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दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन, 73 करोड़ की साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क का पर्दाफाश, 11 आरोपी गिरफ्तार

October 13, 2026

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की IFSO यूनिट ने अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इस गिरोह के तार कंबोडिया समेत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े मिले हैं. पुलिस जांच में आरोपियों का कनेक्शन देशभर की 78 साइबर क्राइम शिकायतों से सामने आया है, जिनमें करीब 73 करोड़ रुपये की रकम शामिल है.

राजधानी दिल्ली में साइबर अपराधियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को बड़ी कामयाबी मिली है. इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने डिजिटल अरेस्ट और निवेश के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा किया है. पुलिस ने अलग-अलग कार्रवाई में कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच में सामने आया है कि यह गिरोह विदेश में बैठे साइबर अपराधियों के इशारे पर भारत में बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करता था.

78 साइबर क्राइम शिकायतों से जुड़े आरोपियों के तार

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन से मिले टेलीग्राम और व्हाट्सऐप चैट की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. आरोपियों के तार देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज 78 साइबर क्राइम शिकायतों से जुड़े मिले हैं. इन शिकायतों में करीब 73 करोड़ रुपये की रकम शामिल है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और ठगी की रकम किन-किन बैंक खातों में भेजी गई.

79 साल के बुजुर्ग से 10.25 करोड़ रुपये की ठगी

जांच के दौरान आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में डिजिटल अरेस्ट के एक बड़े मामले का भी खुलासा हुआ. यहां 79 वर्षीय बुजुर्ग को साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाकर 10 करोड़ 25 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया था.

दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने संबंधित राज्य की पुलिस के साथ समन्वय कर तेजी से कार्रवाई की, जिसके चलते ठगी की रकम में से 7 करोड़ 25 लाख रुपये फ्रीज कर सुरक्षित कर लिए गए. इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट और इन्वेस्टमेंट फ्रॉड से जुड़े मामलों में HDFC और SBI बैंक खातों में 1 करोड़ 96 लाख रुपये होल्ड किए जाने की जानकारी भी सामने आई है.

द्वारका में छापेमारी, पांच आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की जांच के दौरान सूचना मिली थी कि द्वारका सेक्टर-7 के रामफल चौक इलाके में कुछ लोग एक बैंक खाते के जरिए साइबर ठगी से जुड़े लेनदेन को अंजाम दे रहे हैं.

इसके बाद IFSO यूनिट ने महामाया अपार्टमेंट में छापेमारी कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया. इनकी पहचान मोहम्मद महफुजर रहमान, इजहार आलम, अल्ताफ हुसैन, इंतेखाब और अनीश खान के रूप में हुई.

पुलिस के मुताबिक, आरोपी MR Traders के नाम पर खुले HDFC बैंक के करंट अकाउंट का इस्तेमाल संदिग्ध साइबर फ्रॉड ट्रांजैक्शन के लिए कर रहे थे.

मोबाइल में मिला खतरनाक SMS TOOLS ऐप

आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच के दौरान पुलिस को SMS TOOLS नाम का संदिग्ध APK एप्लिकेशन मिला. शुरुआती जांच में पता चला कि इस ऐप को मोबाइल पर आने वाले SMS और बैंकिंग OTP को अपने आप विदेश में बैठे साइबर अपराधियों तक पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता था.

पुलिस को मोबाइल फोन से टेलीग्राम चैट, व्हाट्सऐप बातचीत और क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन से जुड़े डिजिटल सबूत भी मिले हैं. जांच में सात ऐसे टेलीग्राम चैनलों की पहचान हुई है, जिनके जरिए म्यूल बैंक खातों की खरीद-फरोख्त की जा रही थी.

5.5 प्रतिशत कमीशन पर काम करता था मुख्य हैंडलर

दिल्ली पुलिस की जांच में अनीश खान की भूमिका कथित मुख्य हैंडलर के रूप में सामने आई है. पुलिस के अनुसार, वह टेलीग्राम के जरिए विदेश में बैठे साइबर अपराधियों के संपर्क में था.

आरोप है कि अनीश खान साइबर ठगी के लिए बैंक खातों के संचालन और लेनदेन में मदद करता था. इसके बदले उसे 5.5 प्रतिशत कमीशन मिलता था. यह कमीशन USDT यानी क्रिप्टोकरेंसी में लिया जाता था और बाद में अलग-अलग क्रिप्टो एक्सचेंज के जरिए भारतीय रुपये में बदल दिया जाता था.

पुलिस के मुताबिक, अनीश खान का पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और उसे शाहदरा साइबर पुलिस स्टेशन के एक मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है.

रिटायर्ड सरकारी अधिकारी को भी बनाया निशाना

दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के 69 वर्षीय रिटायर्ड अधिकारी प्रदीप कुमार दास भी डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी का शिकार हुए थे.

पुलिस के मुताबिक, 14 अगस्त 2026 को आरोपियों ने खुद को दिल्ली पुलिस, ATS और NIA का अधिकारी बताकर उन्हें फोन किया. आरोपियों ने दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में हुआ है और उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है.

इसके बाद फंड वेरिफिकेशन के नाम पर उनसे बैंक खातों की जानकारी हासिल की गई और 1 करोड़ 25 लाख 9 हजार रुपये तीन बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए गए. आरोपियों ने वीडियो कॉल के जरिए उन पर निगरानी भी रखी.

निवेश के नाम पर भी लाखों रुपये की ठगी

इस नेटवर्क के तार पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर में दर्ज 21 लाख रुपये के निवेश धोखाधड़ी मामले से भी जुड़े मिले हैं. पीड़ित को ज्यादा मुनाफे का लालच देकर निवेश कराया गया था. ठगी की रकम MR Traders के बैंक खाते में पहुंची थी, जिसमें से करीब पांच लाख रुपये खाता फ्रीज होने से पहले दूसरे खातों में ट्रांसफर हो चुके थे.

इसके अलावा दिल्ली में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 77 लाख रुपये की ठगी के एक अन्य मामले से भी आरोपियों का संबंध सामने आया है.

विदेशी हैंडलर्स की तलाश में जुटी स्पेशल सेल

दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने आरोपियों के कब्जे से छह मोबाइल फोन, बैंक चेकबुक और साइबर अपराध से जुड़े डिजिटल सबूत बरामद किए हैं. IFSO यूनिट के DCP गौरव त्यागी के मुताबिक, पूरे नेटवर्क की जांच जारी है. पुलिस विदेशी हैंडलर्स, म्यूल बैंक खातों, क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है.