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अरुणाचल में 60 किमी घुसपैठ की खबर झूठ, भ्रम फैलाकर सेना का मनोबल न गिराएं... बोले किरेन रिजिजू

August 20, 2026

देश

  • Compiled by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Aug 20, 2026, 10:10 AM IST

रिजिजू ने चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र में 60 किलोमीटर अंदर तक घुसने और गांवों पर कब्जा करने की रिपोर्टों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश या अन्य जगहों की तस्वीरों को शेयर करके यह दावा करना कि चीनी सेना अरुणाचल में घुस आई है, सरासर झूठ है।

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चीन सीमा विवाद पर किरेन रिजिजू ने क्या कहा? (File photo)

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ANI

Kiren Rijiju: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीनी घुसपैठ की खबरों को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अरुणाचल प्रदेश के कुछ सीमावर्ती इलाकों में LAC स्पष्ट रूप से सीमांकित नहीं है, जिसके कारण सीमा के दोनों ओर रहने वाले लोगों के बीच जमीन को लेकर अलग-अलग धारणाएं हैं और यही भ्रम की वजह बनती है।

60 किमी चीनी घुसपैठ का दावा फर्जी

रिजिजू ने चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र में 60 किलोमीटर अंदर तक घुसने और गांवों पर कब्जा करने की रिपोर्टों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश या अन्य जगहों की असंबद्ध तस्वीरों को शेयर करके यह दावा करना कि चीनी सेना अरुणाचल में घुस आई है, सरासर झूठ है। इस तरह की भ्रामक खबरें देश में भ्रम फैलाती हैं और सीमा पर तैनात हमारे सुरक्षा बलों और सेना के जवानों का मनोबल गिराती हैं।

1959 और 1962 का इतिहास

रिजिजू ने बताया कि लोंगजू (Longju) से आगे नदी और घाटी के संगम पर जिस जगह चीन ने गांव जैसी कुछ संरचनाएं बनाई हैं, उस जमीन पर चीन ने 1959 में कब्जा किया था और 1962 के युद्ध के दौरान वहां अपनी उपस्थिति मजबूत की थी। वर्तमान में भारत की सीमा चौकी वहां मौजूद है। 1962 के बाद से उस क्षेत्र में दोनों देशों के बीच आवाजाही बंद है। हालांकि, रिजिजू ने माना कि ऊपरी पहाड़ियों और लकीरों पर चीनी सैन्य गतिविधियां निश्चित रूप से बढ़ी हैं, जिसे लेकर स्थानीय ग्रामीणों की चिंताएं जायज हैं और सरकार उन्हें गंभीरता से ले रही है।

सेना और ITBP की गश्त बढ़ी

रिजिजू के अनुसार, भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने पहले की तुलना में सीमावर्ती इलाकों में अपनी गश्त को काफी मजबूत और तेज कर दिया है। साथ ही विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में कहा था कि सीमा के हालात का असर भारत-चीन के समग्र संबंधों पर पड़ता है। दोनों देश किसी भी गलतफहमी और गलत आकलन से बचने के लिए मौजूदा कूटनीतिक और सैन्य तंत्र का उपयोग करने पर सहमत हुए हैं।

भारत-चीन संबंधों का मौजूदा परिदृश्य

2020 में लद्दाख के गालवान घाटी संघर्ष के बाद दोनों देशों के संबंध पिछले छह दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे, जिसमें 20 भारतीय जवान शहीद हुए थे। उसके बाद से दोनों देश बेहद सावधानीपूर्वक अपने संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की प्रक्रिया में जुटे हैं।

अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के सुदूर ताक्सिन (Taksin) इलाके में जुलाई के शुरुआती दिनों में भारत और चीन के सैनिकों के बीच कुछ तनातनी की खबरें आई थीं, जो महीने के अंत तक गंभीर हो गई थीं। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा बल सीमा पर पूरी तरह मुस्तैद हैं और किसी भी क्षेत्रीय अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

Amit Mandal

अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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