बीकानेर में अंतरराष्ट्रीय स्तर की फायरिंग रेंज तैयार की जा रही है। साल 2028 में होने वाले ओलिंपिक खेलों को ध्यान में रखते हुए ये फैसला लिया गया है। सादुल क्लब परिसर में करीब 7 करोड़ रुपए की लागत से शूटिंग रेंज का काम लगभग पूरा हो चुका है। यहां निशाने
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क्लब अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ और सचिव एमपी सिंह सोइन ने बताया कि रेंज में ओलिंपिक मानकों के हिसाब से मशीनें लगाई जा रही हैं। इंग्लैंड की प्रोमेटिक कंपनी से मंगवाई गई 17 मशीनों में 15 ट्रैप और 2 स्कीट स्पर्धा के लिए हैं। इन्हें स्थापित करने के लिए इंग्लैंड से इंजीनियर केविन और जोस बीकानेर आए हैं। शुक्रवार को एशियाई गेम्स में हिस्सा ले चुके उद्धव सिंह हारासर ने डेमो शूटिंग करके भी दिखाई।

सार्दुल क्लब मैदान में नवनिर्मित शूटिंग रेंज।
करीब तीन बीघा जमीन पर बनी इस फायरिंग रेंज में एक शेड तैयार किया गया है। इसके नीचे अंडरग्राउंड में मशीनें लगाई गई हैं। इन मशीनों से डिस्क अलग-अलग दिशाओं में छोड़ी जा सकती हैं। निशानेबाज शेड के नीचे खड़े होकर उन पर निशाना साधेंगे।
उद्धव सिंह ने दिया लाइव डेमो
कजाकिस्तान में एशियाई खेलों में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके निशानेबाज उद्धव सिंह हरासर ने सिंगल ट्रैप और डबल ट्रैप का लाइव डेमो दिया। क्लब पदाधिकारियों ने बताया कि रेंज में खिलाड़ियों को तकनीकी सुविधाओं के साथ देश के स्तरीय कोच उपलब्ध करवाए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर विदेशी कोच भी बुलाए जाएंगे। ट्रेनिंग के लिए क्लब की ओर से कुछ बंदूकें भी उपलब्ध करवाई जाएंगी।
क्लब अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ ने बताया- नेशनल राइफल एसोसिएशन के तकनीकी पदाधिकारी रेंज का निरीक्षण कर गहन परीक्षण करेंगे। प्रमाण पत्र मिलने के बाद जिला प्रशासन से अनुमति लेकर ट्रेनिंग शुरू की जाएगी।
बीकानेर में निशानेबाजी का पुराना इतिहास
बीकानेर का निशानेबाजी से पुराना नाता रहा है। महाराजा करणी सिंह को 1961 और राज्यश्री कुमारी को 1969 में अर्जुन अवॉर्ड मिला था। ओलिंपिक खिलाड़ी और वर्तमान में भाजपा नेता राज्यवर्द्धन सिंह भी बीकानेर के लूणकरनसर के रहने वाले हैं। अब क्लब का प्रयास है कि नई पीढ़ी को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलें और वे देश के लिए पदक जीतें।
सोइन ने बताया कि क्लब में वर्तमान में बास्केटबॉल, टेनिस, टेबल टेनिस, ताइक्वांडो, तीरंदाजी, क्रिकेट, पिकलबॉल, बैडमिंटन, बिलियर्ड्स और तैराकी सहित कई खेलों की सुविधाएं हैं। यहां रोजाना औसतन 300 से 400 बच्चे अभ्यास करते हैं। नई शूटिंग रेंज से निशानेबाजों को आगे बढ़ने का एक और अवसर मिलेगा।