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जाट रेजिमेंट सैनिक का पेंशन विवाद 62 साल बाद सुलझा: 85 साल की उम्र में पत्नी को मिलेगा लाभ; परिवार में सात बेटे-दो बेटियां, 3 फौजी रहे - Panchkula News

September 11, 2026

पंचकूला की चंडी मंदिर स्थित सशस्त्र सेना ट्रिब्यूनल (AFT) की रीजनल बेंच ने 62 साल पुराने पेंशन विवाद में मृत सैनिक की विधवा के पक्ष में फैसला सुनाया है। दादरी के फोगाट गांव निवासी 85 वर्षीय ब्रह्मा देवी ने पति चांदराम के निधन के बाद पेंशन के लिए सेना

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दरअसल, सेना ने चांदराम की सेवा अवधि 15 साल से कम मानी थी, इसलिए परिवार को पेंशन नहीं मिली। ब्रह्मा देवी का दावा था कि चांदराम ने सेकेंड वर्ल्ड वॉर के दौरान 4 साल 2 महीने 17 दिन सेवा की थी। अन्य सेवाओं को मिलाकर उनकी कुल सेवा 16 साल थी।

पांच साल की कानूनी लड़ाई के बाद AFT ने संबंधित अधिकारियों को ब्रह्मा देवी की पेंशन तय करने के निर्देश दिए हैं। परिवार के मुताबिक, चांदराम को सेकेंड वर्ल्ड वॉर के दौरान मेडल मिला था और तत्कालीन अंग्रेजी सरकार ने सांवड़ गांव में परिवार को साढ़े 12 एकड़ जमीन अलॉट की थी। 1954 में चांदराम सेवामुक्त हुए थे। इसके बाद परिवार कई बार पेंशन के लिए अधिकारियों से मिला, लेकिन शॉर्ट सर्विस बताकर मांग खारिज होती रही।

ब्रह्मा देवी के सात बेटे और दो बेटियां हैं। तीन बेटे सेना में रहे, जबकि चार खेती करते हैं। बेटे सतप्रकाश का कहना है कि अब 62 साल बाद परिवार को पेंशन को लेकर राहत मिली है।

चांदराम फोगाट ने सेकेंड वर्ल्ड वॉर में भी सेवाएं दीं। (फाइल फोटो)

चांदराम फोगाट ने सेकेंड वर्ल्ड वॉर में भी सेवाएं दीं। (फाइल फोटो)

चार पॉइंट में समझिए सैनिक चांदराम की कहानी…

  • चरखी दादरी के फौगाट गांव के रहने वाले: चरखी दादरी के फौगाट गांव निवासी चांदराम फोगाट ने सेकेंड वर्ल्ड वॉर के दौरान और आजादी के बाद तक सेना में सेवा दी। हालांकि, उनकी सेवा को क्वालिफाइंग सर्विस नहीं माना गया, जिसके चलते उन्हें पेंशन नहीं मिली। 1954 में उन्हें छंटनी के तहत सेना से सेवामुक्त कर दिया गया था।
  • 1994 में निधन, 2021 में केस दायर: चांदराम फोगाट का 1994 में निधन हो गया था। उनकी पत्नी ने 2020 के बाद से सेना के अधिकारियों से पेंशन की डिमांड करते हुए लेटर भेजने शुरू किए। वहां से फैमिली पेंशन का दावा खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने 2021 में सशस्त्र सेना ट्रिब्यूनल में केस दायर किया।
  • आर्मी में सूबेदार बेटे ने शुरू की लड़ाई: चांदराम के बेटे सतप्रकाश फोगाट भी आर्मी से सूबेदार पद से रिटायर हैं। उन्हें 1951 का एक पत्र मिला, जिसमें लिखा था कि वॉर टाइम की सेवा को दोगुना पीरियड माना जाता है। इसी आधार पर उन्होंने पिता की पेंशन के लिए कोर्ट में लड़ाई शुरू की।
  • सम्मान के तौर पर मिलते थे 5 रुपए: 1954 में सेना से कार्यमुक्त होने के बाद चांदराम को वर्ल्ड वॉर में शामिल होने के सम्मान में 5 रुपए मिलते थे। बाद में यह राशि बढ़कर 20 रुपए हो गई। 1994 में जब उनका निधन हुआ, तब यह राशि बढ़कर 100 रुपए हो चुकी थी।
चांदराम फोगाट के बड़े बेटे सतप्रकाश पत्नी के साथ। सत्यप्रकाश भी सेना से रिटायर हैं।

