिक्षा विभाग ने अगस्त 2015 में एनटीटी (NTT), जेबीटी (JBT) और टीजीटी (TGT) के 1149 पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया पूरी की थी। हालांकि, मई 2017 में भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने का मामला सामने आने के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया था। प्रशासन के इस एकतरफा फैसले के खिलाफ चयनित शिक्षकों ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) में याचिका दायर की, जहां प्रशासन के आदेश पर रोक लगा दी गई।

कैट के स्थगन आदेश के खिलाफ शिक्षा विभाग पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। लंबी कानूनी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 21 अप्रैल को शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए भर्ती को बहाल रखने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासन पेपर लीक के मामले में कोई भी ठोस सबूत या गवाह पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा है।

1 जनवरी 2016 से छठा और 1 अप्रैल 2022 से सातवां वेतन आयोग लागू
स्कूल शिक्षा विभाग के निदेशक द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, सभी 862 पात्र शिक्षकों को 1 जनवरी 2016 से छठे वेतन आयोग के तहत संशोधित वेतनमान का एरियर जारी किया जाएगा। इसके अलावा, 1 अप्रैल 2022 से शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग का पूरा लाभ और बकाया भुगतान मिलेगा। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को वित्तीय गणना पूरी कर जल्द से जल्द राशि जारी करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

जांच में फंसे 52 उम्मीदवारों को नहीं मिली कोई राहत
पेपर लीक मामले की पुलिस जांच के दौरान शुरुआत में तीन और बाद में 49 अन्य अभ्यर्थियों के नाम संदिग्ध के तौर पर सामने आए थे। कैट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट—तीनों ही स्तरों पर इन 52 उम्मीदवारों को भर्ती में बहाल करने से साफ इनकार कर दिया गया था। वहीं दूसरी तरफ, सालों तक खिंची कानूनी प्रक्रिया और अनिश्चितता के चलते कई चयनित शिक्षक दूसरे राज्यों में नौकरी करने चले गए या विदेश में बस गए। वर्तमान में विभाग में केवल 862 शिक्षक ही कार्यरत हैं, जिन्हें अब सरकार इस बहुप्रतीक्षित एरियर का भुगतान करने जा रही है।

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