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पंजाब में धान कटाई के साथ ही पराली जलाने के मामलों में तेजी आ गई है। इस बार अमृतसर जिला पराली जलाने के मामलों में सबसे ऊपर पहुंच गया है। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मुताबिक, पूरे पंजाब में पराली जलाने की 111 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से सबसे अधिक 61 घटनाएं अकेले अमृतसर जिले से सामने आई हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने आग लगाने वाले किसानों के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
टीमों ने निरीक्षण करते हुए 60 जगह की जांच की, जिनमें से 24 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई है, जबकि एक गैर-एएफएल खेत में भी इसके निशान मिले हैं। खेतों में आग की घटनाओं को रोकने में नाकाम रहने पर अमृतसर के 38 नोडल और सुपरवाइजरी अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
इसके अलावा, पराली जलाने वाले किसानों पर सख्त कार्रवाई करते हुए जिले में 20 मामलों में कुल 1,00,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से 65,000 रुपए की वसूली भी की जा चुकी है। साथ ही, 2 किसानों के फार्म रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है।
प्रशासन द्वारा अब तक 4 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें थाना कंबोह की पुलिस ने 2 अक्टूबर को किसान कृष्ण निवासी फतेहगढ़ शुक्रचक्क, थाना कत्थूनंगल ने 6 अक्टूबर को किसान सतपाल निवासी अजायबवाली और थाना खिलचियां पुलिस ने 9 अक्टूबर को किसान जसपाल सिंह निवासी भैणी बदेसा और सुरजीत सिंह निवासी तिम्मोवाल के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं।
तरनतारन जिले में स्थिति खराब है जहां 30 मामले सामने आने पर 60,000 रुपए जुर्माना, 12 रेड एंट्री और 3 एफआईआर दर्ज हुई हैं। मौजूदा सीजन में पराली जलाने की घटनाओं पर लगाम कसने के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट के सदस्य (तकनीकी) डॉ. एसडी अत्री के नेतृत्व में एक टीम ने अमृतसर और तरनतारन जिलों का दौरा किया।
शनिवार को टीम ने दोनों जिलों के डीसी और जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह समाप्त करने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर बिना किसी ढिलाई के सख्त कार्रवाई हो।
मैनेजमेंट की टीम ने 2 दिन अमृतसर और तरनतारन के उन गांवों का फील्ड विजिट किया, जहां पराली जलाने की घटनाएं अधिक होती हैं। आयोग ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए कि किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें समय पर मिलें। पराली को खेतों से बाहर ठिकाने लगाने के लिए किसानों और एग्रीगेटर्स को बॉयलर वाले उद्योगों से जोड़ा गया है।
पंजाब के 18 जिलों में 1 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात कर दिए गए हैं। दोनों जिलों के अधिकारियों ने मैनेजमेंट को भरोसा दिलाया है कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम किया जाएगा।