चांदराम फोगाट के बड़े बेटे सतप्रकाश पत्नी के साथ। सत्यप्रकाश भी सेना से रिटायर हैं।

अब जानिए वो वजह, जिससे चांदराम की पुरानी लड़ाई जीत गई…

1941 में सेना में भर्ती हुए थे चांदराम: चांदराम 16 जून 1941 को सेना में भर्ती हुए थे। 5 मई 1947 को उन्हें पहली बार सेवा से मुक्त किया गया। इसके बाद 21 दिसंबर 1948 को वे आर्मी ऑर्डनेंस कोर में फिर भर्ती हुए और दिसंबर 1954 में सेवा से मुक्त हुए। दोनों सेवाओं को मिलाकर उनकी सामान्य सैन्य सेवा 11 साल से ज्यादा थी।

वर्ल्ड वॉर की सेवा दोगुनी जोड़ी गई: चांदराम ने 16 जून 1941 से 2 सितंबर 1945 तक द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सेवा की। यह अवधि 4 साल 2 महीने 17 दिन थी। 30 अप्रैल 1951 के भारत सरकार के नियम के अनुसार युद्ध के दौरान की इस सेवा को पेंशन के लिए दोगुना गिना गया। इस तरह वर्ल्ड वॉर की सेवा 8 साल 5 महीने 4 दिन मानी गई। बाकी सेवाएं जोड़ने पर उनकी कुल सेवा 16 साल 18 दिन हो गई, जबकि पेंशन के लिए 15 साल की सेवा जरूरी थी।

सेना ने सिर्फ 5 साल 327 दिन की सेवा मानी: सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, चांदराम ने 21 दिसंबर 1948 से दिसंबर 1954 तक ही सेवा की थी। इस हिसाब से उनकी सेवा 5 साल 327 दिन थी, जो पेंशन के लिए जरूरी 15 साल से कम थी।

पहली सेवा का रिकॉर्ड भी सही माना: AFT ने आदेश में कहा कि सेना ने चांदराम की पहली सेवा पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी। उनकी पत्नी ब्रह्मा ने जाट रेजिमेंट का 14 अप्रैल 2026 का रिकॉर्ड भी पेश किया। इसमें 16 जून 1941 से 5 मई 1947 तक चांदराम की सेवा दर्ज थी। ट्रिब्यूनल ने इस रिकॉर्ड को सेना का आधिकारिक रिकॉर्ड माना और पहली सेवा को भी मान्य कर दिया। जिसके बाद पेंशन का रास्ता साफ हुआ।

पंचकूला स्थित आर्मी ट्रिब्यूनल बेंच ने चांदराम पेंशन केस का फैसला सुनाया है। (फाइल)

पंचकूला स्थित आर्मी ट्रिब्यूनल बेंच ने चांदराम पेंशन केस का फैसला सुनाया है। (फाइल)

3 साल का एरियर और आजीवन पेंशन

ब्रह्मा ने आवेदन में 6 दिसंबर 1954 से 2 दिसंबर 1992 तक पति की सेवा पेंशन का पूरा बकाया और इसके बाद फैमिली पेंशन मांगी थी। साथ ही 18% सालाना ब्याज की मांग की थी।

ट्रिब्यूनल ने इतने पुराने दावे के कारण पूरा एरियर देने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के Union of India & Others Vs. Tarsem Singh मामले में 13 अगस्त 2008 के फैसले के आधार पर एरियर को 3 साल तक सीमित रखा।