फ्रांस में महंगाई और खराब सार्वजनिक सेवाओं के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हो गए. पेरिस समेत कई शहरों में आगजनी और लूटपाट हुई. प्रधानमंत्री के अनुसार, 1,200 से ज्यादा लोग गिरफ्तार हुए.
Written By : सौरव कुमार | Updated at : 18 Oct 2026 10:51 AM (IST)

फ्रांस में लाखों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं.
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फ्रांस में बढ़ती महंगाई, खराब होती सार्वजनिक सेवाओं और स्कूलों की समस्याओं के खिलाफ शनिवार, 17 अक्टूबर को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए. पेरिस समेत कई शहरों में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और लोगों के बीच झड़पें हुईं. कुछ जगहों पर दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की गई, जबकि कई इमारतों में आग लगा दी गई. फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू के मुताबिक, हिंसा के बाद 1,200 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया और 150 पुलिसकर्मी घायल हुए.
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज़ के अनुसार, देशभर में करीब 5.5 लाख लोग प्रदर्शन में शामिल हुए. इनमें से लगभग 1.1 लाख लोग पेरिस में सड़कों पर उतरे. हालांकि, प्रदर्शन आयोजित करने वाले संगठनों ने दावा किया कि आंदोलन में करीब 8 लाख लोगों ने हिस्सा लिया.
पेरिस में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प
पेरिस में दिन के समय मुख्य मार्च काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा, लेकिन शाम होते-होते कई जगह हालात बिगड़ गए. कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर आग लगा दी और वाहनों को नुकसान पहुंचाया. प्लेस डे ला रिपब्लिक के आसपास भी आगजनी और पुलिस के साथ झड़पों की खबरें सामने आईं.
पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया. कुछ जगहों पर पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज भी किया. कई दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की गई.
मैक्रों ने हिंसा की निंदा की
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने आगजनी, लूटपाट और सरकारी इमारतों पर हमलों में शामिल लोगों की निंदा की. उन्होंने कहा कि हिंसा और तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने भी कहा कि किसी को हिंसा के जरिए अपना राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ाने की इजाजत नहीं दी जा सकती. सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसा के बीच अंतर करते हुए तोड़फोड़ में शामिल लोगों पर कार्रवाई की बात कही.
आखिर क्यों सड़कों पर उतरे लोग?
फ्रांस में यह आंदोलन स्कूलों की खराब हालत और शिक्षकों की कमी को लेकर शुरू हुआ था. धीरे-धीरे इसमें महंगाई, ईंधन की कीमतों, आर्थिक परेशानी और सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए. ट्रेड यूनियनों ने वेतन और पेंशन में सुधार तथा जरूरी सेवाओं को बेहतर बनाने की मांग का समर्थन किया.
प्रदर्शन में शामिल सभी लोग हिंसा में शामिल नहीं थे. कई शहरों में बड़ी संख्या में लोगों ने शांतिपूर्ण मार्च भी निकाला. हिंसक घटनाएं कुछ जगहों पर हुईं, जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ और दुकानों और सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचा.
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About the author सौरव कुमार
4 सालों से डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं. साल 2022 से एबीपी न्यूज़ से जुड़े हुए हैं. राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय डेस्क की भी जिम्मेदारी संभालते हैं. सेंट्रल यूनिर्वसिटी ऑफ साउथ बिहार से 2022 में पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की डिग्री हासिल की. राजनीति, चुनाव, सामाजिक विषयों और साहित्य में रुचि है. तथ्यों की गहराई और भाषा की संवेदनशीलता पर जोर देते हैं. राजनीति से जुड़ी खबरों पर लगातार लिख रहे हैं
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Published at : 18 Oct 2026 10:50 AM (IST)
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