world-news

उर्स-ए-सकलैनी में गणेश चतुर्थी पर सौहार्द की मिसाल: चादरें जुलूस के बजाय निजी वाहनों से पहुंचीं, महाराष्ट्र-गुजरात से 700 जायरीन बरेली आए - Bareilly News

September 15, 2026

उर्स-ए-सकलैनी में गणेश चतुर्थी पर सौहार्द की मिसाल:चादरें जुलूस के बजाय निजी वाहनों से पहुंचीं, महाराष्ट्र-गुजरात से 700 जायरीन बरेली आए

शशांक राठौर | बरेली29 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

बरेली में गणेश चतुर्थी के बीच चल रहे तीसरे सालाना उर्स-ए-सकलैनी में मंगलवार को आपसी भाईचारे की मिसाल देखने को मिली। पुलिस-प्रशासन और दरगाह इंतजामिया की अपील पर इस बार चादरों के जुलूस नहीं निकाले गए। जायरीन निजी वाहनों से खानकाह पहुंचे और परिसर में चादर खोलकर मजार-ए-पाक पर पेश की। उर्स के तीसरे दिन महाराष्ट्र और गुजरात से करीब 700 जायरीन का सकलैनी कारवां भी बरेली पहुंचा।

खानकाह-ए-सकलैनिया शराफतिया में मंगलवार को सुबह नमाज-ए-फज्र के बाद कुरआन ख्वानी हुई। इसके बाद खानकाह शरीफ में फातिहा पढ़ी गई और जायरीन के लिए लंगर चला। देश के अलग-अलग हिस्सों से जायरीन दिनभर पहुंचते रहे और मजार-ए-पाक पर चादर पेश कर दुआ करते रहे।

गणेश चतुर्थी को देखते हुए इस बार उर्स में चादरों के जुलूस नहीं निकाले गए। दरगाह इंतजामिया ने जायरीन से प्रशासन की अपील मानने और जुलूस के रूप में चादर न लाने को कहा था। इसके बाद जायरीन निजी वाहनों से खानकाह पहुंचे और परिसर में चादर खोलकर मजार-ए-पाक पर चढ़ाई। इंतजामिया ने इसे शहर में भाईचारा और सौहार्द बनाए रखने में सहयोग बताया।

महाराष्ट्र और गुजरात से करीब 700 जायरीन का सकलैनी कारवां मंगलवार दोपहर करीब 3:30 बजे लोकमान्य तिलक-दादर एक्सप्रेस से बरेली जंक्शन पहुंचा। जायरीन हनीफ वडाला सकलैनी, फैसल बकरानी, सादिक मुछाडा, एहसन सईद, अफजल सकलैनी, नौशाद सकलैनी, जाफर सकलैनी, डॉ. इमरान सकलैनी, उवैस सकलैनी और सूफियान सकलैनी के नेतृत्व में आए थे। सफर के दौरान जायरीन दुरूद शरीफ, तस्बीह और जिक्र-ए-इलाही करते रहे। कारवां के साथ मेडिकल सुविधा भी थी।

बरेली जंक्शन पहुंचने पर मुहिब्बाने गाजी-ओ-सकलैनी फाउंडेशन ने कैंप लगाकर कारवां का स्वागत किया। आमिर सकलैनी, मोहसिन आलम, शाबेज सकलैनी, राशिद सकलैनी, मुशाहिद सकलैनी, खुर्रम सकलैनी, सय्यद राशिद, फैसल सकलैनी, राजा सकलैनी, डॉ. समीर, फेमी सकलैनी, अब्बास सकलैनी, जमील सकलैनी और आरिफ सकलैनी ने व्यवस्था में मदद की।

मंगलवार रात नमाज-ए-इशा के बाद दीवानखाना चौक, दरगाह परिसर में तकरीरी कार्यक्रम हुआ। इसमें खिदमत-ए-खल्क (मानव सेवा) पर जोर दिया गया।

.