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संयुक्त युद्धाभ्यास में एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोप का प्रदर्शन | M-777 Ultra Light Howitzer Gun Displayed in Joint Exercise

September 16, 2026

नई दिल्ली, भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्धाभ्यास’ चल रहा है। बुधवार को इस सैन्य अभ्यास में एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोप को लेकर विशेष गतिविधियां आयोजित की गई। दोनों सेनाओं का यह अभ्यास 16 सितंबर को राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में हुआ। यहां एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर की तैनाती से जुड़ी गतिविधियां रहीं।

इस दौरान दोनों देशों के सैन्य कर्मियों ने तोप की तैनाती और संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का प्रदर्शन किया। गतिविधि के तहत एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर की दिन के समय तैनाती पर व्याख्यान व प्रदर्शन किया गया। इसमें सैन्य कर्मियों की जिम्मेदारियों, तोप की तैनाती की प्रक्रिया और स्थानीय रक्षा के समन्वय से जुड़े पहलुओं को समझाया गया। प्रदर्शन के दौरान जवाबी गोलाबारी की स्थिति में वैकल्पिक स्थानों पर स्थानांतरण की प्रक्रिया पर भी ध्यान दिया गया।

इसके साथ ही ‘शूट एंड स्कूट’ अभ्यास किया गया। इस प्रक्रिया में निर्धारित कार्रवाई के बाद तोप को तेजी से उसकी स्थिति से हटाने की क्षमता पर जोर दिया जाता है। इस गतिविधि ने भारतीय और अमेरिकी सेना के जवानों को एक-दूसरे के अनुभवों और कार्यप्रणालियों को समझने का अवसर दिया। दोनों पक्षों के सैन्य कर्मियों के बीच संवाद हुआ और सैन्य अभियानों से जुड़े बेहतर तौर-तरीकों का आदान-प्रदान किया गया।

गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच युद्ध अभ्यास का 22वां संस्करण मंगलवार को शुरू हुआ है। यह अभ्यास उत्तराखंड के बर्फीले पहाड़ी क्षेत्र औली से लेकर राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज तक एक साथ जारी है। अभ्यास में भारत और अमेरिका के करीब 600-600 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं। इस अभ्यास में आधुनिक तकनीक भी केंद्र में है। सैनिक निगरानी और टोह लेने के लिए ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन किया जा रहा है। दोनों सेनाओं के विशेषज्ञ उभरती सैन्य तकनीकों और बहु-क्षेत्रीय युद्धकला में हो रहे बदलावों पर भी चर्चा कर रहे हैं। इस दौरान रणनीति, तकनीक और संचालन प्रक्रियाओं को साझा किया जा रहा है। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक इससे दोनों सेनाओं के बीच आपसी तालमेल और संयुक्त अभियानों की क्षमता को और मजबूती मिलेगी।