गिरिडीह के आस्था गांव के खुर्शीद अनवर हादी खेती के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन से सालाना 7 से 8 लाख रुपए कमा रहे हैं।
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वे अपने 4-5 एकड़ परिसर में देसी मुर्गा, पोल्ट्री, बकरी, बतख और मछली पालते हैं। साथ ही धान, आम, अमरूद और सब्जियां भी उगाते हैं।
खुर्शीद के परिवार में पहले सिर्फ धान और गेहूं की खेती होती थी। एनजीओ से जॉब छोड़ साल 2017 में उन्होंने मुर्गा, बतख, मछली और बकरी पालन शुरू कर अपने काम का विस्तार किया।

बतख के अंडों से सालाना करीब 2.70 लाख रुपए की कमाई होती है।
अंडे बेचकर सालाना करीब 3.60 लाख की कमाई वे 500 देसी मुर्गा-मुर्गी के चूजे पालते हैं। मुर्गों को 300 रुपये प्रति किलो बेचते हैं। मुर्गियां साल में 180 अंडे देती हैं। 200 मुर्गियों के अंडे बेचकर सालाना करीब 3.60 लाख रुपए की बिक्री होती है।
खुर्शीद 250 बतख भी पालते हैं। एक बतख 400 रुपए तक में बिकती है और अंडे 15 रुपए प्रति पीस। बतख के अंडों से सालाना करीब 2.70 लाख रुपए की कमाई होती है। खुर्शीद अनवर हादी दो से तीन तालाबों में मछली पालन भी करते हैं।

200 मुर्गियों के अंडे बेचकर सालाना करीब 3.60 लाख रुपए की बिक्री होती है।
करीब 8 से 9 क्विंटल मछली की बिक्री होती है इनमें मुख्य रूप से रोहू और कतला मछली का पालन किया जाता है। सालभर में करीब 8 से 9 क्विंटल मछली की बिक्री होती है। मछली की बिक्री लगभग 200 रुपए प्रति किलो की दर से की जाती है। इससे सालाना करीब 1.5 से 2 लाख रुपए की आमदनी होने की बात उन्होंने कही।
मछली पालन के साथ-साथ तालाबों का उपयोग अन्य कृषि गतिविधियों के लिए भी किया जाता है। परिसर में बकरी पालन भी किया जा रहा है। खुर्शीद के अनुसार, सालभर में करीब 20 बकरे और खस्सी तैयार कर बेचते हैं, जिससे लगभग 2 लाख रुपए की आमदनी होती है।
इसके अलावा, खेतों में धान, आम, अमरूद और कई प्रकार की मौसमी सब्जियों की खेती की जाती है। खेती और पशुपालन को एक साथ संचालित करने से उन्हें आय के अलग-अलग स्रोत मिल रहे हैं।

खुर्शीद सालभर में करीब 20 बकरे और खस्सी तैयार कर बेचते हैं, जिससे लगभग 2 लाख रुपए की आमदनी होती है।
इसे और बड़े पैमाने पर करने की तैयारी खुर्शीद अनवर हादी बताते हैं कि पशुपालन और खेती के काम को बड़े स्तर पर शुरू करने से पहले वह एक एनजीओ में काम करते थे। इस दौरान सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे और दो से तीन वर्ष की विभिन्न परियोजनाओं में भी काम किया।
उन्होंने कहा कि चार से पांच एकड़ में फैले परिसर में विभिन्न प्रकार के पालन और खेती का काम किया जा रहा है। सभी गतिविधियों को मिलाकर सालाना करीब 7 से 8 लाख रुपए की कमाई हो जाती है। इस वर्ष इसे और बड़े पैमाने पर करने की तैयारी है।