सिंगरौली जिले के मोरवा स्थित नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) के मुख्यालय पर बुधवार से सिंगरौली संयुक्त पुनर्स्थापन संघर्ष मोर्चा ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।
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जयंत कोयला खदान के विस्तार से प्रभावित 500 से अधिक विस्थापित परिवारों ने एनसीएल के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर प्रदर्शन किया। आंदोलनकारी विस्थापितों को उचित मुआवजा, पुनर्वास, पुनर्स्थापन और रोजगार दिए जाने की मांग कर रहे हैं।
एनसीएल के सामने रखा 45 सूत्रीय मांग-पत्र
संघर्ष मोर्चे ने एनसीएल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के समक्ष 45 सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन सौंपा है। इसमें विस्थापित परिवारों को नगर निगम क्षेत्र या प्रभावित इलाके में ही पुनर्वास के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मुख्य मांग रखी गई है।
इसके साथ ही क्षेत्र के स्कूल, अस्पताल, धार्मिक स्थल, सामुदायिक भवन और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी पुनर्स्थापित करने की मांग की गई है।
मुआवजा दर और परिसंपत्तियों के मूल्यांकन पर जोर
मांग-पत्र में न्यू मार्केट की 44 दुकानों के दुकानदारों को मुआवजा देने, आवासीय भूमि की दर 16 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर और व्यावसायिक/डायवर्टेड भूमि की दर 19,800 रुपए प्रति वर्ग मीटर निर्धारित करने की बात कही गई है।
साथ ही भवनों व परिसंपत्तियों का वास्तविक मूल्यांकन, बाजार दर में हुई वृद्धि का लाभ और एन्युटी राशि (पेंशन की तरह) के सही निर्धारण की मांग की गई है।
निविदाओं और रोजगार में आरक्षण की मांग
विस्थापितों ने एनसीएल की 2 करोड़ रुपए तक की निविदाओं में विस्थापितों के लिए और 50 करोड़ रुपए तक की निविदाओं में विस्थापित समूहों के लिए आरक्षण दिए जाने की मांग उठाई है।
इसके अलावा एनसीएल से जुड़ी परियोजनाओं में रोजगार आरक्षण, स्थानीय स्कूलों में बच्चों के लिए सीटें आरक्षित करने और विस्थापित परिवारों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा देने की मांग भी रखी गई है।
पूर्व विधायक ने मुआवजा प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सिंगरौली के पूर्व विधायक और विस्थापन मंच के संरक्षक राम लल्लू वैद्य ने कंपनी पर विस्थापन नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह शहरी विस्थापन है और हर परिवार की स्थिति अलग है, इसलिए जमीन, मकान और व्यवसाय के आधार पर अलग-अलग मूल्यांकन होना चाहिए, न कि सभी को एक समान तरीके से मुआवजा दिया जाए।

संघर्ष मोर्चे ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों का ठोस समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक यह आंदोलन लगातार जारी रहेगा।