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यमुनानगर में फॉरेस्ट ऑफिस के गेट पर किसानों का धरना: 70 गायों को बंधक बनाने का आरोप; विभाग बोला-पौधों को नुकसान पहुंचाने पर पकड़ीं - Yamunanagar News

August 30, 2026

साढौरा फॉरेस्ट रेंज कार्यालय के गेट के बाहर गायों को बंद करने के विरोध में धरने पर बैठे भाकियू चढ़ूनी ग्रुप के पदाधिकारी व किसान।

यमुनानगर के साढौरा में रविवार देर शाम गायों को लेकर फॉरेस्ट विभाग और किसानों के बीच विवाद खड़ा हो गया। आरोप है कि चरवाहों की करीब 70 गायों को फॉरेस्ट कर्मचारियों द्वारा परिसर में बंद किर दिया गया, जिसकी सूचना पर भारतीय किसान यूनियन (BKU) चढ़ूनी ग्रुप

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गायों को बाहर नहीं निकालने और फॉरेस्ट कार्यालय का गेट बंद रखने से नाराज किसान वहीं पर दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए। किसानों ने आरोप लगाया कि गायें दोपहर से बिना चारे-पानी के बंद हैं। वहीं, चरवाहों ने फॉरेस्ट कर्मचारियों पर लाठी से मारकर भगाने और एक गाय की टांग तोड़ने तक के आरोप लगाए हैं।

दूसरी ओर, फॉरेस्ट विभाग का कहना है कि गायों ने विभाग द्वारा लगाए गए पौधों को नुकसान पहुंचाया था, इसलिए उन्हें पकड़ा गया।

फॉरेस्ट परिसर में बंद गायों और बाहर धरने पर बैठे किसानों के बीच विवाद के दौरान मौके पर मौजूद पुलिस।

फॉरेस्ट परिसर में बंद गायों और बाहर धरने पर बैठे किसानों के बीच विवाद के दौरान मौके पर मौजूद पुलिस।

लंबे समय भूखा-प्यासा रखने का आरोप

भाकियू नेता संजीव सैनी के अनुसार, रविवार दोपहर उन्हें पता चला कि फॉरेस्ट रेंज कार्यालय में चरवाहों की बड़ी संख्या में गायें बंद हैं। सूचना मिलने पर वह अन्य किसानों के साथ वहां पहुंचे। उनका कहना है कि कार्यालय का गेट बंद था और विभाग की ओर से उनसे बातचीत करने के लिए कोई कर्मचारी बाहर नहीं आया। इसके बाद किसानों ने गेट के सामने ही धरना शुरू कर दिया।

सैनी ने कहा कि गायों को दोपहर करीब 2 बजे से बंद किए जाने की बात सामने आई है। शाम तक उन्हें बाहर नहीं निकाला गया। उन्होंने कहा कि पशुओं को इस तरह लंबे समय तक भूखा-प्यासा रखना उचित नहीं है। साथ ही शाम को गायों के दूध निकालने का समय होता है, लेकिन बंद होने के कारण पशुपालक ऐसा भी नहीं कर सके।

फॉरेस्ट रेंज कार्यालय परिसर में बंद की गई गायें, जिन्हें छुड़ाने की मांग को लेकर किसानों ने बाहर धरना दिया।

फॉरेस्ट रेंज कार्यालय परिसर में बंद की गई गायें, जिन्हें छुड़ाने की मांग को लेकर किसानों ने बाहर धरना दिया।

रिश्तेदार को देखने गए थे मालिक, पीछे से हुआ विवाद

गाय मालिक इसरान, गफूर और अकरम ने बताया कि वे साढौरा तहसील परिसर के पास यासीन माजरी नदी के दूसरी तरफ खाली जमीन पर डेरा लगाकर रहते हैं। वे रोजाना गायों को चराते हैं। रविवार को एक बीमार रिश्तेदार को देखने के लिए वे चंडीगढ़ पीजीआई गए थे। उनकी गैरमौजूदगी में दो युवकों को दिहाड़ी पर गायें चराने के लिए भेजा गया था।

उनका आरोप है कि दोपहर में फॉरेस्ट कर्मचारियों ने गायों को फॉरेस्ट भूमि में चरते हुए देखकर दोनों चरवाहों को लाठियां मारकर वहां से भगा दिया। इसके बाद गायों को पकड़कर फॉरेस्ट कार्यालय के अंदर कर दिया गया। चरवाहों ने आरोप लगाया कि इसी दौरान एक गाय की टांग भी टूट गई। उन्होंने कर्मचारियों से गायों को छोड़ने और पानी पिलाने की मांग की, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई।

साढौरा फॉरेस्ट रेंज कार्यालय के बाहर दरी बिछाकर धरना देते भाकियू चढ़ूनी ग्रुप के पदाधिकारी और किसान।

साढौरा फॉरेस्ट रेंज कार्यालय के बाहर दरी बिछाकर धरना देते भाकियू चढ़ूनी ग्रुप के पदाधिकारी और किसान।

फॉरेस्ट विभाग की सफाई- पौधों को खा गई थीं गायें

फॉरेस्ट दरोगा बलबीर ने बताया कि विभाग ने फॉरेस्ट भूमि में नए पौधे लगाए हुए हैं। विभाग का आरोप है कि चरवाहे गायों को वहां ले गए, जहां गायों ने पौधों को नुकसान पहुंचाया। इसी वजह से गायों को पकड़कर फॉरेस्ट परिसर में रखा गया।

बलबीर के मुताबिक, उन्होंने चरवाहों से आधार कार्ड देने को कहा था और पहचान संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराने के बाद गायों को छोड़ने की बात कही गई थी, लेकिन चरवाहों ने आधार कार्ड उपलब्ध नहीं करवाए। इसी को लेकर मामला बढ़ गया और किसान फॉरेस्ट कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।