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5000 लोग लापता, लेकिन इन्हीं 900 लोगों को क्यों खोजने पर फोकस कर रहा नेपाल?

September 7, 2026

5000 लोग लापता, लेकिन इन्हीं 900 लोगों को क्यों खोजने पर फोकस कर रहा नेपाल?

नेपाल बाढ़ त्रासदीImage Credit source: PTI

नेपाल में भयानक बाढ़ और भूस्खलन के 13 दिन बाद भी सैकड़ों लोगों की तलाश जारी है. सोमवार को नेपाली बचाव दलों ने चीन की सीमा से लगे हिमालयी इलाकों में पनबिजली परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को खोजने के लिए अभियान चलाया. अधिकारियों के मुताबिक, इन परियोजनाओं से लापता करीब 900 लोगों में से लगभग 121 के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है. यही वजह है कि बचाव दलों का ध्यान फिलहाल इन सुरंगों पर केंद्रित है.

सेना के बचाव दल का कहना है कि पनबिजली परियोजनाओं से लापता सभी लोग सुरंगों के अंदर नहीं हैं. बाकी लोग पावर प्लांट के दूसरे हिस्सों में काम कर रहे होंगे. लेकिन सुरंगों में कुछ लोगों के जिंदा होने की संभावना अभी बनी हुई है. बचाव कार्यों में शामिल सांसद श्री राम न्यूपाने ने रॉयटर्स को बताया कि सोमवार को खोजे जा रहे लोगों में रसुवा जिले की चिलिमे पनबिजली परियोजना के छह लापता कर्मचारियों में से चार भी शामिल हैं. उनके मुताबिक, इन लोगों के अभी भी जीवित होने की उम्मीद है. अधिकारियों ने चिलिमे परियोजना के लिए जरूरी खास उपकरण और तकनीकें भी हासिल कर ली हैं. बचाव दलों का मानना है कि सुरंगों में हवा की जेबें, रहने की जगह और कमरे मौजूद होने के कारण कुछ लोग वहां लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि सुरंगों में कितने लोग फंसे हैं और उनकी हालत क्या है.

चार लोगों के बचाव से जगी उम्मीद

नेपाल में हाल के दिनों में चार लोगों को मलबे से जिंदा बचाया गया है. शनिवार को एक चीनी नागरिक को सुरंग से बाहर निकाला गया. शुक्रवार को दो पनबिजली कर्मचारियों को दूसरी सुरंग से बचाया गया था. शनिवार को एक नेपाली महिला को उसके मलबे में दबे घर से बाहर निकाला गया. इन बचाव अभियानों ने राहतकर्मियों और प्रभावित परिवारों में उम्मीद जगाई है. हालांकि, आपदा के 13 दिन बाद भी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं और कई इलाकों तक पहुंचना मुश्किल बना हुआ है.

26 अगस्त को शुरू हुई थी आपदा

यह आपदा 26 अगस्त को नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र की सीमा पर शुरू हुई थी. एक ग्लेशियर का हिस्सा टूटने के बाद मिट्टी और चट्टानों का विशाल ढेर नदी में गिर गया. इसके कारण आई बाढ़ ने कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया. सड़कों और राजमार्गों पर भी भारी मलबा जमा हो गया. नेपाल और तिब्बत में बाढ़ और भूस्खलन से कम से कम 1,380 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5,500 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं. नेपाल के विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत मदद मांगी है. इसमें ज्यादा क्षमता वाले ड्रोन, बेली ब्रिज, डीएनए जांच किट, सुरंगों में बचाव के लिए खास सूट और महामारी से बचाव का सामान शामिल है.

चीन पर लापता लोगों की जानकारी देने का दबाव

चीन ने रविवार को बताया कि तिब्बत में लापता लोगों की तलाश के दौरान बचावकर्मियों को 12 और शव मिले हैं. लापता लोगों में कई भारतीय या भारतीय मूल के लोग भी हैं, जो मानसरोवर झील और माउंट कैलाश की यात्रा के लिए तिब्बत गए थे. चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि चीन खोज और बचाव अभियान जारी रखेगा और आपदा के बाद की स्थिति से निपटने के लिए हर संभव कोशिश करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि बीजिंग आपदा और बचाव कार्यों की ताजा जानकारी तुरंत जारी करेगा. विदेशी पर्यटकों के लापता होने के बाद उनके परिवार चीन से जानकारी देने की मांग कर रहे हैं. रविवार को चीन ने पहली बार रॉयटर्स समेत आठ विदेशी मीडिया संस्थानों के पत्रकारों को सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों का दौरा कराया.

नेपाल में सोमवार को आपदा के बाद शोक का 13वां दिन मनाया गया. हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार, यह शोक का आखिरी दिन होता है. इस मौके पर सरकारी कार्यालयों और विदेशों में स्थित नेपाली मिशनों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाया गया. हालांकि, सरकार ने कोई बड़ा कार्यक्रम आयोजित नहीं किया. नेशनल इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर के फनिंद्र पौडेल ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव और खोज अभियान अभी भी चल रहा है. राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल भी सोमवार को प्रभावित इलाकों के दौरे पर थे. प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बताया कि नुवाकोट जिला जेल के सुरक्षा कर्मियों ने बाढ़ के दौरान 923 कैदियों की जान बचाई. उन्हें ऊंचे स्थान पर बनी इमारत में पहुंचाया गया था. शाह के मुताबिक, बाढ़ शुरू होने पर जेल की दीवार और गेट तोड़कर भागे 50 कैदियों को भी बाद में पकड़ लिया गया.

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