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आमिर-जूही की 'टाइम मशीन' क्यों रह गई अधूरी? करण जौहर ने बताई फिल्म अटकने की वजह| Navbharat Live

July 21, 2026

आमिर-जूही की ‘टाइम मशीन’ क्यों रह गई अधूरी? करण जौहर ने बताई फिल्म अटकने की वजह

  • Written By:

    यति सिंह

Updated On: Jul 21, 2026 | 04:28 PM IST

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सार

Bollywood unreleased film Time Machine: फिल्ममेकर करण जौहर ने खुलासा किया है कि आमिर खान और जूही चावला स्टारर 'टाइम मशीन' धर्मा प्रोडक्शंस से कम कीमत मिलने के कारण हमेशा के लिए बंद हो गई।

Aamir Khan Time Machine movie

करण जौहर (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)

विस्तार

Aamir Khan Time Machine Film: 90 के दशक में बनने जा रही ‘टाइम मशीन’ भी एक ऐसी ही अनोखी फिल्म थी, जिसे लेकर दर्शकों और फिल्म इंडस्ट्री में भारी क्रेज था। फेमस डायरेक्टर शेखर कपूर और जाने-माने लेखक करण राजदान का यह ड्रीम प्रोजेक्ट भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया अध्याय लिख सकता था। इस साइंस-फिक्शन फिल्म में आमिर खान और जूही चावला को अहम भूमिकाओं के लिए चुना गया था। फिल्म की पटकथा, संगीत और स्टारकास्ट सब कुछ तय हो चुका था। इसके बावजूद यह प्रोजेक्ट केवल एक अधूरी कहानी बनकर रह गया।

इस महत्वाकांक्षी कहानी का विचार किसी व्यावसायिक सोच से नहीं, बल्कि दो दिग्गजों के निजी गम से निकला था। फिल्म ‘दुश्मनी’ पर साथ काम करने के दौरान डायरेक्टर शेखर कपूर और लेखक करण राजदान ने महज 6 महीने के अंतर में अपने माता-पिता को खो दिया था। इस गहरे शोक के बीच दोनों ने एक-दूसरे से इच्छा जताई कि काश वे अपने दिवंगत माता-पिता से एक बार फिर मिल पाते। इसी मानवीय भावना ने टाइम ट्रैवल पर आधारित एक अनूठी कहानी को जन्म दिया।

महाभारत के युद्ध में पहुंच जाता था अहम किरदार

फिल्म की पूरी कहानी आमिर खान के किरदार के इर्द-गिर्द रची गई थी। कहानी के अनुसार, अहम किरदार गलती से एक टाइम मशीन लेकर उड़ जाता है, जिसे चलाना उसे बिल्कुल नहीं आता था। जब उसकी आंख खुलती है, तो उसे चारों तरफ से भीषण युद्ध की आवाजें सुनाई देती हैं।

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इसी मोड़ पर भगवान श्रीकृष्ण की नजर उस पर पड़ती है। जब नायक हैरान होकर पूछता है कि यह सब क्या हो रहा है, तो भगवान उत्तर देते हैं कि यह महाभारत का युद्ध है। इस अनूठे और काल्पनिक दृश्य को लेकर पूरी टीम बेहद उत्साहित थी।

करण जौहर की पेशकश से हैरान रह गए लेखक

जब इस बेहतरीन कहानी को लेकर फिल्म मेकर्स से बातचीत शुरू हुई, तब धर्मा प्रोडक्शंस ने भी इसमें गहरी रुचि दिखाई। उस समय धर्मा में जुगल हंसराज कहानी विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। करण राजदान खुद करण जौहर को कहानी सुनाना चाहते थे, लेकिन उन्हें बताया गया कि निर्माता को स्क्रिप्ट पढ़ना ज्यादा पसंद है।

कुछ समय बाद जब मेकर की तरफ से कहानी के लिए महज 25 लाख रुपये की पेशकश की गई, तो करण राजदान हैरान रह गए। उन्हें लगा कि इतने बड़े और अनोखे विचार का सही मूल्य नहीं लगाया जा रहा है। इस कम कीमत के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी और यह प्रोजेक्ट वहीं रुक गया।

अन्य बड़े निर्माताओं की कोशिशो के बावजूद अटकी फिल्म

धर्मा प्रोडक्शंस के अलावा फिरोज नाडियाडवाला जैसे अन्य बड़े फिल्म मेकर ने भी इस प्रोजेक्ट को फिर से जीवित करने की कोशिश की थी। राकेश रोशन के घर पर ऋतिक रोशन की मौजूदगी में भी इस कहानी का नरेशन हुआ था।

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हालांकि, सबसे बड़ी अड़चन यह आई कि इस फिल्म का डायरेक्शन कौन करेगा। शेखर कपूर का मानना था कि राजदान को केवल लेखन पर ध्यान देना चाहिए, इसलिए वे डायरेक्शन नहीं कर सकते थे।

बाद में राजकुमार संतोषी के नाम पर भी विचार किया गया, लेकिन राजदान को लगा कि यह विषय उनकी शैली के अनुकूल नहीं है। इन तमाम उलझनों और मतभेदों के कारण यह बहुचर्चित फिल्म कभी ग्राउंड पर नहीं उतर पाई।

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